नई दिल्ली, 15 सितम्बर (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने बुधवार को ईवीएस जैसे अक्षय और पर्यावरण के अनुकूल ऑटोमोबाइल को बढ़ावा देने के लिए एक पीएलआई योजना को मंजूरी दी।

पहली बार भारतीयों की बचत का आधे से ज्यादा हिस्सा शेयर, बीमा और म्यूचुअल फंड जैसे वित्तीय उत्पादों में

देश की कुल बचत में घरेलू बचत की दो-तिहाई से अधिक हिस्सेदारी होती है। परंपरागत रूप से हम भारतीय रियल एस्टेट सोना और बैंक फिक्स डिपॉजिट में अपनी बचत को सुरक्षित रखते आए हैं लेकिन अब यह ट्रेंड बदलने लगा है।

स्कन्द विवेक धर, नई दिल्ली। देश की घरेलू बचत का ट्रेंड बदल रहा है। एफडी, सोना और रियल एस्टेट जैसे साधनों की लोकप्रियता में कमी आ रही है। शेयर, बीमा और म्यूचुअल फंड जैसे वित्तीय उत्पादों में रुझान बढ़ रहा है। पिछले साल पहली बार हमारी बचत का आधे से ज्यादा वित्तीय उत्पादों में गया। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की हालिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।

क्रिसिल की “The big shift in financialisation” रिपोर्ट के मुताबिक, देश की कुल बचत में घरेलू बचत की दो-तिहाई से अधिक हिस्सेदारी होती है। कोरोनाकाल यानी वित्त वर्ष 2020-21 में तो यह अनुपात 78.5% तक पहुंच गया था। परंपरागत रूप से हम भारतीय रियल एस्टेट, सोना और बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट में अपनी बचत को सुरक्षित रखते आए हैं, लेकिन अब यह ट्रेंड बदलने लगा है। पिछले कुछ वर्षों में भौतिक परिसंपत्तियों में बचत के निवेश के अनुपात में कमी आ रही है और वित्तीय उत्पादों में निवेश का अनुपात बढ़ रहा है। इसके चलते, वित्त वर्ष 2021-22 में पहली बार हमारी कुल घरेलू बचत का आधे से ज्यादा (52.5%) हिस्सा वित्तीय उत्पाद में निवेश हुआ।

बचाव दल ने 10 घंटे तक चलाया अभियान

आनंद राठी शेयर और स्टॉक ब्रोकर्स की कॉर्पोरेट रणनीति की प्रमुख तन्वी कंचन कहती हैं, अपनी बचत को भौतिक संपत्तियों में लगाने नए निवेशकों के लिए तीन रणनीतियों के बाद भारतीय निवेशक एक लंबा सफर तय कर चुके हैं। साल 1950-51 में, घरेलू बचत का लगभग 9% हिस्सा ही वित्तीय संपत्तियों में लगाया गया था, बाकी सभी भौतिक संपत्तियों में था।

कंचन के मुताबिक, भारत ने अपने डिजिटल स्पेस में भारी बदलाव देखा है। इसमें नए प्लेयर आ रहे हैं और खुदरा निवेशकों के लिए वित्तीय उत्पादों की पहुंच को आसान बना रहे हैं। वित्तीय समावेशन, डिजिटलीकरण, मध्यम वर्ग की डिस्पोजबल इनकम में वृद्धि और सरकारी प्रोत्साहनों ने वित्तीय साधनों को प्रसारित करने में बड़ी भूमिका निभाई है।

घरेलू बचत के दम पर ही म्यूचुअल फंड उद्योग ने नवंबर 2022 में पहली बार 40 लाख करोड़ रुपए का आंकड़ा पार कर लिया। इंडस्ट्री को 20 लाख करोड़ से 40 लाख करोड़ का सफर करने में सिर्फ पांच साल का समय लगा। इससे पहले के 20 लाख करोड़ के सफर में तीन दशक से अधिक का समय लगा था।

