सिक्का संग्रह के लिए कोर्स करना जरूरी : रविशंकर शर्मा

महजहॉबी रखने से आप सिक्का संग्रहकर्ता नहीं हो सकते। अगर सफल संग्रहकर्ता बनना चाहते हैं तो उसके लिए कोर्स या स्टडी करना जरूरी है, अन्यथा कदम-कदम पर ठगे जाने की आशंका है। कौन-सा सिक्का अनमोल है और किस सिक्के की क्या कीमत है, इसकी जानकारी कोर्स करने से मिलेगी। यह कहना है कि कोलकाता के संग्रहकर्ता रविशंकर शर्मा का। बिहार मूल के रविशंकर शर्मा ने मंगलवार को दैनिक भास्कर से बातचीत में सिक्कों के पीछे छिपे इतिहास और एक संग्रहकर्ता बनने की जानकारी शेयर की। उन्होंने कहा कि कोर्स करके एक व्यक्ति केवल सफल संग्रहकर्ता बन सकता है, बल्कि वह इतिहास का अच्छा जानकार बन सकता है। इस तरह वह देश-दुनिया में प्रसिद्धि पा सकता है।

कईलिपियों की जानकारी भी जरूरी

संग्रहकर्ताको ब्राह्मी और खरोष्टी लिपि प्राचीन सिक्कों को पढ़ने के लिए आनी चाहिए। मुगल और सुलतानकालीन सिक्कों की जानकारी के लिए अरेबिक (अरबी) और पर्शियन (पारसी) भाषा आनी चाहिए।

पहले क्या करना जरूरी

नयासंग्रहकर्ता हैं, तो सबसे पहले स्मारक सिक्का जिन पर महापुरुषों की तस्वीर या जो किसी इंवेंट पर जारी किए गए हों, उसे तिथिवार जमा करना चाहिए। सिक्का साफ-सुथरा और डिटेल्स वाला हो, तभी उसका महत्व है। संग्रह वर्षवार होना चाहिए। कौन सा सिक्का चुनना है? साथ ही इसे मिंट यानी टकसाल वार संग्रह करना चाहिए। देश भर में चार टकसाल हैं। कोलकाता, मुंबई, हैदराबाद नोयडा। सिक्कों के संबंध में www. republiccoinsofindia.com पर जानकारी हासिल कर सकते हंै।

चवन्नी के आकार की हो गई अठन्नी

इसवर्ष सरकार ने अठन्नी (50 पैसे) का सिक्का जारी किया है। उसका आकार चवन्नी (25 पैसे) के साइज का हो गया है, जो बहुत जल्द बाजार में आने वाला है। ये सिक्के कोलकाता टकसाल द्वारा जारी किए गए हैं।

इन शहरों में होती है पढ़ाई

बकौल शर्मा, जो सिक्के कम मात्रा में बने हैं, वे उतने ही बहुमूल्य है। पुराना से कोई मतलब नहीं है, अगर वह ज्यादा मात्रा में निकला है। 1996 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्म शताब्दी वर्ष पर 2 रुपए के सिक्के जारी किए गए थे। तब सरकार को मालूम चला कि 100 वर्ष 1997 में पूरा हो रहा है। तब सरकार ने सिक्के जारी करने का फैसला वापस ले लिया, तब वह सिक्का रेयर हो गया था। उसकी आज कीमत 2000 रुपए है। इसी तरह से बाल गंगाधर तिलक पर 2007 में सिक्का जारी हुआ था। उस पर लिखा था बाल गंगाधर तिलकजी। वे सिक्के भी कम मात्रा में बने थे, इसलिए रेयर हो गए। आज उसकी कीमत 2500 रुपए है। सरकार ने गलती सुधार कर बाल गंगाधर तिलक छापा जो बहुत संख्या में छपा। सेकेंड इंटरनेशनल क्रोप साइंस कॉन्फ्रेंस 1996 में होना था। लेकिन किसी कारण से टल गया। लेकिन उससे पहले उस पर 10 पैसे के कुछ सिक्के जारी कर दिए गए थे। वे सिक्का भी रेयर हो गए। उसकी आज कीमत 6 से 7 हजार रुपए है। इसी तरह से 1988-89 में 10 पैसे का सिक्का जारी हुआ। उसमें भारत की जगह मारत छप गया। फिर उसमें सुधार करके ठीक किया गया। वह सिक्का रेयर हो गया। 1988-89 में स्टेनलेस स्टील का 10 पैसे का सिक्का निकला था, वह फेरिटिक स्टेनलेस स्टील से बना था।

