खैर बैंक अकाउंट चाहे आपको किसी भी बैंक में खुलवाना हो, लेकिन जब आप किसी भी बैंक में अकाउंट खुलवाएंगे, तो आपसे यह जरूर पूछा जाएगा कि आप कौनसा अकाउंट खुलवाना चाहते हैं ? इसलिए आपको यह पता होना जरूरी है कि बैंक अकाउंट कितने प्रकार के होते हैं ? कौनसे बैंक अकाउंट का क्या कार्य होता है ? या कौनसा बैंक अकाउंट किस काम आता है ? ताकि आप अपनी आवश्यकता के अनुसार सही बैंक अकाउंट खुलवा सकें और आपको ज्यादा से ज्यादा फायदा मिल सके।

डीमैट अकाउंट कितने प्रकार के होते है

HUF अकाउंट के लिए जो चार्जेस लगते हैं वह इस प्रकार हैं:

अकाउंट ओपनिंग चार्जेस

अकाउंट टाइप चार्जेस
ट्रेडिंग एंड डीमैट अकाउंट ₹500/-
कमोडिटी अकाउंट ₹300/-

अकाउंट मेंटेनेंस चार्जेस (AMC)

अकाउंट के प्रकार एनुअल चार्जेस क्वार्टरली चार्जेस
डीमैट अकाउंट ₹300 + 18% GST ₹75 + 18% GST

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Bank Deposit- बैंक डिपॉजिट

क्या होते हैं बैंक डिपॉजिट
बैंक डिपॉजिट (Bank Deposit) वह धन होता है जिसे सुरक्षापूर्वक रखने के लिए बैंकिंग संस्थानों में रखा जाता है। ये डिपॉजिट, खातों में जमा किए जाते हैं जैसे कि सेविंग्स अकाउंट, चेकिंग अकाउंट, मनी मार्केट अकाउंट, काॅल डिपॉजिट अकाउंट और सर्टिफिकेट्स ऑफ डिपॉजिट (सीडी)। सेविंग्स अकाउंट, चेकिंग अकाउंट बैंक डिपॉजिट को स्वीकार करते हैं। ज्यादातर बैंक डिपॉजिट एफडीआईसी द्वारा 250,000 डाॅलर तक इंश्योर्ड होते हैं। खाताधारक के पास जमा किए गए फंड को विदड्रॉ करने का अधिकार होता है जैसा कि खाता समझौते से संबंधित शर्तों और नियमों में निर्धारित किया जाता है।

बैंक डिपॉजिट किस प्रकार काम करता है?
डिपॉजिट अपने आप में बैंक द्वारा जमाकर्ताओं के प्रति एक बकाया देनदारी है। बैंक जमा किए गए वास्तविक फंड के बजाय इसे देनदारी के रूप में उल्लेख करता है। जब कोई व्यक्ति खाता खोलता है और कैश डिपॉजिट करता है तो वह कैश के प्रति लीगल टाइटल सरेंडर कर देता है और यह बैंक का एक एसेट बन जाता है।

डीमैट अकाउंट कितने प्रकार के होते है

बैंक खातों

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जब भी आप बैंक में जाते है तो आपके मन में ये सवाल जरूर आता होगा की बैंक खातों के कितने प्रकार होते है? , आपको बैंक में कौनसा खाता खोलवाना चाहिए? और उन खातों से आपको कितना लाभ और नुकसान होगा? तो चलिए इसके बारे में विस्तार में जानते है।

बैंक क्या है?

Table of Contents

बैंक एक तरह का वित्तीय संस्थान है जो आपको आपके पैसे लेने और देने का कार्य करता है। डीमैट अकाउंट कितने प्रकार के होते है बैंक में आप अपना पैसे सुरक्षित रख सकते है और बैंक आपको उस पैसों का ब्याज भी देता है। यदि आपको कभी पैसों को सख़्त जरूत पड़ गई तो आप बैंक से उधर भी ले सकते है। और उस पैसों को आप ब्याज के साथ किस्तों में चुका सकते है।

बैंक खातों किसे कहते है?

बैंक खाते में ही आप अपने पैसे सुरक्षित रख सकते है। बैंक जाने पर बैंक वाले आपका पैसा जमा या देने के लिए आपका बैंक अकाउंट खोलते है ताकि आप अपने पैसों की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सके।

बैंक खातों कितने प्रकार होते है?

बैंक खातों चार प्रकार के होते है?

