नई दिल्ली: देश के कई बैंकों को 34615 करोड़ रुपए का चूना लगाने वाले दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड के वधावन बंधुओं ने धोखाधड़ी के लिए 87 सेल कंपनियां बनाई थी. सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन या सीबीआई ने हाल में फाइल चार्ज शीट में यह जानकारी दी है.

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इसके साथ ही दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड ने 2,60,000 फर्जी कर्ज धारकों के आंकड़े दिखाए. इसके साथ ही उन्होंने बैंक से ली गई उधारी की रकम में हेराफेरी करने के लिए वर्चुअल ब्रांच की स्थापना की थी. देश में बैंकिंग जगत के सबसे बड़े घोटाले में सामने आया यह खुलासा बहुत से लोगों की नींद उड़ाने के लिए काफी है.

Katni News: डाकघर के कैशियर ने लगाया सवा दो करोड़ का चूना, CBI ने शुरू की जांच, जानिए कैसे की इतने रुपयों की हेराफेरी

Katni News: खजांची ने आम बचतकर्ताओं के रुपए शेयर बाजार में लगाकर धोखाधड़ी और गबन किया. उसने सॉफ्टवेयर का उपयोग कर कटनी डाकघर को 2 करोड़ 19 लाख 75 हजार रुपए की चपत लगाई है.

By: अजय त्रिपाठी, जबलपुर | Updated at : 30 Apr 2022 11:29 AM (IST)

कटनी डाकघर में सवा दो करोड़ का गबन, सीबीआई ने दर्ज की एफआईआर

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मध्य प्रदेश के कटनी जिले के डाकघर में खजांची (Cashier) द्वारा सवा दो करोड़ रुपये के गबन के मामले में एफआईआर दर्ज की है. खजांची ने आम बचतकर्ताओं के रुपये शेयर बाजार में लगाकर धोखाधड़ी और गबन किया. उसने सॉफ्टवेयर का उपयोग कर कटनी डाकघर को 2 करोड़ 19 लाख 75 हजार रुपये की चपत लगाई है. कटनी डाकघर में इस घोटाले का खुलासा 17 दिसंबर 2021 को हुआ था.

जांच शुरू की गई
इस मामले की जांच प्रवर डाक अधीक्षक जबलपुर संभाग आरपीएस चौहान द्वारा की जा रही थी. विभागीय जांच के बाद मामले की शिकायत 22 अप्रैल को सीबीआई जबलपुर से की गई. सीबीआई ने मामले में 26 अप्रैल को डाकघर में पदस्थ रहे खजांची भट्टा मोहल्ला कटनी निवासी जावेद अख्तर के खिलाफ धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और छल करके दस्तावेजों में हेरफेर करने का मामला दर्ज कर जांच में शुरू कर दी है.

निलंबित हुआ है
कटनी प्रधान डाकघर में खजांची के पद पर जावेद अख्तर की पदस्थापना 1 फरवरी 2020 को हुई थी. उसने 17 दिसंबर 2021 तक लगभग दो साल की नौकरी में डाकघर को 2 करोड़ 19 लाख 75 हजार रुपये की चपत लगा दी. शुरुआती जांच में पता चला कि आरोपी ने पूरी रकम शेयर मार्केट में लगाई है. वर्तमान में वह निलंबित है. अब पांच महीने बाद सीबीआई को ये मामला सौंपा गया है.

क्या काम था जावेद का

-कटनी प्रधान डाकघर लेखांतर्गत उपडाकघरों को नकदी भेजना और प्राप्त करना.
-कटनी प्रधान डाकघर लेखांतर्गत शाखा डाकघरों को नकदी भेजना और प्राप्त करना.
-पोस्टमैनों के साथ नकदी लेन-देन.
-डाक टिकट और डाक स्टेशनरी के स्टॉक का रख-रखाव करना.

तीन साल में किया खेल
सीबीआई ने बताया कि जबलपुर डाक संभाग में कटनी और जबलपुर के सभी प्रधान, उप और शाखा डाकघर आते हैं. कटनी प्रधान डाकघर में अलग-अलग शाखाएं हैं. कटनी प्रधान डाकघर के अंतर्गत वित्तीय लेनदेन के लिए खजाना शाखा में करीब दो वर्ष पूर्व जावेद अख्तर को पदस्थ किया गया था. वह एक फरवरी 2020 तक वहां पदस्थ रहा. इस दौरान उसने दो करोड़ 19 लाख 75 हजार रुपये की शासकीय राशि का गबन कर लिया.