10 रुपये का कौन सा सिक्का असली, कौन सा नकली? RBI ने दी सफाई

रिजर्व बैंक ने कुछ व्यापारियों के सिक्के लेने से मना करने की शिकायतों के मद्देनजर बुधवार को कहा कि 10 रुपये के सिक्के के सभी 14 डिजायन वैध और मान्य हैं। रिजर्व बैंक ने एक बयान में कहा.

10 रुपये का कौन सा सिक्का असली, कौन सा नकली? RBI ने दी सफाई

रिजर्व बैंक ने कुछ व्यापारियों के सिक्के लेने से मना करने की शिकायतों के मद्देनजर बुधवार को कहा कि 10 रुपये के सिक्के के सभी 14 डिजायन वैध और मान्य हैं।

रिजर्व बैंक ने एक बयान में कहा, ''रिजर्व बैंक के संज्ञान में यह आया है कि असली-नकली के संदेह के कारण कई जगहों पर लोग व व्यापारी 10 रुपये के सिक्के लेने से मना कर दे रहे हैं।

रिजर्व बैंक ने कहा कि वह चलन में सिर्फ उन्हीं सिक्कों को लाता है जो सरकारी टकसाल में ढाले जाते हैं। इन सिक्कों में अलग फीचर्स हैं ताकि ये आर्थिक, सामाजिक व सांस्कृतिक मूल्यों के विभिन्न पहलुओं को प्रदर्शित कर सकें और इन्हें समय-समय पर पेश किया गया है।

केंद्रीय बैंक ने कहा, ''अभी तक 10 रुपये के सिक्के के 14 अलग डिजायन पेश किये गये हैं। ये सभी सिक्के वैध हैं तथा लेन-देन के लिए स्वीकारे जाने योग्य हैं।

रिजर्व बैंक ने बैंकों को भी अपनी सभी शाखाओं में लेन-देन के लिए सिक्के स्वीकृत करने के लिए कहा है।

कलेक्शन से निकालें एक रुपए का ये पुराना सिक्का. दे रहा है पैसा कमाने का मौका- जानें पूरा प्रोसेस

Old Coin Value: अगर आपके पास 1 रुपए का ये पुराना सिक्का है तो आप उसे फटाफट कलेक्शन में से निकाल लें. क्योकिं आप इसे सेल कर अच्छी खासी कमाई कर सकते हैं.

Old Coin Value: आजकल पुराने सिक्कों की केलक्शन करने का शौक हर कोई रखता है. ऐसे में किसी न किसी के पास 1 रुपए का पुराना सिक्का जरूर होता है, लेकिन उन्हें ये नहीं पता कि वो इस पुराने सिक्के को सेल करके करोड़पति बन सकते हैं. आज हम आपको एक ऐसे सिक्के के बारे में बताएंगे, जिसे आप सेल करके करोड़पति बनने का मौका पा सकते हैं.

1933 मे जारी हुआ था

अगर आप भी क्वाइन कलेक्ट करने के शौकीन हैं, तो आपको मालूम होगा कि इस साल (2021) जून के महीने में एक सिक्का पूरी दुनिया की खबरों में पॉपुलर हो. ये सिक्का एक ऑक्शन में करीब 2 करोड़ डॉलर में सेल हुआ था. बता दें 2 करोड़ डॉलर में सेल हुआ ये सिक्का डबल ईगल अमेरिका में ऑफिशियली जारी हुआ आखिरी सोने का सिक्का था, जो 1933 मे जारी हुआ था. चलन में आने से पहले ही सरकार ने इस सिक्के को हटा लिया गया.

