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Share Market खुलने से पहले जान लें ये 5 अहम बातें, मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में होगी आसानी

गुरुवार को मंथली एक्सपायरी के दिन शेयर बाजार फ्लैट खुलने की उम्मीद है क्योंकि वैश्विक बाजारों और एसजीएक्स निफ्टी से कुछ इसी तरह के संकेत मिले हैं।

Edited by: India TV Paisa Desk
Updated on: April 28, 2022 8:31 IST

Share Market - India TV Hindi

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Highlights

  • वैश्विक और एशियाई बाजार से मजबूत संकेत नहीं, बाजार की सुस्त शुरुआत होगी
  • चीन में लॉकडाउन, महंगाई और कंपनियों के कमजोर नतीजे से बाजार में सुस्ती
  • मुनाफावसूली से बुधवार को बीएसई सेंसेक्स 537 अंक टूटकर बंद हुआ था

Share Market Today: शेयर बाजार में बीते कई दिनों से बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। आज यानी गुरुवार को मंथली एक्सपायरी के दिन शेयर बाजार फ्लैट खुलने की उम्मीद है क्योंकि वैश्विक बाजारों और एसजीएक्स निफ्टी से कुछ इसी तरह के संकेत मिले हैं। कारोबार के दौरान तेजी-मंदी देखने को मिल सकती है क्योंकि आज मंथली एक्सपायरी का दिन है। मार्केट एक्सपर्ट S&P500 इंडेक्स रिकॉर्ड का कहना है कि बाजार की चाल तय करने में विदेशी निवेशकों और घरेलू निवेशकों की अहम भूमिका होगी। ऐसे में अगर आप ट्रेडर हैं तो अग्रेसिव निवेश करने से बचें। वहीं, निवेशक है तो अच्छी कंपनी के साथ बने रहें। आइए, एक नजर डालते हैं उन पांच खबरों पर जिनका असर आज भारतीय बाजार पर देखने को मिल सकता है।

वैश्विक बाजार से मिले-जुले संकेत

घरेलू शेयर बाजार के लिए वैश्विक बाजार के संके​त मिले जुले हैं। आज के कारोबार में एशियाई बाजारों में खरीदारी देखने को मिल रही है। वहीं, SGX Nifty में फ्लैट ट्रेडिंग है। अमेरिकी बाजार में फिर से खरीदारी लौटी है। बुधवार को Nasdaq में 1.7 फीादी तेजी रही और यह 12,488.93 के स्तर पर बंद हुआ। हाउ जोन्स में 61.75 अंकों की बढ़त रही और यह 33,301.93 के स्तर पर बंद हुआ। S&P 500 इंडेक्स में 0.2 फीसदी तेजी रही और यह 4,183.96 के स्तर पर बंद हुआ। इससे संकेत मिलता है कि भारतीय बाजार की आज सुस्त शुरुआत होगी।

कच्चे तेल में हल्की नरमी

ब्रेंट क्रूड में हल्की नरमी देखने को मिल रही है। ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा है, जबकि अमेरिकी क्रूड 1023 डॉलर प्रति बैरल पर है। यूएस में 10 साल की बॉन्ड यील्ड 2.838 के लेवल पर है। यह भारतीय बाजार को सपोर्ट कर सकता है। इसका असर तेल कंपनियों के शेयर पर देखने को मिल सकती है।

सरकार ने उर्वरकों के लिए सब्सिडी को मंजूरी दी

सरकार ने बुधवार को किसानों को सस्ती कीमत पर उर्वरक उपलब्ध कराने के के लिए डीएपी सहित फॉस्फेटिक और पोटाश (पीएंडके) उर्वरकों के लिए 60,939.23 करोड़ रुपये की सब्सिडी को मंजूरी दी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 1 अप्रैल, 2022 से 30 सितंबर, 2022 तक खरीफ सीजन के लिए फॉस्फेटिक और पोटाश उर्वरकों के लिए पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) दरों को मंजूरी दी है। इस खबर के दम पर उर्वरक कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है।