तीन तरीकों से किया गबन
अख्तर ने तीन अलग-अलग तरीकों से राशि का गबन किया. एक करोड़ 73 लाख 70 हजार रुपये का गबन पहले तरीके से 30 जून, 2020 से 19 दिसबर, 2021 के बीच कुल 234 बार में किया. दूसरा तरीका अपनाकर उसने 7 नवंबर, 2021 से 15 दिसंबर तक कुल 14 बार में 18 लाख 55 हजार रुपये और 26 अगस्त, 2021 से 13 दिसंबर, 2021 तक तीसरे तरीके से छह बार में 27 लाख 50 हजार रुपये की राशि का गबन किया.

कैसे की हेराफेरी
जानकारी के मुताबिक ट्रेजरी डाक सहायक जावेद अख्तर ने SAP सॉफ्टवेयर मॉड्यूल में सभी कार्य किए थे. इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से T-CODEZFFV50 का उपयोग करते हुए नकदी भेजा जाता है. जावेद नकदी भेजने के बाद उसी तारीख को संबंधित शाखा डाकघर से प्राप्त दिखाकर T-CODEFB01 का उपयोग करते हुए उसी शाखा के डाकघर के प्रॉफिट सेंटर के पीओएसबी भुगतान के जीएल में भेजी गई रकम का भुगतान दर्शा कर समायोजन दिखा देता था. इस तरह उसने 1 करोड़ 73 लाख 70 हजार रुपये का गबन किया.

जावेद इसके अलावा कटनी प्रधान डाकघर के प्रॉफिट सेंटर स्थित डीओपी कैश से शाखा डाकघर के प्रॉफिट सेंटर में नकदी भेजना बताता और उसी दिन संबंधित शाखा डाकघर के प्रॉफिट सेंटर में T-CODEFB01 के माध्यम से स्वयं के यूजर आईडी क्रमांक 10087826 का उपयोग कर सीधे एसबी निकासी के जीएल में रकम पोस्ट कर देता था. इस समायोजन से उसने 18 लाख 55 हजार रुपये का गबन किया.

जावेद अख्तर विभिन्न तारीखों में कटनी प्रधान डाकघर से एसएपी सॉफ्टवेयर के माध्यम से डीओपी कैश से कर आहरित करता था. उसी दिन पीओएस बैक आफिस कैश से पीओएसबी भुगतान कर समायोजन दर्शा देता था. इस तरह उसने 27 लाख 50 हजार रुपये का गबन किया.

Published at : 30 Apr 2022 11:29 AM (IST) Tags: CBI Madhya Pradesh jabalpur katni हिंदी समाचार, ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें abp News पर। सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट एबीपी न्यूज़ पर पढ़ें बॉलीवुड, खेल जगत, कोरोना Vaccine से जुड़ी ख़बरें। For more related stories, follow: News in Hindi

मुकेश अंबानी और रिलायंस पर SEBI की बड़ी कार्रवाई, शेयर कारोबार में हेराफेरी पर ठोका जुर्माना

बिजनेस डेस्कः भारत के सबसे अमीर शख्स और रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक मुकेश अंबानी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। कुछ दिन पहले ही मुकेश अंबानी दुनिया के पहले सबसे अमीर शख्स के खिताब से एक पायदान नीचे खिसक कर दूसरे नंबर पर पहुंच गए हैं। अभी इस मामले को कुछ दिन ही गुजरे हैं कि अंबानी के लिए एक दूसरी बुरी खबर आ गई है। शुक्रवार को शेयर मार्केट नियामक सेबी ने शेयर की हेराफेरी के मामले में रिलायंस और मुकेश अंबानी पर तगड़ा जुर्माना लगाया है। उनके अलावा दो अन्य इकाइयों पर भी सेबी ने जुर्माना लगाया है।

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किस पर कितना जुर्माना?
सेबी ने मुकेश अंबानी पर 15 करोड़ रुपए, जबकि मुकेश अंबनी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज पर 25 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है यानी मुकेश अंबानी को 40 करोड़ रुपए का फटका लगा है। उनके अलावा नवी मुंबई सेज प्राइवेट लिमिटेड पर 20 करोड़ रुपए और मुंबई सेट लिमिटेड पर भी शेयर बाजार में हेराफेरी का मामला 10 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया है। सेबी ने आरोप लगाया है कि आरआईएल ने आईपीएल के शेयरों की ट्रेडिंग में गड़बड़ी की थी।