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हालांकि अभी भी कुछ सिक्के ऐसे हैं, जिनकी कीमत आज के समय में करोड़ों में है. इसके अलावा इन्वेस्टर्स ऐसे किसी सिक्के या नोट को लेकर ज्यादा काफी एक्साइटेड रहते हैं, जिसे किसी बड़े बदलाव के सबूत की तरह पेश किया जा सके. या फिर उन्हें किसी घटना या बदलाव के साथ जोड़ा जा सके. यही नहीं उनकी संख्या दुनिया में बेहद कम होनी चाहिए.

बड़े काम का है गलती से छपा सिक्का या नोट

दरअसल एक ऑक्शन के दौरान जिस नोट की कीमत 20 डॉलर थी, उसकी कीमत 57 हजार डॉलर से भी ऊपर पहुंच गई थी. ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि नोट जब प्रिंट हो रहे थे, उसी दौरान उसपर गलती से एक स्टीकर गिर गया था और वहीं नोट बाकी चीज़ों के साथ प्रिंट हो गया. फिर बाद में यहीं नोट जब एक स्टूडेंट ATM से कैश निकाल रहा था उसके हाथ लग गया.

जब भी कोई नोट गलत प्रिंट होता है, तो उसे obstructed error notes कहा जाता है. ये नोट अमान्निया माना जाता है. क्योंकि एक गलती की वजह से उस सिक्के या नोट को नष्ट कर दिया जाता है. लेकिन अगर कोई भी गलती से प्रिंट हुआ सिक्का या नोट चलन में आ जाता है, तो उस सिक्के की कीमत बढ़ जाती है. ऐसा इसलिए क्योंकि ऐसे नोटों की कीमत इस बात पर तय होती है कि उस पर होने वाली भूल कितनी बड़ी है.

हर वक्त के निजाम के गवाह हैं सिक्के

हर वक्त के निजाम के गवाह हैं सिक्के

Kanpur: मुगल शहंशाह शाहजहां के गद्दीनशीन होने की पहली वर्षगांठ को यादगार बनाने के लिए खालिस सोने का एक सिक्का जारी किया गया था. आगरा से जारी इस सिक्के पर शहर का नाम ‘अकबराबाद’ अंकित है. इस वाक्ये को 350 साल से कौन सा सिक्का चुनना है? ज्यादा बीत चुके हैं. पर वो खास सिक्के आज भी कुछ लोगों के पास सुरक्षित हैं. एक्साइटिंग बात ये है कि ये सिक्का थर्सडे को कानपुराइट्स को खरीदने और देखने के लिए अवेलेबिल होगा. केवल ये ‘नजराना सिक्का’ ही नहीं, बल्कि मुगलकाल से लेकर मौर्यकाल तक के प्रसिद्ध मोहरों और सिक्कों के अलावा कई प्रकार के दुलर्भ करंसी नोट और मैडल भी एक खुली नीलामी में पब्लिक को उपलब्ध होंगे. शहर के अनाइचाज रेस्टोरेंट में आयोजित की जा रही ये दो दिवसीय आक्शन और एग्जिबिशन प्रदेश में अपनी तरह की पहली है.

