शेयर बाजार में क्या फर्जी निवेशक

शेयर बाजार में बढ़ता खुदरा निवेशक- कितना सही और कितना फर्जी?

जिस तेजी से खुदरा निवेशक शेयर बाजार में बढ़ रहे हैं,

विरोधाभास बढ़ता ही जा रहा है क्योंकि अर्थव्यवस्था के कारक कुछ और ही दर्शाते हैं.

आपको हैरानी होगी कि खुदरा निवेशक 25% की दर से बढ़ रहे हैं और हर एक आईपीओ में 2021 में 15 से 20 लाख निवेशको ने निवेश किया है. हर महीने 25 लाख लोग डीमैट खाते खोल रहे हैं.

आज देश में लगभग 6 करोड़ डीमैट खाते खुल चुके हैं, जबकि आयकर देने वाले मात्र 1.50 करोड़ लोग है.

मात्र 50 लाख लोग ही अपनी आय 10 लाख रुपये से ऊपर बताते हैं और लगभग 1 करोड़ लोग अपनी आय 5 लाख से 10 लाख रुपये के बीच बताते हैं एवं बाकी सब बिना टैक्स की आय दिखाते हैं.

पिछले 6 माह में जनवरी 20 से खुदरा निवेशक लगभग 1 लाख करोड़ रुपये विभिन्न आईपीओ में लगा चुके हैं और यह हैरान करता है कि ये 6 करोड़ डीमैट धारक कौन है, इनकी कितनी कमाई है जो ये शेयर बाजार में निवेश कर रहे हैं और टैक्स भी नहीं भर रहें?

इतनी भारी मात्रा में खुदरा निवेशकों का शेयर बाजार में आना संदेह तो पैदा करता है, हालांकि देश के प्रतिभूति बाजार में रूचि बढ़ने के कुछ प्रमुख कारण भी है:

1. मौजूदा कम ब्याज दर और बैंकों पर घटता विश्वास-

बैंकों में घटता ब्याज मंहगाई के आधार पर अपर्याप्त हैं और ब्याज की आय पर निर्भरता अब रोजमर्रा के खर्च के साथ मेल नहीं कर रही.

तो दूसरी ओर बैंकों में बढ़ता एनपीए और बट्टे खाते में जाता पैसा बैंक डूबने के संकेत देता है और बैंकिंग प्रणाली पर लोगों के विश्वास को कम करता है.

2. पर्याप्त नकदी उपलब्धता-

खर्च कम होने से लोगों की जमा पूंजी के रूप में तरलता है और निवेश के लिए नकदी की उपलब्धता होने से शेयर बाजार में निवेश आकर्षक बन जाता है।

3. अप्रैल-जून के दौरान हर महीने 24.5 लाख डिमैट खाते खाले गए:

नए डीमैट खातों का खुलना परिचायक है कि निवेश के रूप अब बदल रहें हैं. लोग अब बैंको में डिपाजिट के बजाय दीर्घ अवधि के लिए अन्य निवेश के साधनों को टटोल रहे हैं जो उन्हें उतनी आय दें कि मंहगाई से मुकाबला किया जा सकें. और इसलिए इस समय शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, निजी कंपनी के बांड या फिक्स्ड डिपाजिट, आदि में मजबूरन खुदरा निवेशकों को आना पड़ रहा है.

4. विदेशी धन का भारी मात्रा में शेयर बाजार में आना:

एक तरफ तो विदेशी एजेंसियां भारत की ग्रोथ रेट पर शंका पैदा कर रही है और रेंटिंग कम कर रही है तो दूसरी ओर शेयर बाजार में बढ़ते विदेशी निवेश ने इस कोरोना काल में भी बाजार को उच्चतम स्तर पर बनाए रखा.

गिरती जीडीपी, बढ़ती मंहगाई और बेरोजगारी, घटती लोगों की आय और जमापूंजी- पर बढ़ता शेयर बाजार!

यह विरोधाभास नहीं है तो और क्या है जो दो प्रश्नों को जन्म देता है-

1. आखिर ये विदेशी निवेशक कौन है? आपको पिछले दिनों ध्यान होगा कि एनएसडीएल ने अडानी ग्रुप में विदेशी निवेशकों की केवाइसी को लेकर प्रश्न उठाये थे और तबसे अडानी ग्रुप के शेयर फर्श पर आ गए है.

