IQ Option ब्रोकर का उपयोग करके स्टॉक मार्केट पर शेयर कैसे खरीदें

IQ Option प्लेटफॉर्म का उपयोग करके शेयर बाजार में शेयर कैसे खरीदें यह एक दिलचस्प सवाल है। समाधान पर चर्चा करने से पहले इसके पीछे की अवधारणा को समझना महत्वपूर्ण है। स्टॉक ऑप्शन ट्रेडिंग आज वित्तीय बाजार में एक अत्यधिक अस्थिर क्षेत्र है। यह आज सबसे लोकप्रिय निवेश अवसरों में से एक बन गया है जहां कई निवेशक बड़ी मात्रा में पैसा निवेश कर रहे हैं। हालांकि, कई तरह की कंपनियां और शेयर हैं, जो आम निवेशकों के लिए पूरी निवेश प्रक्रिया को काफी जटिल बना सकते हैं।

जब आप IQ Option ब्रोकर प्लेटफॉर्म के माध्यम से बाजार में निवेश करने का विकल्प चुनते ब्रोकर के पीछे क्या है? हैं, तो आप बाजार में सूचीबद्ध विभिन्न कंपनियों और शेयरों का लाभ उठा सकते हैं। आप जो विकल्प चुन रहे हैं वह उन शेयरों से संबंधित होना चाहिए जिनमें आप रुचि रखते हैं। सही विकल्प चुनने से यह सुनिश्चित होगा कि आपको अपने निवेश से अधिकतम लाभ प्राप्त होगा और कई श्रेणियां हैं जहां आप अपने शेयर चुन सकते हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यदि आप सही श्रेणी का चयन नहीं करते हैं, तो आपके पास कुछ भी नहीं हो सकता है या आपके निवेशित धन का नुकसान हो सकता है।

स्टॉक और शेयरों की श्रेणियाँ

दो श्रेणियां हैं जिनमें स्टॉक और शेयरों को वर्गीकृत किया जाता है, अर्थात् ब्लू-चिप कंपनियां और रेड चिप कंपनियां। जो कंपनियां पहली श्रेणी से संबंधित हैं, वे दूसरी कंपनियों की मजबूत प्रतिस्पर्धी हैं। इसलिए, जब आप इस श्रेणी के शेयरों और शेयरों का चयन करते हैं, तो यह महत्वपूर्ण है कि आप टॉप और मिड-कैप शेयरों में बने रहें और बड़े कैप में निवेश करने से बचें। ऐसा इसलिए है क्योंकि स्मॉल कैप में निवेश तुलनात्मक रूप से ब्रोकर के पीछे क्या है? जोखिम भरा होता है और रिटर्न भी उतना अधिक नहीं होता है।

IQ Option प्लेटफॉर्म आपको शीर्ष कंपनियों के शेयरों और शेयरों में निवेश करने का अवसर प्रदान करता है। जब आप इस श्रेणी से किसी कंपनी के शेयरों और शेयरों का चयन करते हैं और निवेश करते हैं, तो आप वास्तव में कंपनी में निवेश कर रहे हैं। हालांकि, ज्यादातर लोग स्टॉक मार्केट में एक विकल्प प्लेटफॉर्म का उपयोग करके अपना निवेश करते हैं, यहां तक ​​​​कि उन लाभों को समझे बिना जो वे इस तरह के निवेश से प्राप्त कर सकते हैं। निवेश करने से पहले कंपनी की मुनाफा कमाने की क्षमता को समझना जरूरी है।

IQ Option प्लेटफॉर्म के माध्यम से निवेश करने के लाभ

IQ Option प्लेटफॉर्म के माध्यम से निवेश करने से जुड़े कई फायदे हैं। सबसे पहले, आपके पास निवेश के प्रकार पर बहुत सारे विकल्प हैं जो आप करना चाहते हैं। आप लाभांश भुगतान और वृद्धि, शेयर की कीमतों में उतार-चढ़ाव और कई अन्य चीजों से संबंधित विकल्पों में निवेश कर सकते हैं। दूसरे, आप उन विकल्पों में निवेश कर सकते हैं जो पेनी स्टॉक के अंतर्गत सूचीबद्ध हैं। जब आप एक विकल्प दलाल का उपयोग करते हैं, तो वह उन शेयरों को सूचीबद्ध करेगा जो पैनी स्टॉक के अंतर्गत हैं और इसलिए, आप उस विकल्प का चयन कर सकते हैं जो आपकी आवश्यकता के अनुसार सबसे अच्छा है।

