ईपीएस = (शुद्ध आय/कुल शेयर)

Stock Market Investment: शेयर बाजार में निवेश का है प्लान, तो पहले समझ लें ये जरूरी बातें

By: एबीपी न्यूज़ | Updated शेयर बाजार में पीई क्या है at : 12 Jul 2021 11:19 PM (IST)

शेयर बाजार में निवेश करने का चलन शेयर बाजार में पीई क्या है बढ़ता ही जा रहा है. हालांकि अब भी कई लोगों का मानना है कि यह बहुत तकनीकी काम है. आप अगर शेयर बाजार में निवेश करना चाहते हैं तो आपको कुछ बेसिक जानकारियां होनी जरूरी है. यह जानकारियां आपके बहुत काम आएंगीं. हम आपको कुछ ऐसे अनुपातों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनकी मदद से आप आसानी से शेयर का मूल्यांकन कर सकेंगे.

प्राइस टू अर्निंग रेश्यो (P/E)
सबसे शेयर बाजार में पीई क्या है पहले बात पीई रेश्यो की. इसका इस्तेमाल किसी कंपनी के शेयर की वैल्यू का पता लगाने के लिए किया जाता है. पीई शेयर की कीमत और शेयर से आय का अनुपात होता है. इसका मतलब होता है अर्निंग प्रति शेयर. यह एक ही सेक्टर में दो कंपनियों के बीच सलेक्शन में मददगार होता है. बता दें कि शेयर से आय को ईपीएस भी कहते हैं.

Stock Market Tips: निवेश से पहले इन ‘Ratio’ के बारे में जानना जरूरी, सही शेयर चुनने में मिलेगी मदद

Stock Market Tips: निवेश से पहले इन ‘Ratio’ के बारे में जानना जरूरी, सही शेयर चुनने में मिलेगी मदद

कुछ खास रेशियो के जरिए स्टॉक चुनने में मदद मिल सकती है. (Image- Pixabay)

Stock Market Tips: स्टॉक मार्केट में जब आप सीधे निवेश करते हैं तो सबसे पहला काम होता है, बेहतर स्टॉक को चुनना. स्टॉक चुनते समय बहुत सावधानियां बरतनी होती हैं ताकि शेयर बाजार में पीई क्या है आपको शानदार मुनाफा हासिल हो सके. कभी-कभी आपने खबरों में पढ़ा होगा कि इस कंपनी शेयर बाजार में पीई क्या है का शेयर महंगा है तो इसे लेना सही नहीं है. ऐसे में आपके मन में जरूर सवाल उठता होगा कि कोई शेयर सस्ता है या महंगा, इसका पता शेयर बाजार में पीई क्या है शेयर बाजार में पीई क्या है कैसे चलता है कि किसी स्टॉक का भाव सही या नही. इसका कैलकुलेशन खास फाइनेंशियल रेश्यो से पता चलता है. इसके अलावा इन रेशियो से कंपनी की सेहत का भी अंदाजा लगता है. आइए इन कुछ खास रेशियो के बारे में जानते हैं जिनसे स्टॉक चुनने में मदद मिल सकती है.

Price to Earnings (P/E) Ratio

प्राइस टू अर्निंग्स शेयर बाजार में पीई क्या है रेशियो किसी कंपनी के मौजूदा शेयर भाव और प्रति शेयर आय (EPS) का अनुपात है. इससे किसी कंपनी के शेयर भाव के ओवरवैल्यूड या अंडरवैल्यूड का पता चलता है. इसे मल्टीपल जैसे कि 15x, 20x, 23x के रूप में लिखते हैं और इसके जरिए एक ही इंडस्ट्री की दो कंपनियों के बीच में तुलना की जा सकती है तो एक ही कंपनी के ऐतिहासिक रिकॉर्ड को परखा जा सकता है. इसके अधिक होने का मतलब है कि भविष्य में ग्रोथ को लेकर अधिक उम्मीदें हैं या यह ओवरवैल्यूड है, वहीं दूसरी तरफ इसके कम होने का मतलब है कि कंपनी की ग्रोथ को लेकर अधिक उम्मीदें नहीं है या यह आउटपरफॉर्म कर सकती है यानी कि अंडरवैल्यूड है.