2. दूसरा ये खुदरा निवेशक कौन है? एक तरफ लोगों को आय के लाले पड़े हैं तो फिर कौन है जो डीमैट खाते खुलवाए जा रहे हैं और शेयर में कई लाख करोड़ रुपये के निवेश किए जा रहे हैं.

साफ है इस संदेह से इंकार नहीं किया जा सकता कि बड़े पैमाने पर काले धन को सफेद करने का खेल हो सकता है.

आखिर विदेशी और खुदरा निवेशकों के नाम पर पैसे लगाने वाले ये लोग कौन है?

जिस तरह नोटबंदी के समय कई बड़ी मछलियों ने कर दायरे में शेयर बाज़ार क्या है? नहीं आ रहे लोगों के नाम पर पड़े बैंक खातों का उपयोग करके काफी काला धन सफेद कर लिया, उसी तरह खुदरा निवेशकों के नाम का उपयोग कर करोड़ों रुपये का काला धन शेयर बाजार में गलाया जा रहा है.

शेयर शेयर बाज़ार क्या है? बाजार पूंजी जुटाने का एक महत्वपूर्ण साधन है और इसका पारदर्शी एवं नियमों के अनुरूप होना देशहित और जनहित में जरुरी है.

आज जब यह बाजार आय का अच्छा स्त्रोत हो सकता है, ऐसे में बड़ी मछलियों तालाब को गंदा न कर दें और आम निवेशक न लुट पाए, इसके लिए जरूरी है कि सरकार और नियामक संस्थाएँ जांच करें और निगरानी रखें कि संदेह सही साबित न हो पाए- नहीं तो शेयर बाजार से लोगों का विश्वास उठ जाएगा!

इसलिए जरुरी है कि सरकार शेयर बाजार में ट्रेडिंग और निवेश सिर्फ उन्हीं को करने दें जिनकी आयकर विवरणी में सारी छूट लेने के बाद कुल आय 5 लाख रुपये से अधिक हो.

मतलब साफ है जो टैक्स भरता है, वही शेयर निवेशक होना चाहिए- तभी हम सही निवेशक को बाजार में ला पाऐंगे और सही कंपनियां ही बाजार से पैसे उगाही कर पाऐगी. शेयर बाजार न केवल विश्वसनीय बनेगा बल्कि सरकार के राजस्व में बढ़ौतरी होगी सो अलग.

स्टॉक मार्केट क्या है | Stock Market Kya Hai ?

अगर इसे शाब्दिक अर्थ में कहा जाये तो शेयर बाजार ( Stock Market ) किसी सूचीबद्ध कंपनी में हिस्सेदारी खरीदने-और बेचने की जगह हैं। भारत में 2 प्रमुख शेयर बाजार है। पहला नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और दूसरा बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) |

NSE और BSE में ही सूचीबद्ध कंपनी के शेयर किसी ब्रोकर के माध्यम से खरीदे और बेचे जाते हैं। बाजार ( Stock Market) में बॉन्ड, म्यूच्यूअल फण्ड और डेरिवेटिव का भी व्यापार होता हैं।

शेयर खरीदने का क्या मतलब हैं | Share Buy Meaning ?

शेयर खरीदने का मतलब हैं किसी कंपनी में हिस्सा लेना। मान लीजिये कोई कंपनी जो NSE या BSE में सूचीबद्ध हैं। और उसने 100 शेयर जारी किया, और आप उसमे से 10 खरीद लिए यानि शेयर बाज़ार क्या है? की आप उस कंपनी में 10% के साथ हिस्सेदार हैं। अगर अब कंपनी को लाभ होगा तो लाभ का 10% आपको होगा, अगर हानि होता हैं 10% का हानि आपका भी होगा। अब आपके मन में सवाल होगा की ये लाभ और हानि कैसे होगा तो इसका सीधा मतलब हैं की आपके खरीदे गये शेयर के दामों में बदलाव होगा।

शेयर बाजार में निवेश कैसे करें | How To Invest In Stock Market?