IQ Option ब्रोकर की अच्छी प्रतिष्ठा है और यह बाजार में अच्छी तरह से जाना जाता है। यह अपने ग्राहकों को एक मुफ्त विकल्प सेवा भी प्रदान करता है। आप इस सेवा का विकल्प चुन सकते हैं और अपने ब्रोकर से सभी आवश्यक सहायता प्राप्त कर सकते हैं। आपको बस उस राशि की एक सीमा तय करनी है जिसे आप निवेश करना चाहते हैं, और आपका ब्रोकर आपकी ओर से शेष सौदे का प्रबंधन करेगा।

IQ Option प्लेटफॉर्म के माध्यम से निवेश करने का एक अन्य लाभ यह है कि ऐसे कई निवेशक हैं जो अपने शेयर बेचने और इससे अधिक लाभ लेने के इच्छुक हैं। ऐसे निवेशक हैं जो अपने पुराने स्टॉक से छुटकारा पाना चाहते हैं और इसे जल्द से जल्द बेचना चाहते हैं। कभी-कभी, हो सकता है कि आप अधिक शेयर खरीदने की स्थिति में न हों। यदि आप पुराने शेयरों को बेचने और उनसे अधिक लाभ प्राप्त करने में रुचि रखते हैं, तो आपको एक विश्वसनीय ब्रोकर की तलाश करने पर विचार करना चाहिए।

अंत में, यदि आप शेयर बाजार में नए हैं और इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, तो छोटे से शुरुआत करने की सलाह दी जाएगी। एक निश्चित राशि का निवेश करके शुरुआत करें ताकि आप अपने नुकसान को कम कर सकें और धीरे-धीरे अपने मुनाफे को बढ़ा सकें। एक बार जब आप बाजार में अनुभव हासिल कर लेते हैं, तो आप अपने मुनाफे को बढ़ाने के लिए कुछ और पैसे निवेश कर सकते हैं। इस ब्रोकर के पीछे क्या है? प्रकार, IQ Option ब्रोकर का उपयोग करके शेयर बाजार में शेयर खरीदने का तरीका इस प्रकार है।

अमित शाह: वो शेयर ब्रोकर जिसकी कर्मठता ने उसे बनाया ‘राजनीति का चाणक्य’

Amit shah life, amit shah biography

अमित शाह 22 अक्टूबर 1964 को मुंबई के एक संपन्न गुजराती परिवार में जन्मे थे। बीजेपी के अध्यक्ष की कमान संभालने के बाद उन्होने पार्टी की पूरी तस्वीर ही बदल कर रख दी है। तीन तलाक, कश्मीर से आर्टिकल 370 का रद्द होना ये कुछ ऐसे ऐतिहासिक फैसले हैं जिनको अमल करने के पीछे का मास्टरमाइंड शाह को ही ब्रोकर के पीछे क्या है? माना जाता है। आश्चर्यजनक बात तो ये है कि राजनीति की ये अद्भुत कला उन्हें विरासत में नहीं मिली। लेकिन इसके बावजूद भी उन्होंने सही समय पर अचूक दांव खेल कर बड़े बड़े राजनीतिज्ञ के हौसले पस्त कर दिए है। तो आइये जानें सियासी अखाड़े के इस धुरंधर का बेहतरीन सफर।

ऐसा रहा बचपन

16 साल की उम्र तक शाह ब्रोकर के पीछे क्या है? अपने पैतृक गांव गुजरात के मानसा में रहे और स्कूल की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वो अपने परिवार समेत अहमदाबाद शिफ्ट हो गए। उन्होंने अहमदाबाद से बायोकेमिस्ट्री में बीएससी करी है। इसके बाद युवावस्था में ही पारिवारिक जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने खुद को अपने पिता के प्लास्टिक के पाइप के कारोबार में व्यस्त कर लिया। वक़्त तेज़ी से आगे बढ़ा और शाह को स्टॉक मार्केट की ओर खींच लाया। जहां उन्होंने शेयर ब्रोकर के रूप में काम किया। लेकिन वक़्त को तो कुछ और ही मंजूर था। इसके बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और फिर वहीं हमेशा के लिए पैर जमा लिए।