क्या है मामला?
ये मामला नवंबर 2007 का है, जो रिलायंस पेट्रोलियम लिमिटेड यानी आरपीएल के शेयरों की फ्यूचर एंड ऑप्शन सेक्शन में ट्रेडिंग से जुड़ा है। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड शेयर बाजार में हेराफेरी का मामला यानी आरआईएल ने मार्च 2007 में आरपीएल में 4.1 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया था। हालांकि, बाद में 2009 में रिलायंस इंडस्ट्रीज की इस सब्सिडियरी कंपनी का रिलायंस इंडस्ट्रीज में ही विलय हो गया।

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कैसे हुई गड़बड़ी?
सेबी का आरोप है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज ने आरपीएल में अपनी करीब 4.1 फीसदी हिस्सेदारी बेचने में गड़बड़ी की है। पहले रिलायंस की तरफ से डील कर रही कुछ पार्टियों ने आरपीएल फ्यूचर्स को खरीद लिया। इसके चलते जब रिलायंस की तरफ से आरपीएल में अपनी हिस्सेदारी बेची गई तो कंपनी को फायदा हुआ, क्योंकि आरपीएल फ्यूचर्स खरीदे जाने की वजह से फ्यूचर एंड ऑप्शन सेगमेंट में आरपीएल की सेटलमेंट की कीमत कम हो गई।

इस बात से अनजान थे निवेशक
सेबी अधिकारी बी जे दिलीप ने अपने 95 पन्नों के अपने आदेश में कहा कि सिक्योरिटीज की मात्रा या कीमत में कोई भी गड़बड़ी हमेशा बाजार में निवेशकों के विश्वास को चोट पहुंचाती है और वो बाजार में हुई हेराफरी में सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में आम निवेशक इस बात से अनजान थे कि फ्यूचर एंड ऑप्शन सेक्शन में सौदे के पीछे रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

रिलायंस ने नहीं दी कोई प्रतिक्रिया
सुनवाई अधिकारी ने कहा कि कारोबार में गड़बडी से सही कीमत बाहर नहीं आती। उन्होंने कहा कि मेरा विचार है कि गड़बड़ी किये जाने वाले ऐसे कामों को सख्ती से निपटा जाना चाहिए ताकि पूंजी बाजार में इस प्रकार की गतिविधियों को रोका जा सके। इस बारे में फिलहाल आरआईएल से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। उम्मीद है कि जल्द ही रिलायंस इस पर अपना पक्ष रखेगा।

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ICICI रियल एस्टेट फंड, आम्रपाली ने मिलकर की फंड की हेराफेरी

आम्रपाली मामले में इस सप्ताह ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने नामी वैश्विक व घरेलू कॉरपोरेट कंपनियों समेत मामले में शामिल लोगों के खिलाफ तीखी टिप्पणी की। शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रमुख.

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आम्रपाली मामले में इस सप्ताह ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने नामी वैश्विक व घरेलू कॉरपोरेट कंपनियों समेत मामले में शामिल लोगों के खिलाफ तीखी टिप्पणी की। शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रमुख कंपनियों में आईसीआईसीआई रियल एस्टेट फंड ने अम्रपाली समूह की मिलीभगत से फंड की हेराफेरी की।

रियल्टी फर्म की फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट का जिक्र करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल रियल एस्टेट ने वित्त वर्ष 2011-12 के दौरान करीब 74 करोड़ रुपये की राशि आम्रपाली सैफायर डेवलपर्स प्राइवेंट लिमिटेड द्वारा जारी ऋणपत्र खाते में दिया।

ऋणपत्र पर सालाना 17 फीसदी की ब्याज दर तय की गई थी। फॉरेंसिक ऑडिट में 16 दिसंबर 2010 की तिथि को किए गए निवेशक सह अंशधारक करार में ग्रॉस नॉन-कंप्लायंस पाया गया। निदेशकों की नियुक्ति नहीं की गई थी, निवेशक के संयुक्त हस्ताक्षर से बैंक खाते का संचालन नहीं किया गया था।