शेयर बाजार में निवेश करने या शेयर खरीद-बिक्री के लिए डीमैट शेयर बाज़ार क्या है? अकाउंट (Demat Account) होना जरुरी हैं, बिना Demat Account के शेयर बाजार में खरीद-बेच नहीं कर सकते हैं। डीमैट अकाउंट खोलने के बाद आप (NSE) और (BSE) में सूचीबद्ध किसी भी कंपनी का शेयर खरीद और बेच सकते हैं। डीमैट अकाउंट( Demat Account) से सम्बंधित जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें।

146 साल का हुआ बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज: कैसा रहा BSE का 1875 से लेकर अब तक का सफर?, जानिए सबकुछ

आज बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) 146 साल का शेयर बाज़ार क्या है? गया है। 9 जुलाई 1875 में BSE की स्थापना हुई थी। यह एशिया का पहला और सबसे तेज स्टॉक एक्सचेंज है। करीब 41 साल पहले 100 के आधार अंक से शुरू हुआ बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स आज 53,000 के पार पहुंच गया है। यानी सेंसेक्स में लगभग 530 गुना की बढ़ोतरी हुई है।

शेयर मार्केट की शुरुआत एक बरगद के पेड़ के नीचे 318 लोगों ने 1 रुपये के एंट्री फीस के साथ की थी। 25 जनवरी, 2001 को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने डॉलेक्स-30 लॉन्च किया था। इसे BSE का डॉलर लिंक्ड वर्जन कहा जाता है।

सेंसेक्स की शुरुआत कहानी
1986 में जब सेंसेक्स की शुरुआत हुई तो इसका बेस इयर 1978-79 को रखा गया और बेस 100 पॉइंट बनाया गया। जुलाई 1990 में ये आंकड़ा 1,000 पॉइंट पर पहुंच गया। 1991 के आर्थिक उदारीकरण के बाद सरकार ने FDI के दरवाजे खोले और बिजनेस करने के कानून में बदलाव किया। मार्केट वैल्यू का डिरेगुलेशन किया गया और अर्थव्यवस्था को सर्विस ओरिएंटेड कर दिया। इसने सेंसेक्स में गति बढ़ाई।

जब सेंसेक्स पहली बार बना, तब क्या बदलाव हुए
सबसे पहले सर्विस इंडस्ट्री, यानी बैंकिंग, टेलीकॉम और आईटी सेक्टर्स की कंपनियों को शामिल किया गया। इसके बाद 90 के दशक के अंत और 2,000 की शुरुआत में आईटी कंपनियों में तेजी से हो रहे डेवलपमेंट को देखते हुए पुरानी कंपनियों की जगह टीसीएस और इंफोसिस को शामिल किया गया। उदारीकरण के बाद से ही भारत की बड़ी कंपनियां घरेलू बिक्री पर ज्यादा निर्भर नहीं हैं। ये सभी कंपनियां एक्सपोर्ट के जरिए बिजनेस बढ़ाती रही हैं। वहीं आईटी सेक्टर में आउटसोर्सिंग की वजह से इन्फोसिस जैसी कंपनियों को फायदा हुआ है। टाटा जैसी ऑटोमोबाइल सेक्टर की कंपनी ने यूके जैसे विकसित बाजारों में कदम रखा है

हर्षद मेहता कांड:मार्च 1992 में सेंसेक्स पहली बार 4 हजार के स्तर पर बंद हुआ, लेकिन इसके बाद सेंसेक्स 2,900 से 4,900 के बीच झूलता रहा और इसे 5 हजार तक पहुंचने में सात साल से ज्यादा लग गया। इसका मुख्य कारण था कि इसी साल हर्षद मेहता के घोटाले का खुलासा होने से शेयर बाजार में भारी बिकवाली हुई थी।

2006 में 10 हजार पार
सेंसेक्स को 5 हजार से 10 हजार तक पहुंचने में 6 साल से ज्यादा समय लग गया। 7 फरवरी 2006 को सेंसेक्स 10,082.28 पर बंद हुआ, लेकिन अगले डेढ़ साल में ही सेंसेक्स 10 से 15 हजार के स्तर पर पहुंच गया।