कुछ यूं हुई पीएम मोदी से मुलाकात

साल 1980 में 16 साल की उम्र में वे RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) से जुड़ गए थे और ABVP (अखिल भारतीय विद्या परिषद्) के कार्यकर्ता के तौर पर उभरे थे। अपनी सीखने की ललक और कार्यक्षमता के चलते उन्हें मात्र दो साल में एबीवीपी की गुजरात इकाई का जॉइंट सेक्रेटरी बना दिया गया। साल 1986 में वे पीएम मोदी से मिले और यही मुलाकात दोनों की पक्की यारी में तब्दील हो गई।

चुनावों का संभाला जिम्मा

1987 में शाह ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की और बीजेपी की युवा इकाई भारतीय जनता युवा मोर्चा में शामिल हो गए। 1997 में उनकी BJYM के कोषाध्यक्ष के रूप में नियुक्ति की गई। और 1989 में वे बीजेपी अहमदाबाद शहर के सचिव बनाये गए। शाह को राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रचार प्रसार के लिए भी याद किया जाता है। उसी दौरान उनकी लाल कृष्ण आडवाणी से मुलाकात हुई थी। आडवाणी उस समय गुजरात के गांधीनगर से लोकसभा के चुनावी मैदान में उतरे थे। शाह ने उस समय चुनाव संयोजक की पहली बार भूमिका निभाई और 2009 तक लगातार उठाते रहे।

वित्त निगम को घाटे से उबारा

1995 में शाह गुजरात प्रदेश वित्त निगम के अध्यक्ष बने। अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने न सिर्फ इसके मुनाफे में 214 प्रतिशत की वृद्धि की, बल्कि कार्यकाल के दौरान निगम को घाटे से बाहर भी उबारा। उनके अध्यक्ष रहते हुए पहली बार पत्ता खरीद फरोख्त, कार्यशील पूंजी अवधि लोन और ट्रक ऋण शुरुआत की गई। 36 साल में शाह अहमदाबाद जिला सहकारी बैंक के युवा अध्यक्ष बने। यहां भी उन्होंने अपने पद की महत्वता कायम रखते अपनी पूरी तरीके से निभाई। और महज एक साल के भीतर 20.28 करोड़ का घाटा पूरा किया।

ऐसे बने पार्टी के फेवरेट

साल 1997 में पहली बार वो चुनावी लड़ाई में उतरे और सरखेज विधानसभा से बीजेपी प्रत्याशी के तौर पर विधायक पद के लिए नामांकन भरा। और भारी भरकम वोटों से विजयी हुए। और ये जीत का अंतर हर चुनाव में लगातार बढ़ता ही गया। उनकी अद्वितीय रणनीति के चलते उन्हें 2001 में बीजेपी की राष्ट्रीय सहकारिता प्रकोष्ठ का संयोजक नियुक्त किया गया। इस दौरान उनकी कार्यकुशलता को सबसे ज्यादा लाइमलाइट मिली जिसके चलते उन्हें पितामह ब्रोकर के पीछे क्या है? की उपाधि मिल गई।

वर्तमान में है केंद्रीय ग्रहमंत्री की कमान

शाह की मेहनत और दृणता को देखते हुए बीजेपी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष से उन्हें इस साल केंद्रीय गृहमंत्री की कुर्सी पर बैठा दिया है। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भी अपने बेहतरीन नेतृत्व के चलते उन्होंने पार्टी को यूपी की 80 में से 71 सीटों पर जीत दिलवाई थी। ये कहना बिलकुल भी अतिश्योक्ति नहीं होगी कि 2019 में बीजेपी की सत्ता वापसी का कहीं न कहीं श्रेय अमित शाह को भी जाता है।

Ruchi Mehra

Ruchi Mehra

रूचि एक समर्पित लेखक है जो किसी भी विषय पर लिखना पसंद करती है। रूचि पॉलिटिक्स, एंटरटेनमेंट, हेल्थ, विदेश, राज्य की खबरों पर एक समान पकड़ रखती हैं। रूचि को वेब और टीवी का कुल मिलाकर 3 साल का अनुभव है। रुचि नेड्रिक न्यूज में बतौर लेखक काम करती है।