म्यूचुअल फंड हमेशा लोगों की नजरों में रहते हैं, लेकिन भारतीयों का सबसे अधिक धन जिस वित्तीय उत्पाद में लगा है वह जीवन बीमा है। जीवन बीमा उद्योग 52 लाख करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति (एयूएम) का प्रबंधन करता है। यह कुल वित्तीय उद्योग संपत्ति का 39% है। म्यूचुअल फंड 28.4% के साथ दूसरे स्थान पर है।

क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, एक दशक पहले सरकार की ओर से शुरू की गई राष्ट्रीय पेंशन स्कीम (एनपीएस) सभी के लिए खुली है। इसमें आकर्षक रिटर्न के साथ-साथ टैक्स ब्रेक जैसे प्रोत्साहनों के चलते एनपीएस के तहत परिसंपत्ति बढ़कर 7.36 लाख करोड़ रुपये हो गई। इसके भीतर, निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़कर पांच साल पहले के 12% की तुलना में अब बढ़कर 20% हो गई है।

विशेषज्ञों की मानें तो वित्तीय साधनों में निवेश का अनुपात अब बढ़ता ही जाएगा। कंचन कहती हैं, निवेशक यह महसूस कर रहे हैं कि भौतिक संपत्ति में निवेश से महंगाई का मुकाबला नहीं किया जा सकता। भारतीय परिवार बैंक एफडी पर मिलने वाले रिटर्न से ज्यादा रिटर्न की चाह रख रहे हैं। यह वित्तीय संपत्तियों में निवेश से ही हासिल हो सकती है। इसके अलावा, पारदर्शिता, अधिक तरलता और टैक्स इफेक्टिव होने के चलते भी वित्तीय उत्पादों की मांग बढ़ेगी।

संगठित क्षेत्र के लिए पारंपरिक सामाजिक सुरक्षा कवर कर्मचारी भविष्य निधि (पीएफ) में निवेश पांच साल में 12 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 25 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया है। अर्थव्यवस्था में संगठित क्षेत्र की बढ़ती हिस्सेदारी से एनपीएस और पीएफ खातों की संख्या में और बढ़ोतरी होना तय है।

क्रिसिल मार्केट इंटेलिजेंस एंड एनालिटिक्स के प्रमुख आशीष वोरा कहते हैं, पिछले वित्त वर्ष फंड प्रबंधन इंडस्ट्री का एयूएम भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 57% था। अगले पांच वर्षों में यह 74% तक हो जाएगा। विकसित देशों से तुलना करें तो इस इंडस्ट्री में पांच साल में आई इस तेजी के बाद भी बहुत संभावनाएं बची हुई हैं।

वेल्थ मैनेजमेंट कंपनी ऐम्प्लिफाई कैपिटल्स के मैनेजिंग पार्टनर अभिषेक भट्ट कहते हैं, घरेलू बचत के वित्तीयकरण का फायदा हम पहले ही देख चुके हैं। इस साल विदेशी निवेशकों की जोरदार बिकवाली के बावजूद बाजार स्थिर रहे, यह रिटेल निवेशक और म्यूचुअल फंड्स में लगे घरेलू बचत के पैसों का परिणाम था। अभिषेक इस ट्रेंड में छुपे एक जोखिम को लेकर भी आगाह करते हुए कहते हैं, इतनी बड़ी राशि में निवेश इक्विटी एसेट को अनुचित वैल्यूएशन पर ले जा सकता है, जिससे पूंजी फंसने का खतरा भी बन सकता है। यह अर्थव्यवस्था के लिए भी ठीक नहीं होगा। इन खतरों से बचने के लिए हमें वेल्थ मैनेजमेंट की कौशल रखने वाले लोगाें की जरूरत होगी।

क्रिसिल की रिपोर्ट भी कहती है, हमें यह विश्वास करने के लिए बहुत सारे नए निवेशकों के लिए तीन रणनीतियों कारण मिलते हैं कि आने वाले वर्षों में फंड प्रबंधन उद्योग द्वारा पेश किए जाने वाले उत्पादों और सेवाओं में तेजी से वृद्धि होगी। लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करेगा कि प्रमुख प्लेयर किस तरह से आगे बढ़ते हैं और चुनौतियों से कैसे निपटते हैं।