सेंसेक्स के लिए 2007 सबसे बेहतरीन
9 जुलाई 2007 को सेंसेक्स 15,045.73 पर बंद हुआ। 2007 सेंसेक्स के लिए अब तक सबसे बेहतरीन साल रहा। अगले छह महीने में ही सेंसेक्स 20 हजार के स्तर पर पहुंच गया और दिसंबर 2007 में सेंसेक्स ने 20,000 का स्तर भी पार कर लिया था।

2008 की मंदी ने बाजार का खेल बिगाड़ा
8 जनवरी 2008 को सेंसेक्स ने कारोबार के दौरान पहली बार 21 हजार का स्तर पार किया था, लेकिन इसी साल आई अंतरराष्ट्रीय मंदी ने पूरा खेल बिगाड़ दिया था। मंदी की वजह से पूरी दुनिया के शेयर बाजारों के साथ ही भारतीय शेयर बाजार भी धड़ाम हो गए और 10 जनवरी 2008 को सेंसेक्स 14,889.25 के स्तर पर बंद हुआ. इसी साल 16 जुलाई को सेंसेक्स 12,575.8 पर बंद हुआ। इतना ही नहीं नवंबर 2008 में सेंसेक्स 8,451.01 के स्तर तक पहुंच गया था। इसके बाद सेंसेक्स को फिर वापस 21 हजार के स्तर तक जाने में करीब 3 साल लगे थे।

2014 में बाजार ने नरेंद्र मोदी का शानदार स्वागत किया
साल 2013 में BSE सेंसेक्स ने पलटी मारी और 18 जनवरी 2013 को सेंसेक्स फिर 20,039.04 पर बंद हुआ। 2014 में केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी। शेयर बाजार ने भी मोदी सरकार का जमकर स्वागत किया। 16 मई 2014 को ही सेंसेक्स 25,364 के स्तर तक पहुंच गया था। इसके बाद सेंसेक्स को 25 हजार से 30 हजार तक पहुंचने में तीन साल का समय लगा था।

साल 2017 में 30 हजार का स्तर
साल 2017 के अप्रैल महीने में सेंसेक्स 30,133 तक पहुंचा और अगले एक साल में ही सेंसेक्स 35 हजार के लेवल पर पहुंच गया। 17 जनवरी 2018 को सेंसेक्स 35,081 पर बंद हुआ। 30 अक्टूबर 2019 को सेंसेक्स ने 40,051 के स्तर को छू लिया था।

कोरोना संकट में बड़ा झटका लगा
सेंसेक्स जनवरी 2020 में 42 हजार के करीब पहुंच गया था, लेकिन इसके बाद साल 2020 का कोरोना ने तबाही मचाना शुरू कर दिया था। और यही कारण था कि सेंसेक्स मार्च 2020 में लॉकडाउन के बाद 25,981 तक पहुंच गया था, हालांकि अप्रैल के अंत और मई से सेंसेक्स में फिर से शानदार रिकवरी आने लगी।

15 महीने में 40 से 50 हजार का सफर
30 अक्टूबर 2019 को सेंसेक्स पहली बार 40,000 के पार बंद हुआ। विदेशी और घरेलू निवेशकों के दम पर सेंसेक्स ने करीब एक साल में ही 40 से 45 हजार तक का सफर तय कर लिया। 4 दिसंबर, 2020 को सेंसेक्स 45,079 पर बंद हुआ। इसके करीब डेढ़ महीने बाद ही सेंसेक्स ने 21 जनवरी 2021 को नया रिकॉर्ड बनाते हुए 50 हजार का आंकड़ा पार कर लिया।

किसने की थी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की शुरुआत?
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की शुरुआत 4 गुजराती और एक पारसी शेयर ब्रोकर्स ने की थी। 1850 के आसपास अपने कारोबार के सिलसिले में मुंबई के टाउन हॉल के सामने बरगद के एक पेड़ के नीचे बैठक किया करते थे। इन ब्रोकर्स की संख्या साल-दर-साल लगातार बढ़ती गई। 1875 में इन्होंने अपना 'द नेटिव शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स एसोसिएशन’ बना लिया, साथ ही, शेयर बाज़ार क्या है? दलाल स्ट्रीट पर एक ऑफिस भी खरीद लिया। आज इसे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज कहा जाता है।