HUL Q4 का बढ़कर 2,327 करोड़ रुपये

हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (एचयूएल) का लाभ मार्च 2022 को समाप्त चौथी तिमाही में 8.6 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2,327 करोड़ रुपये पहुंच गया। जबकि एक साल पहले यह 2,143 करोड़ रुपये था। शुद्ध लाभ दिसंबर 2021 तिमाही में प्राप्त 2,243 रुपये के लाभ की तुलना में 3.7 प्रतिशत बढ़ा है। ऐसे में आज एचयूएल के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है।

आज इन कंपनियों के नतीजे पर रहेगी नजर

आज एक्सिस बैंक, बजाज फिनसर्व, अंबुजा सीमेंट्स, एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस कंपनी, वेदांत, एग्रो टेक फूड्स, बायोकॉन, कोरोमंडल इंटरनेशनल, एम्बेसी ऑफिस पार्क्स आरईआईटी, फाइनोटेक्स केमिकल, आईआईएफएल फाइनेंस, इंडियामार्ट इंटरमेश, लौरस लैब्स, मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज, एमफैसिस, प्रॉक्टर एंड गैंबल हाइजीन एंड हेल्थ केयर, पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस, शॉपर्स स्टॉप, श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस, स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज और वरुण बेवरेजेज अपनी तिमाही नतीजे जारी करेंगे। इन कंपनियों के शेयरों पर इसका असर देखने को मिल सकता है।

सेसेंक्स और निफ्टी ने बनाया तेजी का नया रिकॉर्ड, सेंसेक्स में लगभग 200 पॉइंट की तेजी, 15800 के करीब बना हुआ है निफ्टी

आज बाजार में चौतरफा खरीदारी हो रही है। सेंसेक्स में लगभग 200 पॉइंट की मजबूती है जबकि निफ्टी 50 पॉइंट ऊपर है। कारोबार की शुरुआत में लगभग आधा पर्सेंट ऊपर रहे निफ्टी S&P500 इंडेक्स रिकॉर्ड मिड कैप में लगभग 0.25% की तेजी है। स्मॉल कैप इंडेक्स में लगभग 0.50% की मजबूती है।

जानकारों के मुताबिक, शेयर बाजार में तेजी को पांच वजहों से सपोर्ट मिल रहा है।

1. कोविड-19 संक्रमण के मामलों में लगातार गिरावट आ रही है।

2. कई राज्यों में कोविड के चलते लगाई गई पाबंदियों को धीरे-धीरे हटाया जा रहा है।

3. शेयर बाजार में छोटे निवेशकों की संख्या बढ़ रही है।

4. इकोनॉमिक रिकवरी तेज रफ्तार से होने की उम्मीद बढ़ी है।

5. टीकाकरण की रफ्तार में तेजी आई है।

जून 2021 में सेंसेक्स के स्तर

तारीखउच्चतमनिम्नतम
1 जून52,22851,808
2 जून51,91351,450
3 जून52,27351,942
4 जून52,38951,952
7 जून52,37852,054
8 जून52,43252,135
9 जून52,44651,717
10 जून52,34651,957
11 जून52,64152,388

निफ्टी के मेटल, IT, फार्मा, ऑटो और एनर्जी इंडेक्स में मजबूती है। निफ्टी के मेटल इंडेक्स में लगभग ढाई पर्सेंट का उछाल है। निफ्टी के मीडिया इंडेक्स में लगभग एक पर्सेंट की गिरावट है। रियल्टी, सरकारी बैंक, एफएमसीजी और फाइनेंशियल सेक्टर के इंडेक्स में भी कमजोरी है।

निफ्टी को RIL, इन्फोसिस, TCS, टाटा स्टील और JSW स्टील में खरीदारी से सपोर्ट मिल रहा है। ICICI बैंक, L&T, एक्सिस बैंक, ITC और SBI में बिकवाली के चलते दबाव बन रहा है। सेंसेक्स को सपोर्ट देने वाले शेयर डॉ रेड्डीज, पावर ग्रिड, इन्फोसिस, HCL टेक और TCS हैं। इस पर दबाव L&T, इंडसइंड बैंक, भारती एयरटेल, ICICI बैंक और अल्ट्राटेक सीमेंट की वजह से बन रहा है।