निवेश सह अंशधारक करार और 3,420 रुपये प्रति वर्ग फुट की ब्रिकी योग्य एरिया से कम के फ्लैट की बिक्री के अनुसार, फंड का इस्तेमाल नहीं किया गया था।आदेश में कहा गया कि करार के कई अन्य उपबंधों का न तो अनुपालन किया गया था और न ही उनका उपयोग निवेशक द्वारा सुनिश्चित किया गया था।

DHFL Scam: पैसे की हेरा-फेरी के लिए वधावन बंधुओं ने बनाई थी 87 शेल कंपनी, जान-बूझकर बैंकों को लगाया 34615 करोड़ का चूना

दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड ने बैंक से लिए गए कर्ज को सही दिखाने के लिए 2,60,000 फर्जी कर्ज धारकों के आंकड़े दिखाए.

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नई दिल्ली: देश के कई बैंकों को 34615 करोड़ रुपए का चूना लगाने वाले दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड के वधावन बंधुओं ने धोखाधड़ी के लिए 87 सेल कंपनियां बनाई थी. सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन या सीबीआई ने हाल में फाइल चार्ज शीट में यह जानकारी दी है.

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सीबीआई की चार्जशीट में कहा गया है कि कपिल और धीरज वधावन ने बैंकों से लिए गए रकम को दूसरे काम में लगाया और ₹63 करोड़ की 24 पेंटिंग भी खरीदी है. सीबीआई की एक विशेष अदालत दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड के 34615 करोड़ रुपए के बैंक घोटाले की जांच कर रही है.

इससे पहले जुलाई में सीबीआई की विशेष अदालत ने डीएचएफएल के पूर्व प्रबंध निदेशक कपिल वधावन और धीरज वधावन को सीबीआई को रिमांड पर सौंपा था. डीएचएफएल के लोन घोटाले के मामले में अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा शकील के सहयोगी अजय महावर को भी लपेटे में लिया गया था.

सीबीआई ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले 17 बैंकों के संघ की शिकायत पर कपिल वधावन और धीरज वधावन सहित कई लोगों पर केस दर्ज किया था. बैंकों के संघ ने डीएचएफएल को साल 2010-2018 के बीच 42,871 करोड़ रुपये का लोन दिया था.

बैंकों ने आरोप लगाया है कि वधावन बंधुओं ने आपराधिक साजिश के तहत तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया और छुपाया. डीएचएफ़एल के वधावन बंधुओं पर आपराधिक विश्वासघात और मई 2019 से ऋण अदायगी में चूक करके 34,615 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने के लिए सार्वजनिक धन का दुरुपयोग का भी आरोप है.

सीबीआई अधिकारी के मुताबिक अजय के घर से जो चीजें मिलीं, उन्‍हें बैंकों से लिए गए लोन के पैसे से खरीदा गया था. अभी मामले की जांच चल रही है और एजेंसी बैंकों से मिले पैसे के निवेश के बारे में पता लगा रही है. पिछले 8 जुलाई को ही सीबीआई ने महाबलेश्‍वर में रेबेका दीवान के घर दीवान विला की भी तलाशी ली थी. वहां से बड़ी मात्रा में पेंटिंग्‍स, स्‍क्‍लप्‍चर, नकदी और कुछ महत्‍वपूर्ण दस्‍तावेज मिले थे.

Aadhaar Ventures ने फर्जी घोषणाएं कर बढ़ाए थे शेयरों के भाव, सेबी ने लगाया 25 लाख का जुर्माना, समझें पूरा मामला

कंपनी ने झूठी कॉर्पोरेट अनाउंसमेंट की थी.

एवीआईएल (AVIL) ने अगस्‍त 2014 में अफ्रीका में एक कंपनी का अधिग्रहण करने और सिंगापुर में एक सब्सिडियरी स्‍थापित करने की . अधिक पढ़ें

  • News18Hindi
  • Last Updated : August 30, 2022, 11:20 IST

हाइलाइट्स

एवीआईएल ने अगस्‍त 2014 में दो कंपनियोंं के बार में झूठी घोषणा की थी.
ये घोषणाएं केवल कंपनी के शेयर के मूल्‍य को प्रभावित करने के लिए की गई थीं.
सेबी ने जांच में इस गड़बड़ी को सही पाया और कंपनी व निदेशकों पर जुर्माना लगाया है.