दैनिक भास्कर से खास बातचीत में BSE के MD & CEO आशीष चौहान ने कहा कि BSE अपनी स्थापना के बाद पिछले 146 सालों से भारत में शेयर बाज़ार क्या है? इन्वेस्टमेंट और वेल्थ क्रिएशन के लिए काम कर रहा है। BSE की सफलता की कोशिश, 7.2 करोड़ से ज्यादा निवेशक खाते, 4,700 से ज्यादा रजिस्टर्ड कंपनियों और 231 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के इक्विटी मार्केट कैपिटलाइजेशन से देखी जा सकती है। BSE आने वाले समय में भारत को डबल डिजिट एनुअल ग्रोथ हासिल करने में मदद करेगा।

What is Share Market in Hindi - शेयर बाजार क्या है?

अगर शाब्दिक अर्थ में कहें तो शेयर बाजार (Stock Market) किसी सूचीबद्ध कंपनी में हिस्सेदारी खरीदने-बेचने की जगह है. भारत में बोम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) नाम के दो प्रमुख शेयर बाजार हैं. हालांकि शेयर बाजार में बांड, म्युचुअल फंड और डेरिवेटिव का भी व्यापार होता है

What is Share Market in Hindi - शेयर बाजार क्या है?

What is Share Market in Hindi - दुनिया में पैसे कमाने का जरिया बहुत है, कुछ लोग job करके पैसे कमाते हैं तो कुछ लोग व्यापार यानि business करके पैसे कमाते हैं और कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अपने पैसे दाव पर लगा कर ढेर सारे पैसे कमाते हैं. पर ये लोग अपने पैसे कौन सी जगह पर दाव पर लगाते हैं, ऐसी कौन सी जगह है की जहाँ अपने पैसे दाव पर लगाने के बाद भी लोगों को मुनाफा होता है? वो जगह है शेयर बाज़ार क्या है? share शेयर बाज़ार क्या है? market यानि शेयर बाज़ार. Share Bazar के बारे में सभी ने सुना होगा मगर वहां क्या होता है इसका ज्ञान सभी को नहीं है.

1.Share Market और Stock Market एक ऐसा market है जहाँ बहुत से companies के shares ख़रीदे और बेचे जाते हैं. ये एक ऐसी जगह है जहाँ कुछ लोग या तो बहुत पैसे कमा लेते हैं या तो अपने सारे पैसे गवा देते हैं. किसी कंपनी का share खरीदने का मतलब है उस कंपनी में हिस्सेदार बन जाना. आप जितने पैसे लगायेंगे उसी के हिसाब से कुछ प्रतिशत के मालिक आप उस कंपनी के हो जाते हैं. जिसका मतलब ये है की अगर उस कंपनी को भविष्य में मुनाफा होगा तो आपके लगाये हुए पैसे से दुगना पैसा आपको मिलेगा और अगर घाटा हुआ तो आपको एक भी पैसे नहीं मिलेंगे यानि की आपको पूरी तरह से नुकसान होगा. जिस तरह Share market in Hindi में पैसे बनाना आसान है ठीक उसी तरह यहाँ पैसे गवाना भी उतना ही आसान है क्यूंकि stock market में उतार चढ़ाव होते रहते हैं.

2.Share Market में share कब खरीदें? - Stock Market में share खरीदने से पहले आप इस लाइन में पहले experience gain कर लें की यहाँ कैसे और कब invest करना चाहिये. और कैसी कंपनी में आप अपने पैसे लगायेंगे तब जा कर आपको मुनाफा होगा. इन सब चीजों का पता लगायें ज्ञान बटोरे उसके बाद ही जा कर share market में निवेश करें. Share market में कौन सी कंपनी का share बढ़ा या गिरा इसका पता लगाने के लिए आप economic times जैसे newspaper पढ़ सकते हैं या फिर NDTV Business न्यूज़ चैनल भी देख सकते हैं जहाँ से आपको Share Market की पूरी जानकारी मिल जाएगी.