शुक्रवार को हफ्ते के अंतिम कारोबारी दिन शेयर बाजारों ने मजबूत शुरुआत दी। सेंसेक्स 177 पॉइंट ऊपर 52,477 पॉइंट पर खुला। निफ्टी ने 60 अंक की बढ़त के साथ पर 15,796 पॉइंट पर शुरुआत की। दो दिन से गिरावट का दबाव झेल रहे शेयर बाजार में गुरुवार को तेज उछाल आया। सेंसेक्स 0.68% के उछाल के साथ 52,300 पॉइंट पर बंद हुआ था। निफ्टी 0.65% चढ़कर 15,738 अंक पर रहा था।

52 वीक हाई
एनएसई निफ्टी 500 के जिन शेयरों ने आज 52 वीक हाई लेवल छुआ है, उनमें ईक्लर्क्स, कोल इंडिया, पिरामल एंटरप्राइजेज, एम्फैसिस, ICICI सिक्योरिटीज, वर्धमान टेक्सटाइल, लक्स इंडस्ट्रीज, HUDCO, पावर ग्रिड और OIL इंडिया शामिल हैं।

वित्तीय परिणाम
आज इन कंपनियों के मार्च तिमाही के नतीजे आने वाले हैं: DLF, BHEL, सन टीवी, CG पावर, इडलवाइज फाइनेंशियल सर्विसेज, NSE, BEML, DFM फूड्स, कोचिन शिपयार्ड, हेरनबा इंडस्ट्रीज, इंडिया पावर कॉरपोरेशन, ल्यूमैक्स इंडस्ट्रीज।

कंपनीमार्च 2021मार्च 2020दिसंबर 2020डिविडेंड
हेरनबा इंडस्ट्रीज43.20 करोड़26.30 करोड़44.70 करोड़0.70 रुपए
डेक्कन सीमेंट22.10 करोड़-2.90 करोड़33.10 करोड़5.00 रुपए
गोवा कार्बन6.60 करोड़-4.80 करोड़-1.30 करोड़
पटेल इंजीनियरिंग-141 करोड़-79.80 करोड़36.50 करोड़
भारत गीयर्स2.80 करोड़-2.20 करोड़4.70 करोड़
अक्षर केमिकल5.60 करोड़5.90 करोड़3.30 करोड़3+3.50 रुपए
ल्यूमैक्स इंडस्ट्रीज22.70 करोड़16.40 करोड़19.80 करोड़7 रुपए

गुरुवार को अमेरिकी बाजार मजबूती के साथ बंद हुए थे। नैस्डेक में 0.78% का उछाल आया था। S&P500 इंडेक्स 0.47% की तेजी के साथ बंद हुआ था। डाउ जोंस में 0.06% की मामूली बढ़त रही थी।

FII और DII डेटा

NSE पर मौजूद प्रोविजनल डेटा के मुताबिक, 10 जून को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने शुद्ध रूप से 1,329.7 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे थे। यानी उन्होंने जितने रुपए के शेयर बेचे, उससे इतने ज्यादा के शेयर खरीदे थे। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने शुद्ध रूप से 575.19 करोड़ रुपए के शेयर बेचे।

शेयर बाजार LIVE…

03:10 PM सुप्रीम कोर्ट ने लोन रिपेमेंट का मोरेटोरियम पीरियड 6 महीने बढ़ाने की जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि यह नीतिगत फैसला है और सरकार ही इस पर फैसला लेने में सक्षम है।

S&P500 इंडेक्स रिकॉर्ड

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अमेरिका में रिकॉर्डतोड़ महंगाई, 40 सालों का रिकॉर्ड टूटा, यूएस स्टॉक मार्केट धड़ाम हुआ