  1. बचत खाता (Saving Account)
  2. चालू खाता (Current डीमैट अकाउंट कितने प्रकार के होते है Account)
  3. सावधि जमा खाता (Fixed Deposit Account)
  4. अवधि जमा खाता (Recurring Deposit Account)

बचत खाता (Saving Account):-

बचत खाता अर्थात saving account होता है। जहां आप अपने कमाई के पैसे में से की गई बचत राशि को आप बचत खाता में रख सकते है। बैंक आपके पैसों पर ब्याज भी देता है। ब्याज दर हर बैंक द्वारा अलग अलग होती है। इसकी ब्याज दर 3 से 5% के बीच ही होती है।

इस खाते में दो तरह के खाते खुलते है एक ज़ीरो बैलेंस खाता और दूसरा मिनिमम अकाउंट बैलेंस। ज़ीरो बैलेंस खाते में मिनिमम बैलेंस रखना अनिवार्य नहीं होता है। जबकि मिनिमम बैलेंस अकाउंट में बैंक द्वारा न्यूनतम राशि रखना अनिवार्य होता है। जो हर बैंक अलग अलग राशि की मांग रखता है अगर आप ये राशि खाते में नहीं रख पाते है तो बैंक आपसे चार्ज वसूल करता है।

Demat अकाउंट क्या है ? hindi me

Demat अकाउंट वो अकाउंट है जिसके द्वारा Share बाजार में खरीद फरोख्त की जाती हैं. सिक्योरिटीज को फिजिकल फार्मेट में बदलने की प्रक्रिया को ‘डीमेटिरियलाइजेशन’ कहते हैं। और इसी का शार्ट फॉर्म ‘डीमैट’ है। इसे खुलवाने के लिए पैन कार्ड होना जरुरी होता है, इसे आपके बैंक खाते से जोड़ दिया जाता है.

कुछ साल पहले तक अगर आप किसी कंपनी का शेयर ख़रीदते थे तो वह आप को उस के कागज़ भेजती थी. जो इस बात का सबूत होते थे कि आपने उस कंपनी के शेयर ख़रीदे हैं. और जब आप उस कपंनी के शेयर बेच देते थे तो वह कागज़ आप कंपनी के दफ्तर भेज देते थे. फिर कंपनी यह देखती थी कि जब आप ने शेयर बेचे तो शेयर का क्या भाव था.

फिर आप को वह पैसे देती थी-जिस में बहुत वक़्त लगता है. अब सब कंप्यूटर की मदद से होता है, आपने जैसे ही शेयर खरीदा वह आपके अकाउंट में कुछ देर में ही आ जायेगा और जैसे ही आप ने शेयर बेचा आपका पैसा आपके बैंक अकाउंट में भेज दिया जाएगा.

क्या एक से ज्यादा Demat account रख सकते हैं?

  • आप एक साथ कई Demat account रख सकते हैं। लेकिन एक कंपनी में आप अधिकतम तीन अकाउंट खुलवा सकते हैं।
  • भारत में दो संस्थायें डीमैटअकाउंट खोलती है
  • नेशनल सेक्योरिटीज डिपोज्रिटी लिमिटेड (एनएसडीएल) एवं सेंट्रल डिपोज्रिटी सर्विसेज लिमिलटेड (सीएसडीएल)।
  • इन डिपोज्रिटीज के करीब 500 से ज्यादा एजेंट हैं जिन्हें डिपोज्रिटी पार्टिसिपेंट्स (डीपी) कहा जाता है।
  • यह जरूरी नहीं है कि डीपी कोई बैंक ही हो। दूसरी वित्तीय संस्थाएं जैसे शेयर खान, रिलायंस मनी, इंडिया इनफोलाईन आदि के पास भी डी-मैट अकाउंट खोला जा सकता है।

Demat अकाउंट का कौन इस्तेमाल कर सकता है ?

यह जानना जरूरी है कि जो व्यक्ति खुद शेयर खरीदते-बेचते नहीं हैं उनके ब्रोकर प्रतिनिधि के रूप में खाते का इस्तेमाल कर सकते हैं इन ब्रोकर्स को आप के शेयर ख़रीदने या बेचने पर कुछ फीस मिलती है – कई बार कुछ ब्रोकर इस मुनाफे के लिए आप से बिना पूछे आपका शेयर बेच देते है इसलिए आप अपना ब्रोकर चुनते वक्त सावधानी रखे और अगर आप और आप के ब्रोकर में किसी बात पर लड़ाई है तो आप इस की शिकायत सेबी में कर सकते हैं|

  • डी-मैट खाता खुलवाने वाले व्यक्ति से डीपी कई तरह के फीस वसूलता है। यह फीस कंपनी दर कंपनी अलग हो सकती है।
  • अकाउंट ओपनिंग फीस – खात खुलवाने के लिए वसूला जाने वाला फीस। कुछ कंपनियां जैसे ICICI , HDFC , UIT आदि यह फीस नहीं लेती है। जबकि कुछ SBI और कार्वी कंसलटेंट्स आदि इसे वसूलती हैं। वैसे कुछ कंपनियां इसे रिफंडेबल (खाता बंद कराने पर लौटा देती हैं) भी रखती हैं।
  • एनुअल मेंटेनेंस फीस – सालाना फीस जिसे फोलियो मेंटेनेंस चार्ज भी कहते हैं। आमतौर पर कंपनी यह फीस साल के शुरुआत में ही ले लेती है।
  • कसटोडियन फीस – कंपनी इसे हर महीने ले सकती है या फिर एक बारी में ही। यह फीस आपके शेयरों की संख्या पर निर्भर करता है।
  • ट्रांजेक्शन फीस – डीपी चाहे तो इसे हर ट्रांजेक्शन पर चार्ज कर सकता है या फिर चाहे तो ट्रेडिंग की राशि पर (न्यूनतम फीस तय कर)।
  • इनके अलावा कंपनी री-मैट, डी-मैट, प्लेज चार्जेज, फील्ड इंस्ट्रक्शन चार्जेज आदि भी वसूल सकती हैं