ये जगह बहुत ही risk शेयर बाज़ार क्या है? से भरी हुयी होती है इसलिए यहाँ तभी निवेश करना चाहिये जब आपकी आर्थिक स्तिथि ठीक हो ताकी जब आपको घाटा हो तो आपको उस घाटे से ज्यादा फर्क ना पड़े. या तो फिर आप ऐसा भी कर सकते हैं की शुरुआत में आप Share Market में थोड़े से पैसे से निवेश करें ताकि आगे जाकर आपको ज्यादा झटका ना लगे. जैसे जैसे आपका इस field में knowledge और experience बढेगा वैसे वैसे आप धीरे धीरे अपने निवेश को बढ़ा सकते हैं.

Share market में निवेश करने से पहले आप इस market के बारे में अधिक जानकारी जरुर लें वरना इस market में धोके भी बहुत मिलते हैं. कई बार ऐसा होता है कुछ कंपनी fraud होती हैं और अगर आप उस कंपनी के shares को खरीद कर अपने पैसे लगाते हैं तो ऐसी कंपनी सबके पैसे ले कर भाग जाती हैं. और फिर आपके लगाये हुए सारे पैसे डूब जाते हैं. इसलिए किसी भी कंपनी के shares को खरीदने से पहले उसके background के details को अच्छे से जरुर check कर लें

3.Share कैसे खरीदें? -Share market में share खरीदने के लिए आपको एक Demat account बनाना होता हैं. इसके भी दो तरीके हैं, पहला तो आप एक broker यानि की दलाल के पास जाकर एक Demat account खोल सकते हैं. Demat account में हमारे share के पैसे रखे जाते हैं जिस तरह की हम किसी bank के खाते में अपना पैसा रखते हैं ठीक उसी तरह. अगर आप share market में निवेश कर रहे हैं तो आपका demat account होना बहुत ही जरुरी है. क्यूंकि कंपनी को मुनाफा होने के बाद आपको जितने पैसे मिलेंगे वो सारे पैसे आपके demat account में जायेंगे ना की आपके bank account में और demat account आपके savings account के साथ लिंक हो कर रहता है अगर आप चाहे तो उस demat account से अपने bank account में बाद में अमाउंट transfer कर सकते हैं. Demat account बनाने के लिए आपका किसी भी bank में एक savings account होना बहुत जरुरी है और proof के लिए pan card की copy और address proof चाहिये होती है.

दूसरा तरीका है की आप किसी भी bank में जाकर अपना demat account खुलवा सकते हैं. लेकिन आप अगर एक broker के पास से अपना account खुलवायेंगे तो आपको उससे ज्यादा फायदा होगा. क्यूंकि एक तो आपको अच्छा support मिलेगा और दूसरा आपके निवेश के हिसाब से ही वो आपको अच्छी कंपनी suggest करते हैं जहाँ आप अपने पैसे लगा सकते हैं. ऐसा करने के लिए वो पैसे लेते हैं.

4.India में दो main stock exchange हैं वो है Bombay stock exchange (BSE) और National stock exchange (NSE), यही share ख़रीदे और बेचे जाते हैं. ये जो brokers होते हैं वो stock exchange के सदस्य होते हैं हम सिर्फ उनके जरिये ही stock exchange में ट्रेडिंग कर सकते हैं. हम सीधे stock market में जा कर कोई भी share खरीद या बेच नहीं सकते. अगर आप भी share market से ढेर सारे पैसे कमाना चाहते हैं तो इसके बारे में पूरी जानकारी हासील करने की कोशिश जरुर करें. बिना जानकारी लिए इसमें निवेश करने से आपको बहुत बड़ी कीमत भी चुकानी पड़ सकती है. इसलिए जल्दबाजी में कोई भी फैसला न लें और समझदारी से काम करें.