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बिज़नेस न्यूज़ डेस्क - अमेरिका में महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है. मई में महंगाई चार दशक के उच्चतम स्तर 8.6 प्रतिशत पर पहुंच गई। इसकी वजह गैस, केटरिंग और अन्य जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतें हैं। अमेरिकी श्रम विभाग ने शुक्रवार को मई 2022 के आंकड़े जारी किए, जिसमें कहा गया कि उपभोक्ता कीमतों में एक साल पहले की तुलना में पिछले महीने 8.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। एक महीने पहले, उपभोक्ता कीमतों में एक साल पहले की तुलना में अप्रैल में 8.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। यह वृद्धि मार्च की तुलना में अप्रैल में 0.3 प्रतिशत की वृद्धि से काफी अधिक है। अमेरिका पिछले कुछ महीनों से ऊंची महंगाई से जूझ रहा है। भोजन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने अमेरिकी परिवार के लिए जीवन को बहुत कठिन बना दिया है। अश्वेत समुदाय और निम्न आय वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हैं।

मार्च 2022 में उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति 1982 के बाद पहली बार 8.5 प्रतिशत पर पहुंच गई। मुद्रास्फीति में वृद्धि ने यूएस सेंट्रल बैंक और फेडरल रिजर्व को भी ब्याज दरें बढ़ाने के लिए मजबूर किया है। हालांकि, कुछ विश्लेषकों ने संभावना जताई है कि अगले कुछ महीनों में अमेरिका में मुद्रास्फीति नियंत्रण में आ जाएगी। लेकिन इसके बावजूद साल के अंत में महंगाई के 7 फीसदी से नीचे आने की संभावना नहीं है। अमेरिकी शेयरों ने जनवरी के बाद से अपनी सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट दर्ज की। बढ़ती मुद्रास्फीति ने इस धारणा को मजबूत किया है कि फेड अधिक आक्रामक तरीके से दरें बढ़ाएगा। टेक और ग्रोथ शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट आई। Microsoft Corp., Amazon.S&P500 इंडेक्स रिकॉर्ड S&P500 इंडेक्स रिकॉर्ड com Inc. और Apple Inc. ने S&P 500 में गिरावट का नेतृत्व किया। मुद्रास्फीति रिपोर्ट के बाद दो साल की ट्रेजरी यील्ड 2008 के बाद सबसे ज्यादा है। शुक्रवार को डाउ जोंस 880 अंक गिरकर 31,392.79 या 2.73 फीसदी पर बंद हुआ था। वहीं नैस्डैक 414.20 अंक यानी 3.52 फीसदी की गिरावट के साथ 11,340.02 पर बंद हुआ।

US, UK और चीन हो रहे बरबाद, इंडियन शेयर बाजार में जश्न का माहौल, आखिर क्यों?

दुनियाभर में इन दिनों मंदी की आशंका है. ब्रिटेन मंदी का ऐलान कर चुका है, तो चीन में कोविड ने हाहाकार मचाया हुआ है. वहीं अमेरिका में महंगाई ने कमर तोड़ रखी है. इसके बावजूद भारतीय शेयर बाजारों में रौनक बनी हुई है. आखिर ऐसा क्यों है?

US, UK और चीन हो रहे बरबाद, इंडियन शेयर बाजार में जश्न का माहौल, आखिर क्यों?

भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को भले उथल-पुथल जारी हो, पर बीते दो हफ्तों में सेंसेक्स (BSE Sensex) और निफ्टी (NSE Nifty) दोनों ने तेजी का नया रिकॉर्ड बनाया है. एक तरफ जहां दुनियाभर के बाजार मंदी की आशंका से घिरे हैं. फेसबुक, अमेजन और ट्विटर जैसी बड़ी टेक कंपनियों के शेयर में गिरावट देखने को S&P500 इंडेक्स रिकॉर्ड मिल रही है. वहीं इंडियन स्टॉक मार्केट बुलंदियों पर है. आखिर क्या वजह है इसकी…

सोमवार को शेयर बाजार का हाल

सोमवार को बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी दोनों बड़ी गिरावट के साथ खुले. पर दोपहर बाद इसमें थोड़ा सुधार दिखने लगा. दोपहर डेढ़ बजे सेंसेक्स महज 106.54 अंक की गिरावट के साथ 62,761.96 अंक पर और निफ्टी 19.25 अंक की नरमी के साथ 18,676.85 अंक पर कारोबार कर रहा है. जबकि शुक्रवार को ये क्रमश: 62,868.50 अंक और 18,696.10 अंक पर बंद हुए थे.