नए निवेशकों के लिए तीन रणनीतियों

Hit enter to search or ESC to close

निवेश में बढ़ोतरी और रोजगार के अवसर पैदा करेगी ऑटो क्षेत्र के लिए पीएलआई योजना

निवेश में बढ़ोतरी और रोजगार के अवसर पैदा करेगी ऑटो क्षेत्र के लिए पीएलआई योजना

नई दिल्ली, 15 सितम्बर (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने बुधवार को ईवीएस जैसे अक्षय और पर्यावरण के अनुकूल ऑटोमोबाइल को बढ़ावा देने के लिए एक पीएलआई योजना को मंजूरी दी।

आत्मनिर्भर भारत के विजन की दिशा में कदम बढ़ाते हुए केंद्र ने 26,058 करोड़ रुपये के बजटीय परिव्यय के साथ ऑटोमोबाइल उद्योग और ड्रोन उद्योग के लिए पीएलआई योजना को मंजूरी दी है। ऑटो क्षेत्र के लिए पीएलआई योजना उच्च मूल्य के उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी वाहनों और उत्पादों को प्रोत्साहित करेगी। यह उच्च प्रौद्योगिकी, अधिक कुशल और हरित ऑटोमोटिव निर्माण में एक नए युग की शुरूआत करेगा।

ऑटोमोबाइल उद्योग और ड्रोन उद्योग के लिए पीएलआई योजना केंद्रीय बजट 2021-22 के दौरान 1.97 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ पहले किए गए 13 क्षेत्रों के लिए पीएलआई योजनाओं की समग्र घोषणा का हिस्सा है। 13 क्षेत्रों के लिए पीएलआई योजनाओं की घोषणा के साथ, भारत में न्यूनतम अतिरिक्त उत्पादन 5 वर्षों में लगभग 37.5 लाख करोड़ होने की उम्मीद है और 5 वर्षों में न्यूनतम अपेक्षित अतिरिक्त रोजगार लगभग 1 करोड़ है।

ऑटो क्षेत्र के लिए पीएलआई योजना में भारत में उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी उत्पादों के निर्माण के लिए उद्योग की लागत अक्षमताओं को दूर करने की परिकल्पना की गई है। प्रोत्साहन संरचना उद्योग को उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी उत्पादों की स्वदेशी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लिए नए निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करेगी।

यह अनुमान है कि पांच वर्षों की अवधि में, ऑटोमोबाइल और ऑटो घटक उद्योग के लिए पीएलआई योजना से 42,500 करोड़ रुपये से अधिक का नया निवेश होगा, 2.3 लाख करोड़ रुपये से अधिक का वृद्धिशील उत्पादन होगा और 7.5 लाख से अधिक नौकरियों के अतिरिक्त रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इसके अलावा इससे वैश्विक ऑटोमोटिव व्यापार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ेगी।

ऑटो क्षेत्र के लिए पीएलआई योजना मौजूदा ऑटोमोटिव कंपनियों के साथ-साथ नए निवेशकों के लिए खुली है, जो वर्तमान में ऑटोमोबाइल या ऑटो घटक विनिर्माण व्यवसाय में नहीं हैं। इस योजना के दो घटक हैं अर्थात चैंपियन ओईएम प्रोत्साहन योजना और घटक चैंपियन प्रोत्साहन योजना। चैंपियन ओईएम प्रोत्साहन योजना एक बिक्री मूल्य संबंद्ध स्कीम है, जो सभी सेगमेंट के बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों और हाइड्रोजन ईंधन सेल वाहनों पर लागू होती है। घटक चैंपियन प्रोत्साहन योजना एक बिक्री मूल्य संबंद्ध स्कीम है, जो वाहनों के उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी घटकों, कंप्लीटली नॉक्ड डाउन (सीकेडी)/सेमी नॉक्ड डाउन (एसकेडी) किट, दुपहिया, तिपहिया, यात्री वाहनों के एग्रीगेट्स, वाणिज्यिक वाहन और ट्रैक्टर आदि पर लागू होती है।