नई दिल्‍ली. भारतीय प्रतिभूति एंव विनियम बोर्ड (SEBI) ने आधार वेंचर्स इंडिया लिमिटेड (Aadhaar Ventures India Ltd-AVIL) और इसके निदेशकों पर इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों का उल्‍लंघन करने व लिस्टिंग कंडिशन्‍स का पालन नहीं करने पर 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. कंपनी और उसके निदेशकों ने कंपनी के शेयर मूल्‍य को प्रभावित करने के लिए झूठी कॉर्पोरेट अनाउसमेंट की थी. एवीआईएल ने अगस्‍त 2014 में अफ्रीका में एक कंपनी का अधिग्रहण करने और सिंगापुर में एक सब्सिडियरी स्‍थापित करने की घोषणा की थी. हालांकि, धरातल पर ऐसा किया नहीं गया. ये घोषणाएं केवल कंपनी के शेयर के मूल्‍य को प्रभावित करने के लिए की गई थीं. सेबी ने अपनी जांच में इस गड़बड़ी को सही पाया और अब कंपनी व निदेशकों पर जुर्माना लगाया है.

इनको भरना होगा जुर्माना
सेबी ने एक्‍सचेंजों को सही जानकारी न देने पर 10 लाख रुपये का जुर्माना आधार वेंचर्स लिमिटेड, इसके निदेशकों जिल्‍स रायचंद मदान, सोमभाई सुंदरभाई मीणा और ज्‍योति मुनव्‍वर पर लगाया है. इसे संयुक्‍त रूप से भरना होगा. यही नहीं सेबी ने मीणा और आधार वेंचर्स पर इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों का उल्‍लंघन करने पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. मुनव्‍वर पर कंपनी के अनुपालन अधिकारी होने पर जरूरी जानकारियां एक्‍सचेंजों के साथ शेयर न करने पर 5 लाख शेयर बाजार में हेराफेरी का मामला रुपये का जुर्माना लगाया गया है.

यह था मामला
सेबी ने एवीआईएल के शेयरों के मूल्‍य में हेराफेरी करने की जांच शुरू की. शुरुआती जांच में सामने आया कि कंपनी ने अगस्‍त 2014 में अफ्रीका में एक कंपनी का अधिग्रहण करने और सिंगापुर में एक सब्सिडियरी स्‍थापित करने की घोषणा की थी. लेकिन, वास्‍तव में ऐसा उसने किया नहीं था. इसके बाद सेबी ने जुलाई से सितंबर 2014 तक इस मामले की गहन जांच की. सेबी की जांच में सामने आया कि कंपनी ने दोनों ही घोषणाएं कंपनी के शेयर के मूल्‍य को प्रभावित करने के लिए की थी. एवीआईएल की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार भी कंपनी द्वारा की गई घोषणाएं अमल में नहीं लाई गई थीं.

बार-बार मांगने पर भी कंपनी ने नहीं दी जानकारी
जब बीएसई ने एवीआईएल से अपनी घोषणाओं के संबंध में जानकारियां देने को कहा तो कंपनी इस संबंध में कोई भी जानकारी देने में असफल रही. सेबी ने अपने आदेश में कहा है कि, “इस जानकारी का कंपनी के प्रदर्शन पर प्रभाव पड़ा है और इस तरह की मूल्य-संवेदनशील जानकारी स्टॉक एक्सचेंज को निरंतर और तत्काल आधार पर देने के लिए फर्म उत्तरदायी है. लेकिन कंपनी ऐसा करने में असफल रही है इस तरह एवीआईएल, मदन, मीना और मुनवर ने स्टॉक एक्सचेंज को जानकारी न देकर डिस्‍क्‍लोजर नियमों का उल्‍लंघन किया.”

ज्‍योति मुनव्‍वर एवीआईएल का अनुपालन अधिकारी है. कंपनी की ओर से समय पर और निरंतर डिस्‍क्‍लोजर रिक्‍वायरमेंट्स सुनिश्चित करना उसकी जिम्‍मेदारी थी. परंतु मुनव्‍वर ने ऐसा नहीं किया और उसने इनसाइडर ट्रेडिंग निषेध नियमों का उल्‍लंघन किया. सेबी ने अपने आदेश में यह भी कहा कि एवीआईएल ने दो बार नियमों का उल्‍लंघन किया है. इसलिए कंपनी ने एवीआईएल पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया.

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