2022 में चमका इंडियन स्टॉक मार्केट

अगर हम 2022 की शुरुआत से अब तक देखें तो भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखी गई है. बीएसई सेंसेक्स जनवरी से अब तक 6.17 प्रतिशत की तेजी देख चुका है. इस बीच इसमें 3,653.26 अंक की बढ़त दर्ज की गई है. जबकि एनएसई निफ्टी 1,064.40 अंक की तेजी के साथ 6.04 प्रतिशत चढ़ चुका है.

US, UK और China सबका बुरा हाल

भारतीय शेयर बाजार जहां कुलाछें मार रहे हैं, वहीं दुनिया के प्रमुख बाजारों की हालत खराब है. इस साल की शुरुआत में रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia Ukraine War) ने यूरोपीय बाजारों को तोड़ दिया, जबकि वहां महंगाई अपने चरम पर है. ब्रिटेन की नई ऋषि सुनक सरकार जहां मंदी का ऐलान कर चुकी है.

कुछ ऐसा ही हाल अमेरिका का है, जो 40 साल की सबसे ऊंची महंगाई दर से जूझ रहा है. वहीं दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन में कोरोना ने हाहाकार मचाया हुआ है. यहां की ‘जीरो-कोविड’ पॉलिसी की वजह से इंडस्ट्री को भारी नुकसान पहुंचा है. इसका एक बड़ा फायदा भारत की मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री को मिला है.

दुनियाभर के शेयर बाजारों का हाल

अगर हम अमेरिका के डाउ जोन्स (Dow Jones) का हाल देखें तो 2022 में इसमें 5.89 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है. जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स (Shanghai Index) इस अवधि में 11.58 प्रतिशत टूटा है. जापान का निक्केई इंडेक्स (Nikkei) 2022 में अब तक 5.06 प्रतिशत गिर चुका है. वहीं नैस्डेक कंपोजिट (Nasdaq)S&P500 इंडेक्स रिकॉर्ड में 27.61 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है.

इसके अलावा एसएंडपी 500 (S&P 500) में 2022 की जनवरी से अब तक 15.11 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है, तो हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स (Hang Seng Index) 16.14 प्रतिशत टूट चुका है.

भारतीय शेयर बाजार में रौनक की वजह?

बीते मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार ने ऊंचाइयों का रिकॉर्ड बनाया था. बीएसई सेंसेक्स ने 63,000 अंक के उच्च स्तर को पार कर लिया था. आखिर इसकी वजह क्या है ? इस बारे में एक्सपर्ट क्या कहत हैं ?

एक्सपर्ट के मुताबिक दुनियाभर के शेयर बाजारों की खस्ता हालत के चलते विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का भारतीय शेयर बाजार में निवेश बढ़ा है. इसकी वजह कोविड और महंगाई के बावजूद भारत की ग्रोथ रेट का सकारात्मक बने रहना है.

इसके अलावा भारत की युवा आबादी थोड़ा अधिक जोखिम ले रही है और इस वजह से शेयर बाजार में घरेलू इक्विटी फंड का योगदान बढ़ा है. ग्रोथ के चलते लोगों की डिस्पोजल इनकम बढ़ी है इसका कुछ हिस्सा शेयर बाजार में आया है. बीते हफ्ते आए दो IPO के सब्सक्रिप्शन को देखकर भी ये पता चलता है.

वहीं अंततराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भारत के लिए आर्थिक संकेत मजबूत हुए हैं. कच्चा तेल के कम होने से भारत में महंगाई कम होने की उम्मीद बढ़ी है, इससे अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत मजबूत हुए हैं.

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