IRCTC Tatkal Ticket Booking: खुद बुक कर सकते हैं कंफर्म तत्काल ट्रेन टिकट, नहीं पड़ेगी ब्रोकर की जरूरत

IRCTC Tatkal Ticket Booking: तत्काल ट्रेन टिकट बुक करने का तरीका क्या है

IRCTC Tatkal Ticket Booking: अगर आपको कहीं दूर-दराज या पास की भी यात्रा करनी है, तो आपके पास कई विकल्प होते हैं। ब्रोकर के पीछे क्या है? कोई अपने वाहन से, कोई बस से तो कोई हवाई जहाज से यात्रा करना पसंद करता है। लेकिन इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि लोग ट्रेन से यात्रा करना भी काफी पसंद करते हैं। खासतौर पर लंबे रूट के लिए लोग ट्रेन का ही चुनाव करते हैं। इसके पीछे ट्रेन में मिलने वाली सुविधाएं भी एक कारण है। वहीं, अगर आप भारतीय ट्रेन से सफर करना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको टिकट बुक करवाना पड़ता है। कई लोग अब भी टिकट बुक करने के लिए ब्रोकर यानी एजेंट का सहारा लेते हैं, जो आपसे अतिरिक्त पैसे लेकर आपको टिकट देता है। लेकिन अगर आप चाहें तो आप खुद घर बैठे तत्काल ट्रेन टिकट बुक कर सकते हैं, क्योंकि इसका सरल तरीका हम आपको बताने जा रहे हैं। तो चलिए आपको बताते हैं कि आप कैसे घर बैठे बिना एजेंट की मदद के ट्रेन टिकट बुक कर सकते हैं। आप अगली स्लाइड्स में इस बारे में जान सकते हैं.

अमित शाह: वो शेयर ब्रोकर जिसकी कर्मठता ने उसे बनाया ‘राजनीति का चाणक्य’

Amit shah life, amit shah biography

अमित शाह 22 अक्टूबर 1964 को मुंबई के एक संपन्न गुजराती परिवार में जन्मे थे। बीजेपी के अध्यक्ष की कमान संभालने के बाद उन्होने पार्टी की पूरी तस्वीर ही बदल कर रख दी है। तीन तलाक, कश्मीर से आर्टिकल 370 का रद्द होना ये कुछ ऐसे ऐतिहासिक फैसले हैं जिनको अमल करने के पीछे का मास्टरमाइंड शाह को ही माना जाता है। आश्चर्यजनक बात तो ये है कि राजनीति की ये अद्भुत कला उन्हें विरासत में नहीं मिली। लेकिन इसके बावजूद भी उन्होंने सही समय पर अचूक दांव खेल कर बड़े बड़े राजनीतिज्ञ के हौसले पस्त कर दिए है। तो आइये जानें सियासी अखाड़े के इस धुरंधर का बेहतरीन सफर।

ऐसा रहा बचपन

16 साल की उम्र तक शाह अपने पैतृक गांव गुजरात के मानसा में रहे और स्कूल की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वो अपने परिवार समेत अहमदाबाद शिफ्ट हो गए। उन्होंने अहमदाबाद से बायोकेमिस्ट्री में बीएससी करी है। इसके बाद युवावस्था में ही पारिवारिक जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने खुद को अपने पिता के प्लास्टिक के पाइप के कारोबार में व्यस्त कर लिया। वक़्त तेज़ी से आगे बढ़ा और शाह को स्टॉक मार्केट की ओर खींच लाया। जहां उन्होंने शेयर ब्रोकर के रूप में काम किया। लेकिन वक़्त को तो कुछ और ही मंजूर था। इसके बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और फिर वहीं हमेशा के लिए पैर जमा लिए।