146 साल का हुआ बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज: कैसा रहा BSE का 1875 से लेकर अब तक का सफर?, जानिए सबकुछ

आज बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) 146 साल का गया है। 9 जुलाई 1875 में BSE की स्थापना हुई थी। यह एशिया का पहला और सबसे तेज स्टॉक एक्सचेंज है। करीब 41 साल पहले 100 के आधार अंक से शुरू हुआ बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स आज 53,000 के पार पहुंच गया है। यानी सेंसेक्स में लगभग 530 गुना की बढ़ोतरी हुई है।

शेयर मार्केट की शुरुआत एक बरगद के पेड़ के नीचे 318 लोगों ने 1 रुपये के एंट्री फीस के साथ की थी। 25 जनवरी, 2001 को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने डॉलेक्स-30 लॉन्च किया था। इसे BSE का डॉलर लिंक्ड वर्जन कहा जाता है।

सेंसेक्स की शुरुआत कहानी
1986 में जब सेंसेक्स की शुरुआत हुई तो इसका बेस इयर 1978-79 को रखा गया और बेस 100 पॉइंट बनाया गया। जुलाई 1990 में ये आंकड़ा 1,000 पॉइंट पर पहुंच गया। 1991 के आर्थिक उदारीकरण के बाद सरकार ने FDI के दरवाजे खोले और बिजनेस करने के कानून में बदलाव किया। मार्केट वैल्यू का डिरेगुलेशन किया गया और अर्थव्यवस्था को सर्विस ओरिएंटेड कर दिया। इसने सेंसेक्स में गति बढ़ाई।

जब सेंसेक्स पहली बार बना, तब क्या बदलाव हुए
सबसे पहले सर्विस इंडस्ट्री, यानी बैंकिंग, टेलीकॉम और आईटी सेक्टर्स की कंपनियों को शामिल किया गया। इसके बाद 90 के दशक के अंत और 2,000 की शुरुआत में आईटी कंपनियों में तेजी से हो रहे डेवलपमेंट को देखते हुए पुरानी कंपनियों की जगह टीसीएस और इंफोसिस शेयर बाज़ार क्या है? को शामिल किया गया। उदारीकरण के बाद से ही भारत की बड़ी कंपनियां घरेलू बिक्री पर ज्यादा निर्भर नहीं हैं। ये सभी कंपनियां एक्सपोर्ट के जरिए बिजनेस बढ़ाती रही हैं। वहीं आईटी सेक्टर में आउटसोर्सिंग की वजह से इन्फोसिस जैसी कंपनियों को फायदा हुआ है। टाटा जैसी ऑटोमोबाइल सेक्टर की कंपनी ने यूके जैसे विकसित बाजारों में कदम रखा है

हर्षद मेहता कांड:मार्च 1992 में सेंसेक्स पहली बार 4 हजार के स्तर पर बंद हुआ, लेकिन इसके बाद सेंसेक्स 2,900 से 4,900 के बीच झूलता रहा और इसे 5 हजार तक पहुंचने में सात साल से ज्यादा लग गया। इसका मुख्य कारण था कि इसी साल हर्षद मेहता के घोटाले का खुलासा होने से शेयर बाजार में भारी बिकवाली हुई थी।

2006 में 10 हजार पार
सेंसेक्स को 5 हजार से 10 हजार तक पहुंचने में 6 साल से ज्यादा समय लग गया। 7 फरवरी 2006 को सेंसेक्स 10,082.28 पर बंद हुआ, लेकिन अगले डेढ़ साल में ही सेंसेक्स 10 से 15 हजार के स्तर पर पहुंच गया।

सेंसेक्स के लिए 2007 सबसे बेहतरीन
9 जुलाई 2007 को सेंसेक्स 15,045.73 पर बंद हुआ। 2007 सेंसेक्स के लिए अब तक सबसे बेहतरीन साल रहा। अगले छह महीने में ही सेंसेक्स 20 हजार के स्तर पर पहुंच गया और दिसंबर 2007 में सेंसेक्स ने 20,000 का स्तर भी पार कर लिया था।