ऑटोमोटिव क्षेत्र के लिए यह पीएलआई योजना उन्नत केमिस्ट्री सेल (18,100 करोड़) और इलेक्ट्रिक वाहनों के विनिर्माण का तीव्र अंगीकरण (10,000 करोड़) के लिए पहले से शुरू की गई पीएलआई योजना के साथ-साथ भारत को ऑटोमोबाइल परिवहन प्रणाली आधारित पारंपरिक जीवाश्म ईंधन के स्थान पर पर्यावरण की ²ष्टि से स्वच्छ, टिकाऊ, उन्नत और अधिक कुशल इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) आधारित प्रणाली के प्रयोग में सक्षम बनाएगी।

ड्रोन और ड्रोन घटक उद्योग के लिए पीएलआई योजना इस क्रांतिकारी तकनीक के रणनीतिक, सामरिक और परिचालन उपयोगों का समाधान करती है। स्पष्ट राजस्व लक्ष्य के साथ ड्रोन के लिए उत्पाद विशिष्ट पीएलआई योजना और घरेलू मूल्यवर्धन पर ध्यान केंद्रित करना क्षमता निर्माण और भारत की विकास रणनीति के इन प्रमुख चालकों को बनाने की कुंजी है।

ड्रोन और ड्रोन घटक उद्योग के लिए पीएलआई, तीन साल की अवधि में 5,000 करोड़ के निवेश को बढ़ावा देगा, 1500 करोड़ की योग्य बिक्री में वृद्धि करेगा नए निवेशकों के लिए तीन रणनीतियों और लगभग 10,000 नौकरियों के साथ अतिरिक्त रोजगार पैदा करेगा।

हमारे टेलीग्राम ग्रुप को ज्‍वाइन करने के लि‍ये यहां क्‍लि‍क करें, साथ ही लेटेस्‍ट हि‍न्‍दी खबर और वाराणसी से जुड़ी जानकारी के लि‍ये हमारा ऐप डाउनलोड करने के लि‍ये यहां क्लिक करें।

नए निवेशकों के लिए तीन रणनीतियों

टाटा ग्रुप की कंपनियों पर क्या हो निवेशकों की रणनीति

नई दिल्ली: टाटा बोर्ड बैठक की बैठक में चेयरमैन साइरस मिस्त्री को हटाए जाने के बाद टाटा ग्रुप की कंपनियों में भारी गिरावट देखने को मिली। गिरावट कितनी तीखी थी इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि पिछले दो दिनों में टाटा ग्रुप की टॉप 5 कंपनियों में निवेशकों को 19400 करोड़ रुपए का चूना लगा जबकि टाटा ग्रुप की कुल 17 कंपनियां भारतीय शेयर बाजार में लिस्टेड हैं। इतने नुकसान के बाद भी टाटा और साइरस के बीच का यह विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। निकाने जाने के बाद साइरस ने यह बयान दिया कि ग्रुप की तमाम कंपनियां दिक्कत में हैं और इसकी वजह से कंपनी को 1800 करोड़ डॉलर का नुकसान हो सकता है। इसके बाद गुरूवार के सत्र में भी टाटा ग्रुप की कंपनियों के शेयर सबसे ज्यादा गिरावट वाले शेयरों की सूची में नजर आए। अब ऐसे में निवेशकों के सामने सवाल यह खड़ा होता है कि क्या बढ़ते विवाद के साथ शेयरों की यह गिरावट और गहराएगी या यह गिरावट नए निवेशकों के लिए तीन रणनीतियों खरीदारी का एक अच्छा मौका है जिसका फायदा निवेशकों को उठाना चाहिए?

बाजार के विशेषज्ञों के बीच इस मुद्दे पर मतभेद हैं। कुछ एक्सपर्ट ऐसा मान रहे हैं कि विवाद के पूरी तरह शांत हो जाने के बाद ही निवेशकों को कोई खरीदारी करनी चाहिए। वहीं कुछ एक्सपर्ट यह मान रहे हैं कि टाटा ग्रुप की कंपनियों में यह गिरावट इस घटना का एक रिएक्शन हैं और फंडामेंटल तौर पर मजबूत शेयरों में आई गिरावट खरीदारी का एक मौका है।