कुछ यूं हुई पीएम मोदी से मुलाकात

साल 1980 में 16 साल की उम्र में वे RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) से जुड़ गए थे और ABVP (अखिल भारतीय विद्या परिषद्) के कार्यकर्ता के तौर पर उभरे थे। अपनी सीखने की ललक और कार्यक्षमता के चलते उन्हें मात्र दो साल में एबीवीपी की गुजरात इकाई का जॉइंट सेक्रेटरी बना दिया गया। साल 1986 में वे पीएम मोदी से मिले और यही मुलाकात दोनों की पक्की यारी में तब्दील हो गई।

चुनावों का संभाला जिम्मा

1987 में शाह ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की और बीजेपी की युवा इकाई भारतीय जनता युवा मोर्चा में शामिल हो गए। 1997 में उनकी BJYM के कोषाध्यक्ष के रूप में नियुक्ति की गई। और 1989 में वे बीजेपी अहमदाबाद शहर के सचिव बनाये गए। शाह को राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रचार प्रसार के लिए भी याद किया जाता है। उसी दौरान उनकी लाल कृष्ण आडवाणी से मुलाकात हुई थी। आडवाणी उस समय गुजरात के गांधीनगर से लोकसभा के चुनावी मैदान में उतरे थे। शाह ने उस समय चुनाव संयोजक की पहली बार भूमिका निभाई और 2009 तक लगातार उठाते रहे।

वित्त निगम ब्रोकर के पीछे क्या है? को घाटे से उबारा

1995 में शाह गुजरात प्रदेश वित्त निगम के अध्यक्ष बने। अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने न सिर्फ इसके मुनाफे में 214 प्रतिशत की वृद्धि की, बल्कि कार्यकाल के दौरान निगम को घाटे से बाहर भी उबारा। उनके अध्यक्ष रहते हुए पहली बार पत्ता खरीद फरोख्त, कार्यशील पूंजी अवधि लोन और ट्रक ऋण शुरुआत ब्रोकर के पीछे क्या है? की गई। 36 साल में शाह अहमदाबाद जिला सहकारी बैंक के युवा अध्यक्ष बने। यहां भी उन्होंने अपने पद की महत्वता कायम रखते अपनी पूरी तरीके से निभाई। और महज एक साल के भीतर 20.28 करोड़ का घाटा पूरा किया।

ऐसे बने पार्टी के फेवरेट

साल 1997 में पहली बार वो चुनावी लड़ाई में उतरे और सरखेज विधानसभा से बीजेपी प्रत्याशी के तौर पर विधायक पद के लिए नामांकन भरा। और भारी भरकम वोटों से विजयी हुए। और ये जीत का अंतर हर चुनाव में लगातार बढ़ता ही गया। उनकी अद्वितीय रणनीति के चलते उन्हें 2001 में बीजेपी की राष्ट्रीय सहकारिता प्रकोष्ठ का संयोजक नियुक्त किया गया। इस दौरान उनकी कार्यकुशलता को सबसे ज्यादा लाइमलाइट मिली जिसके चलते उन्हें पितामह की उपाधि मिल गई।

वर्तमान में है केंद्रीय ग्रहमंत्री की कमान

शाह की मेहनत और दृणता को देखते हुए बीजेपी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष से उन्हें इस साल केंद्रीय गृहमंत्री की कुर्सी पर बैठा दिया है। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भी अपने बेहतरीन नेतृत्व के चलते उन्होंने पार्टी को यूपी की 80 में से 71 सीटों पर जीत दिलवाई थी। ये कहना बिलकुल भी अतिश्योक्ति नहीं होगी कि 2019 में बीजेपी की सत्ता वापसी का कहीं न कहीं श्रेय अमित शाह को भी जाता है।

Ruchi Mehra

Ruchi Mehra

रूचि एक समर्पित लेखक है जो किसी भी विषय पर लिखना पसंद करती है। रूचि पॉलिटिक्स, एंटरटेनमेंट, हेल्थ, विदेश, राज्य की खबरों पर एक समान पकड़ रखती हैं। रूचि को वेब और टीवी का कुल मिलाकर 3 साल का अनुभव है। रुचि नेड्रिक न्यूज में बतौर लेखक काम करती है।

UP PF Scam : UPPCL के Ex MD एपी मिश्रा पूछताछ के बाद जेल भेजे गए, चार और ब्रोकर फर्मों के पते निकले फर्जी

UP PF Scam : UPPCL के Ex MD एपी मिश्रा पूछताछ के बाद जेल भेजे गए, चार और ब्रोकर फर्मों के पते निकले फर्जी