कीमत है सात से नौ लाख रुपए

ऑक्शन आयोजित कर रहे आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) के ऑथराइज्ड ‘टोडीवाला ऑक्शन’ फर्म के मैलकॉम टोडीवाला के अनुसार मुगल शहंशाह का नजराना सिक्के की बेसिक कीमत 7 लाख रुपए है, जो नीलामी में 9 लाख रुपए तक जाने की पूरी उम्मीद है। ये मुगलकाल के बाकी सिक्कों की तरह प्योर 24 कैरेट गोल्ड का है। टोडीवाला ऑक्शंस यूपी में पहली बार इस तरह के ऑक्शन को आयोजित कर रहे हैं जिसमें करीब दो हजार साल पुराने से लेकर 60 के दशक तक के क्वाइंस और नोट देखने को मिलेंगे।

15 सौ से सात लाख तक
वैसे तो इस ऑक्शन में 15 सौ रुपये तक की कीमत वाले सिक्के भी नीलाम किये जाएंगे, जिनकी कीमत बोली के आधार पर बढ़ती जाएगी। कुछ सिक्के किसानों के पास से मिले तो महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव से हमें शाहजहां वाला सिक्का मिला है।

सोलह आने नहीं, 16 रुपए सच
क्या आप ने बैंक ऑफ हिंदुस्तान का नाम सुना है? सच मानिए, डेढ़ सौ साल से भी पहले ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा कैलकटा में स्थापित इस बैंक द्वारा जारी 16 रुपए का नोट आज के 16 रुपए से हजार गुना ज्यादा वैल्यूएबल है। ब्रिटिश पीरियड के बाद तक इस 16 के नोट के बदले आप कहीं से भी एक सोने की मोहर या फिर चांदी के 16 रुपए ले सकते थे। ये दुलर्भ नोट भी ऑक्शन में उपलब्ध होगा।

डिमांड के हिसाब से होते हैं रेट

टोडीवाला कहते हैं कि लोगों में ये बड़ा मिसकंसेप्शन है कि सिक्के जितने पुराने होंगे, उतने ही महंगे भी होंगे। असल में पुराने सिक्के भी आम इकोनॉमी की तर्ज पर चलते हैं। जिस सिक्के की डिमांड जितनी ज्यादा होगी, वो उतना ही महंगा होगा। और डिमांड कई विचित्र कारणों पर डिपेंड करती है। जैसे कि कौन सा सिक्का किस ओकेजन पर जारी किया गया था। या फिर किस प्राचीन सिक्के पर कौन सा चित्र बना है। जहां केवल 360 वर्ष पुराना शाहजहां का सिक्का 7 से 9 लाख रुपए का है, वहीं दो हजार साल पुराना साधारण मौर्य कालीन सिक्का मात्र 3 हजार रुपए में बेचेंगे।

अगर आपके पास हैं एंटीक सिक्के

टोडीवाला के अनुसार कानून ये है कि कोई सिक्के या एंटीक अगर आपके कानूनी पजेशन वाले घर, बिल्डिंग या जमीन से निकले हैं तो वो आपका है। लेकिन अगर वो अन्यत्र खुदाई में निकलें हैं तो उनको हथियाकर बेच देना कानूनी नहीं, वो गवर्नमेंट की प्रॉपर्टी हुई।

क्वाइन कलेक्टर्स: अगर लगवानी हो सही कीमत तो

-कानूनी रूप से नीलामी करने वाले एएसआई और भारत सरकार से अधिकृत ऑक्शनियर्स से ही संपर्क करें

-इंटरनेट के माध्यम से ही अथाराइज्ड ऑक्शनियर्स, उनकी वेबसाइट्स ढूंढें। घ्यान रखें कि सीधे किसी फॉरेनर को बेचना गैर कानूनी है।

-किसी को भी पहले यूंही अपने क्वाइंस, नोट आदि नहीं सौंपे। पिक्चर्स भेजें, अपने एंटीक की पूरी जानकारी और हिस्ट्री जान लें

-सही ऑक्शनियर्स रसीद के बदले आपके क्वाइन या एंटीक को पहले ऑक्शन करके, बाद कौन सा सिक्का चुनना है? में भी पैसे दे सकते हैं।

-खरीददार या विक्रेताओं को क्वाइंस, करंसी नोट्स आदि की सहीं वैल्यू इनकी साइट्स से पता चल सकती है। अक्सर कीमत में कमीशन भी शामिल रहता है। ये गवर्नमेंट की तरफ से एलाउ है।

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