विशेषज्ञों का नजरिया

वीएम फाइनेंनशियल के फंड मैनेजर विवेक मित्तल के मुताबिक निवेशकों को टाटा ग्रुप की किसी भी कंपनी में फिलहाल निवेश से बचना चाहिए। निवेश के अच्छे मौके निवेशकों को आगे मिलेंगे। विवेक के मुताबिक टाटा ग्रुप की कंपनियों में तीखी गिरावट के साथ साथ रिजल्ट सीजन की वजह से बाजार में उठल पुथल है। ऐसे में बाजार में एक साफ दिशा का संकेत मिलने और टाटा ग्रुप के भीतर यह उठलपुथल न थम जाने तक निवेशकों को लंबी अवधि के लिए कोई भी सौदे बनाने से बचना चाहिए।

फिनेथिक वेल्थ सर्विसेज के फंडामेंटल एनालिस्ट विवेक कुमार नेगी का मानना है कि टाटा ग्रुप की कंपनियों में यह गिरावट लंबे समय तक नहीं चलेगी। मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में हर गिरावट पर खरीदारी की जा सकती है। विवेक के मुताबिक टाटा मोटर्स और टीसीएस में अभी निवेशकों को कोई नयी खरीदारी करने से बचना चाहिए। वहीं टाटा स्पॉन्ज लंबी अवधि के लिए एक अच्छा शेयर मान रहे हैं।

मिंट डायरेक्ट के रिसर्च हेड अविनाश गोरक्षकर का मानना है कि साइरस मिस्त्री का टाटा ग्रुप से इस तरह जाना निश्चित तौर पर एक नकारात्मक घटनाक्रम है। लेकिन रतन टाटा जिस तरह कंपनी में वापस आए हैं उसे बाजार निश्चित तौर पर सकारात्मक लेगा। अविनाश के मुताबिक बाजार में पेनिक की स्थिति साइस मिस्त्री के बयान और सेबी और एक्सचेंज के हरकत में आने की वजह से देखने को मिल रही है। ऐसे में निवेशक अगर टाटा ग्रुप की कंपनियों में लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं तो उठलपुथल थमने का इंतजार करना चाहिए।

मेयर के अधिकारों में कटौती के खिलाफ याचिका पर सुनवाई तीन दिसंबर को

रांची। प्रमुख संवाददाता नगर पालिका के अध्यक्ष और नगर निगम के मेयरों के अधिकारों.

मेयर के अधिकारों में कटौती के खिलाफ याचिका पर सुनवाई तीन दिसंबर को

रांची। प्रमुख संवाददाता

नगर पालिका के अध्यक्ष और नगर निगम के मेयरों के अधिकारों में कटौती के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर तीन दिसंबर को सुनवाई होगी। प्रार्थी की ओर से अदालत से इस मामले पर जल्द सुनवाई का आग्रह किया गया था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया और सुनवाई के लिए तीन दिसंबर की तिथि निर्धारित की।

प्रार्थी संजय कुमार की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि महाधिवक्ता की ओर से की गई गलत व्याख्या को कानून के रूप में मान्यता देते हुए राज्य सरकार ऐसा निर्देश जारी नहीं कर सकती है, जिसमें मेयर के अधिकार को कम किया जा सके। महाधिवक्ता की ओर से नगरपालिका अधिनियम एवं संविधान में निहित प्रविधानों की अनदेखी एवं गलत व्याख्या की गई है। इस वजह से मेयर का अधिकार नगण्य हो गया है और एजेंडा व बैठक की तिथियों को निर्धारित करने का अधिकार अब मेयर की बजाय नगर आयुक्त अथवा सीईओ को दे दिया गया है। प्रार्थी की ओर से कहा गया है कि महाधिवक्ता का मंतव्य संविधान एवं नगरपालिका अधिनियम के ठीक विपरीत है। इसलिए राज्य सरकार के उक्त आदेश को निरस्त कर देना चाहिए।

Canada: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के आक्रामक रुख से निपटने की कनाडा की नई योजना, 26 पन्नों का दस्तावेज जारी

कनाडा अब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सैन्य उपस्थिति को बढ़ावा देगा। वह निवेश नियमों को सख्त बनाकर बौद्धिक संपदा की रक्षा करेगा और चीन के स्वामित्व वाले उद्यमों को महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति बंद करने से रोकेगा।

कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो

कनाडा ने अपनी नई हिंद-प्रशांत रणनीति दस्तावेज में भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की योजना पर सबसे ज्यादा जोर दिया है। जिसमें भारत के साथ एक नए व्यापार समझौते की दिशा में काम करने की प्रतिबद्धता शामिल है, रणनीतिक, जनसांख्यिकीय क्षेत्र, आर्थिक क्षेत्र में नई दिल्ली के बढ़ते महत्व को दिखाता है। 26 पन्नों के इस दस्तावेज में चीन के दखल पर भारत का साथ देने की बात कही गई है।

कनाडा के हिंद-प्रशांत रणनीतिक दस्तावेज में कहा गया है कि यह क्षेत्र अगली आधी सदी में कनाडा नए निवेशकों के लिए तीन रणनीतियों के भविष्य को आकार देने में अहम भूमिका निभाएगा। जबकि चीन को इस दस्तावेज में विघटनकारी वैश्विक शक्ति बताते हुए अंतरराष्ट्रीय नियमों और मानदंडों की अव्हेलना पर फटकार लगाई है। इसमें कहा गया है कि चीन इस क्षेत्र में अपनी ताकत का दुरुपयोग कर रहा है।

जबकि भारत के बढ़ते सामरिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय महत्व कतो कनाडाई मकसद के लिए अहम भागीदार बताया गया। रणनीति दस्तावेज में भारत और बढ़ते आर्थिक संबंधों पर एक अलग खंड है, जिसमें गहन व्यापार व निवेश के साथ लचीली आपूर्ति शृंखलाओं के निर्माण पर सहयोग शामिल है।

व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते की दिशा में कनाडा प्रारंभिक प्रगति व्यापार समझौता (ईपीटीए) की जगह भारत के साथ बाजार पहुंच का विस्तार करना चाहता है। इसका उद्देश्य व्यापार आयुक्त सेवा के भीतर एक कनाडा-भारत डेस्क बनाना है, ताकि भारतीय बाजार में प्रवेश करने वाले व्यवसायों और निवेशकों के लिए ईपीटीए के कार्यान्वयन को बढ़ावा दिया जा सके।

दिल्ली-चंडीगढ़ में वीजा क्षमता मजबूत करेगा
कनाडा ने कहा कि वह नई दिल्ली और चंडीगढ़ में कनाडा की वीजा-प्रसंस्करण क्षमता को मजबूत कर लोगों को आपस में जोड़ेगी। इसके अलावा कनाडा सरकार अकादमिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक, युवा और अनुसंधान आदान-प्रदान का समर्थन भी करेगी। इस रणनीति में कहा गया है कि दोनों देशों में लोकतंत्र और बहुलवाद की साझा परंपरा है, जो एक नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय प्रणाली के लिए एक आम प्रतिबद्धता है। दस्तावेज के अनुसार, हिंद-प्रशांत क्षेत्र अगली छमाही में कनाडा के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

2018 में बढ़ा दोनों देशों में तनाव
कनाडा व चीन के बीच तनाव 2018 के अंत में उस समय बढ़ा जब कनाडा की पुलिस ने चीनी कंपनी नए निवेशकों के लिए तीन रणनीतियों हुवेई टेक्नोलॉजी के कार्यकारी अधिकारी को हिरासत में लिया था। इसके बाद बीजिंग ने जासूसी के आरोप में दो कनाडाई लोगों को गिरफ्तार किया था। हालांकि, तीनों को पिछले साल रिहा कर दिया गया था, लेकिन दोनों देशों के रिश्तों में दरार कायम है। इसी माह की शुरुआत में कनाडा ने तीन चीनी कंपनियों को राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर देश के खनिज क्षेत्रों में से निवेश वापस लेने का निर्देश दिया है।

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की लिबरल सरकार देश के व्यापार और आर्थिक संबंधों में विविधता लाना चाहती है। फिलहाल यह अमेरिका पर बहुत ज्यादा निर्भर है। जबकि, चीन के साथ कनाडा का द्विपक्षीय व्यापार अमेरिका के 68 फीसदी की तुलना में 7 फीसदी से भी कम है।