लखनऊ, जेएनएन। उत्तर प्रदेश में बिजली कर्मियों की भविष्य निधि की रकम लूटने में शामिल रहीं चार और ब्रोकर फर्मों के पते फर्जी पाए गए हैं। अब ईओडब्ल्यू की जांच के कदम जैसे-जैसे आगे बढ़ रहे हैं, पूरे प्रकरण में घोटाले के पीछे रची गई गहरी साजिश की कडिय़ां भी एक-एक कर खुलने लगी हैं।

पीएफ का पैसा जिन 14 ब्रोकर फर्मों के जरिये निजी कंपनी दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (डीएचएफएल) में निवेश किया गया था, उनमें पांच फर्मों के पते अब तक फर्जी निकले हैं। जिन पांच फर्मों के पते फर्जी पाए गए हैं, वे गाजियाबाद, मेरठ व दिल्ली के पतों पर रजिस्टर्ड थीं। अन्य नौ फर्मों की भी जांच कराई जा रही है।

प्रदेश में इस बड़े घोटाले की जांच कर रही ईओडब्ल्यू ने इस बीच पावर कारपोरेशन के पूर्व एमडी एपी मिश्र की पुलिस कस्टडी रिमांड अवधि पूरी होने पर उन्हें लखनऊ जेल में दाखिल करा दिया। ईओडब्ल्यू के अधिकारियों का कहना है कि जरूरत पडऩे पर एपी मिश्र को फिर पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेने की कार्रवाई की जाएगी। डीजी ईओडब्ल्यू डॉ.आरपी सिंह का कहना है कि एपी मिश्र, पूर्व निदेशक (वित्त) सुधांशु द्विवेदी व तत्कालीन सचिव ट्रस्ट पीके गुप्ता से पूछताछ में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की छानबीन कराई जा रही है। कुछ अहम तथ्य सामने आये हैं, जिन्हें तस्दीक भी कराया जा रहा है।

जांच एजेंसी ने अब सोमवार को डीएचएफएल के यूपी हेड को पूछताछ के लिए बुलाया है। उल्लेखनीय है कि ईओडब्ल्यू डीएचएफएल के एक पूर्व कर्मचारी से भी पूछताछ कर चुकी है। कंपनी में निवेश कराने के दौरान किन-किन लोगों की अहम भूमिका थी और किनके जरिये ब्रोकर कंपनियों से संपर्क साधा गया था। ईओडब्ल्यू ऐसे कई ब्रोकर के पीछे क्या है? बिंदुओं पर पड़ताल कर रही है। 14 फर्मों में 12 फर्में तो ऐसी हैं, जिन्होंने सिर्फ यूपीपीसीएल के लिए काम किया है। इन फर्मों से जुड़े सभी लोगों के ब्रोकर के पीछे क्या है? बारे में ब्योरा जुटाया गया है। ध्यान रहे, 4122.70 करोड़ के भविष्य निधि घोटाले के मामले में हजरतगंज कोतवाली में एफआइआर दर्ज कराई गई है।

प्रदेश शासन के निर्देश पर इस मुकदमे की विवेचना ईओडब्ल्यू कर रही है। ईओडब्ल्यू ने मामले में अब तक गिरफ्तार तीनों आरोपित अधिकारियों को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ की है। माना जा रहा है कि अब ईओडब्ल्यू पावर कारपोरेशन के तत्कालीन अध्यक्ष से भी जल्द पूछताछ करेगी।

अरविंद कुमार ने संभाला पदभार

प्रमुख सचिव ऊर्जा व अध्यक्ष पावर कारपोरेशन के पद पर अरविंद कुमार ने पदभार ग्रहण कर लिया है। पीएफ घोटाले के चलते राज्य सरकार पिछले दिनों पावर कारपोरेशन की एमडी अपर्णा यू और कारपोरेशन के अध्यक्ष आलोक कुमार को पद से हटा चुकी है। एम देवराज पहले ही एमडी का कार्यभार संभाल चुके हैैं। परिवहन से ऊर्जा विभाग में पहुंचे अरविंद कुमार प्रमुख सचिव गृह भी रह चुके हैैं।

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