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Return on Equity (R/E) Ratio

यह किसी कंपनी की वित्तीय सेहत को मापने का एक पैमाना है जिसे नेट इनकम को कुल इक्विटी से डिवाइड करके निकालते हैं. इससे किसी कंपनी के शेयरों में निवेश पर रिटर्न का पता चलता है यानी कि यह निवेशकों को एक आइडिया देता है कि इसमें निवेश पर पूंजी कितनी बढ़ सकती है. यह कंपनी की प्रॉफिबिलिटी का मानक है कि कंपनी कितने बेहतर तरीके से प्रॉफिट जेनेरेट कर रही है.

इसका इस्तेमाल किसी कंपनी की बाजार पूंजी को इसके बुक वैल्यू से तुलना करने के लिए की जाती है. इसका मान कंपनी के मौजूदा शेयर भाव को प्रति शेयर के बुक वैल्यू से डिवाइड करके निकाला जाता है. बुक वैल्यू का मतलब बैलेंस शीट में दर्ज वैल्यू है. इसका इस्तेमाल आमतौर पर लांग टर्म निवेशकों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है. इसकी वैल्यू एक से कम होने पर एक से कम होने को बेहतर माना जाता है लेकिन वैल्यू इंवेस्टर्स 3 तक भी बेहतर मानते हैं. यह रेशियो कम होने का मतलब शेयर डिस्काउंट पर है.

Dividend Yield (Dividend-Price Ratio)

इससे यह पता चलता है कि कंपनी अपने शेयर भाव की तुलना में कितना डिविडेंड दे रही है. इसे फीसदी के रूप में दिखाते हैं और इसकी वैल्यू डिविडेंड को शेयर भाव से डिवाइड करके निकालते हैं. हालांकि इसकी वैल्यू अधिक होने का मतलब यह नहीं है कि निवेश के लिए कोई स्टॉक बेहतर है क्योंकि शेयर भाव कम होने पर भी इसकी वैल्यू अधिक हो सकती है.

यह कंपनी के कुल कर्ज और इक्विटी का अनुपात है. यह बहुत महत्वपूर्ण अनुपात है जिससे पता चलता है कि कंपनी कितना लीवरेज इस्तेमाल कर रही है यानी कि कंपनी अपने कारोबार के लिए अपने (शेयरधारकों के) पैसों की तुलना में कितना कर्ज ले रही है. इस रेशियो के अधिक होने का मतलब अधिक रिस्क है. हालांकि लांग टर्म निवेशकों के लिए अधिक रेशियो का मतलब शॉर्ट टर्म निवेशकों की तुलना में अलग है क्योंकि लांग टर्म में देनदारी शॉर्ट टर्म से अलग होती है. आमतौर पर 2-2.5 का डेट-इक्विटी रेशियो अच्छा माना जाता है.

क्या होता है PEG Ratio? किसी कंपनी में निवेश करें या नहीं, ऐसे पा सकते हैं जानकारी

क्या होता है PEG Ratio? किसी कंपनी में निवेश करें या नहीं, ऐसे पा सकते हैं जानकारी

आइए जानते हैं कि प्राइस अर्निंग टू ग्रोथ रेश्यो यानि पेग रेश्यो क्या होता है और इसकी मदद से आप कैसे निवेश के लिए मजबूत फंडामेंटल वाली बढ़िया कंपनी निवेश के लिए चुन सकते हैं. दरअसल पेग रेश्यो के जरिए हम इस बात का अंदाजा लगाते हैं कि निवेश के लिए कंपनी का भाव ओवर वैल्युड है, अंडर वैल्युड है या फेयरली वैल्युड है. फेयरली वैल्युड मतलब वैल्युएशन के लिहाज से शेयर निवेश के लिए ठीक है. अंडर वैल्युड का मतलब ये है कि शेयर की वैल्युएशन सस्ती है और इसमें अभी तेजी आने की काफी संभावना है. ओवरवैल्युड मतलब मौजूदा भाव पर शेयर महंगा है और आगे इसमें गिरावट देखने को मिल सकती है.