2008 की मंदी ने बाजार का खेल बिगाड़ा
8 जनवरी 2008 को सेंसेक्स ने कारोबार के दौरान पहली बार 21 हजार का स्तर पार किया था, लेकिन इसी साल आई अंतरराष्ट्रीय मंदी ने पूरा खेल बिगाड़ दिया था। मंदी की वजह से पूरी दुनिया के शेयर बाजारों के साथ ही भारतीय शेयर बाजार भी धड़ाम हो गए और 10 जनवरी 2008 को सेंसेक्स 14,889.25 के स्तर पर बंद हुआ. इसी साल 16 जुलाई को सेंसेक्स 12,575.8 पर बंद हुआ। इतना ही नहीं नवंबर 2008 में सेंसेक्स 8,451.01 के स्तर तक पहुंच गया था। इसके बाद सेंसेक्स को फिर वापस 21 हजार के स्तर तक जाने में करीब 3 साल लगे थे।

2014 में बाजार ने नरेंद्र मोदी का शानदार स्वागत किया
साल 2013 में BSE सेंसेक्स ने पलटी मारी और 18 जनवरी 2013 को सेंसेक्स फिर 20,039.04 पर बंद हुआ। 2014 में केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी। शेयर बाजार ने भी मोदी सरकार का जमकर स्वागत किया। 16 मई 2014 को ही सेंसेक्स 25,364 के स्तर तक पहुंच गया था। इसके बाद सेंसेक्स को 25 हजार से 30 हजार तक पहुंचने में तीन साल का समय लगा था।

साल 2017 में 30 हजार का स्तर
साल 2017 के अप्रैल महीने में सेंसेक्स 30,133 तक पहुंचा और अगले एक साल में ही सेंसेक्स 35 हजार के लेवल पर पहुंच गया। 17 जनवरी 2018 को सेंसेक्स 35,081 पर बंद हुआ। 30 अक्टूबर 2019 को सेंसेक्स ने 40,051 के स्तर को छू लिया था।

कोरोना संकट में बड़ा झटका लगा
सेंसेक्स जनवरी 2020 में 42 हजार के करीब पहुंच गया था, लेकिन इसके बाद साल 2020 का कोरोना ने तबाही मचाना शुरू कर दिया था। और यही कारण था कि सेंसेक्स मार्च 2020 में लॉकडाउन के बाद 25,981 तक पहुंच गया था, हालांकि अप्रैल के अंत और मई से सेंसेक्स में फिर से शानदार रिकवरी आने लगी।

15 महीने में 40 से 50 हजार का सफर
30 अक्टूबर 2019 को सेंसेक्स पहली बार 40,000 के पार बंद हुआ। विदेशी और घरेलू निवेशकों के दम पर सेंसेक्स ने करीब एक साल में ही 40 से 45 हजार तक का सफर तय कर लिया। 4 दिसंबर, 2020 को सेंसेक्स 45,079 पर बंद हुआ। इसके करीब डेढ़ महीने बाद ही सेंसेक्स ने 21 जनवरी 2021 को नया रिकॉर्ड बनाते हुए 50 हजार का आंकड़ा पार कर लिया।

किसने की थी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की शुरुआत?
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की शुरुआत 4 गुजराती और एक पारसी शेयर ब्रोकर्स ने की थी। 1850 के आसपास अपने कारोबार के सिलसिले में मुंबई के टाउन हॉल के सामने बरगद के एक पेड़ के नीचे बैठक किया करते थे। इन ब्रोकर्स की संख्या साल-दर-साल लगातार बढ़ती गई। 1875 में इन्होंने अपना 'द नेटिव शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स एसोसिएशन’ बना लिया, साथ ही, दलाल स्ट्रीट पर एक ऑफिस भी खरीद लिया। आज इसे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज कहा जाता है।

दैनिक भास्कर से खास बातचीत में BSE के MD & CEO आशीष चौहान ने कहा कि BSE अपनी स्थापना के बाद पिछले 146 सालों से भारत में इन्वेस्टमेंट और वेल्थ क्रिएशन के लिए काम कर रहा है। BSE की सफलता की कोशिश, 7.2 करोड़ से ज्यादा निवेशक खाते, 4,700 से ज्यादा रजिस्टर्ड कंपनियों और 231 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के इक्विटी मार्केट कैपिटलाइजेशन से देखी जा सकती है। BSE आने वाले समय में भारत को डबल डिजिट एनुअल ग्रोथ हासिल करने में मदद करेगा।

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