चालू खाता (Current Account)

यह बैंक अकाउंट मुख्य रूप से बड़े बड़े बिजनेसमैन, उद्योगों और कंपनियों के द्वारा खुलवाया जाता है। इस बैंक अकाउंट में जमा राशि पर कोई ब्याज नहीं मिलता है। इसके अलावा आपको इसमे वो सभी सेवाएं मिलती है जो की बचत खाते में मिलती हैं। इसके अतिरिक्त करंट अकाउंट में आपको ओवरड्राफ्ट की सुविधा भी मिलती है, जिसके जरिए आपके बैंक अकाउंट में जितने पैसे हैं, आप उससे ज्यादा पैसे भी अपने बैंक अकाउंट से निकलवा सकते हैं। यानी कि बैंक से उधार ले सकते है।

आप कितने पैसे बैंक से उधार ले सकते हैं ? यह आपके पिछले लेनदेन पर निर्भर करता है। करंट अकाउंट में मिनिमम बैलेंस की भी लिमिट होती है। जो कि ₹5000 से ₹25000 तक हो सकती है। यह सभी बैंकों के लिए अलग-अलग हो सकती है। अगर आप का बैंक बैलेंस इससे कम होता है, तो आपको बैंक की तरफ से पेनल्टी दी जा सकती है।

इसके अलावा आपको बता दे कि करंट अकाउंट से लेनदेन करने की कोई भी लिमिट नहीं होती है। आप जितना चाहे उतना ट्रांजैक्शन इस बैंक अकाउंट से कर सकते हैं। इसी लिए यह एकाउंट सिर्फ बड़ी बड़ी कंपनियों द्वारा खुलवाया जाता है, क्योंकि उनके daily लाखों, करोड़ो रुपये के लेनदेन होते है।

आवर्ती जमा खाता RD Account (Recurring Deposit Account)

आवर्ती जमा खाता उन लोगों के लिए होता है जो कि एक निश्चित राशि हर महीने एक निश्चित समय के लिए बैंक में जमा करवाना चाहते हैं। इस अकाउंट में आपको एक हर महीने एक निश्चित राशि इस अकाउंट में जमा करवानी पड़ती है, समय सीमा पूरी होने पर आप अपने सारे पैसे ब्याज सहित निकलवा सकते हैं। उसके बाद यह बैंक अकाउंट बंद कर दिया जाता है। हालांकि आरडी अकाउंट से आप अपने पैसे समय से पहले भी निकलवा सकते हैं। लेकिन इसके लिए आप को बैंक द्वारा निर्धारित किए गए निर्देशों का पालन करना पड़ेगा, जिसमे आपको बैंक को कुछ पेंटली भी देनी पड़ सकती है।

यह अकाउंट इसलिए खुलवाया जाता है क्योंकि इसकी ब्याज दर बचत खाते से अधिक होती है। RD Account में आप कम से कम 1 साल और अधिकतम 10 साल तक पैसे जमा करवा सकते हैं।

FD Account (Fixed Deposit Account) सावधि जमा खाता

FD का नाम आपने बहुत बार सुना होगा। लेकिन शायद आपको यह पता ना हो कि यह भी एक प्रकार का बैंक अकाउंट है, यह बैंक एकाउंट तब खुलवाया जाता है जब आपको एक निश्चित राशि एक निश्चित समय के लिए जमा करवानी हो, RD एकाउंट की तरह इसमे आपको हर महीने पैसे जमा करवाने की जरूरत नही होती है। बल्कि आपको एक निश्चित राशि FD एकाउंट खुलवाते समय ही जमा करवानी होती है, जो कि आप 1 से लेकर 10 साल तक करवा सकते है। उसके बाद आप अपनी तय की गई समय सीमा पूरी होने पर FD के सारे पैसे ब्याज सहित निकलवा सकते है। अगर आप चाहे तो FD एकाउंट के पैसे समय से पहले भी निकलवा सकते है, लेकिन इसके लिए आपको बैंक को पेनल्टी देनी पड़ेगी, यानी कि कुछ पैसे बैंक आपके एकाउंट से काट लेगा।

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आज के इस लेख में आपने जाना कि बैंक अकाउंट कितने प्रकार के होते हैं ? उम्मीद है कि आपको यह जानकारी पसंद आई होगी। अगर लेख अच्छा लगा हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ भी डीमैट अकाउंट कितने प्रकार के होते है जरूर शेयर करें। इसके अलावा अगर आपको कोई सवाल या सुझाव हो तो आप नीचे कमेंट करके बता सकते हैं।

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