कितने पेग रेश्यो पर कंपनी में निवेश सही

अब जरा ये भी जान लेते हैं कि कितने पेग रेश्यो पर कंपनी में निवेश करना सही माना जाता है. अगर किसी कंपनी का पेग रेश्यो 1 है तो उसे फेयरली वैल्युड कहा जाता है. अगर पेग रेश्यो 1 से कम है तो इसे अंडरवैल्युड कहते हैं. अगर पेग रेश्यो 1 से ज्यादा रहता है तो ऐसे शेयर को ओवरवैल्युड शेयर कहते हैं. अब ये भी जान लेते हैं कि आखिर पेग रेश्यो को कैलकुलेट कैसे करते हैं. तो इसका तरीका भी बेहद आसान है. इसके लिए पहले कंपनी की पीई निकालते हैं. इसके लिए कंपनी के मौजूदा शेयर भाव को कंपनी की प्रति शेयर आय यानि ईपीएस से भाग देकर निकालते हैं.

PE= Current Market Price/EPS

अब कंपनी की पीई को कंपनी की अर्निंग ग्रोथ रेट से डिवाइड करने पर जो आंकड़ा आएगा उसे पेग रेश्यो कहते हैं. सटीक पेग रेश्यो निकालने के लिए अर्निंग ग्रोथ रेट के कम से कम 5 साल या उससे ज्यादा के आंकड़े लेने चाहिए. इससे इस बात का सही अंदाजा लग सके कि आने वाले समय में कंपनी का शेयर कैसा प्रदर्शन कर सकता है.

शेयर बाजार में PE रेश्यो क्या है। What is PE ratio in hindi

PE रेश्यो क्या शेयर बाजार में पीई क्या है है? शेयर बाजार में invest करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को आपने इस PE रेश्यो के शेयर बाजार में पीई क्या है बारे बात करते हुए कभी ना कभी तो सुना होगा। इसीलिए आज हम आपको अच्छे से इस concept को explain करेंगे ताकि आप लोग अच्छे से जान सके की PE रेश्यो क्या है और शेयर बाजार में इसका कितना महत्व है।

जो भी लोग शेयर बाजार में invest करते है उन्होंने value investing के बारे में बहुत सुना होगा। क्योंकि शेयर बाजार के सभी धुरंधर invest करने से पहले value investing को जरूर ध्यान में रखते है। तो आप समझो की जो PE रेश्यो है वो ही value investing का आधार होती है। यह हमें बताती है की कोई कंपनी कितनी शेयर बाजार में पीई क्या है सस्ती और कितनी महंगी है। अब आप PE रेश्यो का महत्व तो समझ ही गए होंगे। इसीलिए अब हम PE रेश्यो के concept को आसान भाषा में समझते है।

PE रेश्यो क्या है –

शेयर बाजार में पैसे कमाने के 7 गोल्‍डेन टिप्‍स, देखते-देखते बन जाएंगे मालामाल

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how to make money from stock market: शेयर बाजार एक ऐसी जगह है, जहां निवेशकों को लगता है कि रातोंरात कमाई की जा सकती है. कई बार ऐसा होता है कि कुछ घंटे में ही शेयर से मोटा मुनाफा हो जाता है. बावजूद इसके यह ध्‍यान रखना चाहिए कि इक्विटी में ट्रेडिंग हमेशा से आसान नहीं है. बाजार में आपको अनुशासन और धैर्य की जरूरत पड़ती है. मार्केट में निवेश से पहले अच्‍छी तरह रिसर्च कर लेनी चाहिए. आइए जानते हैं 7 ऐसे गोल्‍डेन टिप्‍स, शेयर बाजार में पीई क्या है जिनका अगर ध्‍यान रखा जाए तो शेयर बाजार से जमकर कमाई की जा सकती है.

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