विस्तार

कनाडा ने अपनी नई हिंद-प्रशांत रणनीति दस्तावेज में भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की योजना पर सबसे ज्यादा जोर दिया है। जिसमें भारत के साथ एक नए व्यापार समझौते की दिशा में काम करने की प्रतिबद्धता शामिल है, रणनीतिक, जनसांख्यिकीय क्षेत्र, आर्थिक क्षेत्र में नई दिल्ली के बढ़ते महत्व को दिखाता है। 26 पन्नों के इस दस्तावेज में चीन के दखल पर भारत का साथ देने की बात कही गई है।

कनाडा के हिंद-प्रशांत रणनीतिक दस्तावेज में कहा नए निवेशकों के लिए तीन रणनीतियों गया है कि यह क्षेत्र अगली आधी सदी में कनाडा के भविष्य को आकार देने में अहम भूमिका निभाएगा। जबकि चीन को इस दस्तावेज में विघटनकारी वैश्विक शक्ति बताते हुए अंतरराष्ट्रीय नियमों और मानदंडों की अव्हेलना पर फटकार लगाई है। इसमें कहा गया है कि चीन इस क्षेत्र में अपनी ताकत का दुरुपयोग कर रहा है।

जबकि भारत के बढ़ते सामरिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय महत्व कतो कनाडाई मकसद के लिए अहम भागीदार बताया गया। रणनीति दस्तावेज में भारत और बढ़ते आर्थिक संबंधों पर एक अलग खंड है, जिसमें गहन व्यापार व निवेश के साथ लचीली आपूर्ति शृंखलाओं के निर्माण पर सहयोग शामिल है।

व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते की दिशा में कनाडा प्रारंभिक प्रगति व्यापार समझौता (ईपीटीए) की जगह भारत के साथ बाजार पहुंच का विस्तार करना चाहता है। इसका उद्देश्य व्यापार आयुक्त सेवा के भीतर एक कनाडा-भारत डेस्क बनाना है, ताकि भारतीय बाजार में प्रवेश करने वाले व्यवसायों और निवेशकों के लिए ईपीटीए के कार्यान्वयन को बढ़ावा दिया जा सके।

दिल्ली-चंडीगढ़ में वीजा क्षमता मजबूत करेगा
कनाडा ने कहा कि वह नई दिल्ली और चंडीगढ़ में कनाडा की वीजा-प्रसंस्करण क्षमता को मजबूत कर लोगों को आपस में जोड़ेगी। इसके अलावा कनाडा सरकार अकादमिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक, युवा और अनुसंधान आदान-प्रदान का समर्थन भी करेगी। इस रणनीति में कहा गया है कि दोनों देशों में लोकतंत्र और बहुलवाद की साझा परंपरा है, जो एक नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय प्रणाली के लिए एक आम प्रतिबद्धता है। दस्तावेज के अनुसार, हिंद-प्रशांत क्षेत्र अगली छमाही में कनाडा के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

2018 में बढ़ा दोनों देशों में तनाव
कनाडा व चीन के बीच तनाव 2018 के अंत में उस समय बढ़ा जब कनाडा की पुलिस ने चीनी कंपनी हुवेई टेक्नोलॉजी के कार्यकारी अधिकारी को हिरासत में लिया था। इसके बाद बीजिंग ने जासूसी के आरोप में दो कनाडाई लोगों को गिरफ्तार किया था। हालांकि, तीनों को पिछले साल रिहा कर दिया गया था, लेकिन दोनों देशों के रिश्तों में दरार कायम है। इसी माह की शुरुआत में कनाडा ने तीन चीनी कंपनियों को राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर देश के खनिज क्षेत्रों में से निवेश वापस लेने का निर्देश दिया है।


कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की लिबरल सरकार देश के व्यापार और आर्थिक संबंधों में विविधता लाना चाहती है। फिलहाल यह अमेरिका पर बहुत ज्यादा निर्भर है। जबकि, चीन के साथ कनाडा का द्विपक्षीय व्यापार अमेरिका के 68 फीसदी की तुलना में 7 फीसदी से भी कम है।

रेटिंग: 4.13
अधिकतम अंक: 5
न्यूनतम अंक: 1
मतदाताओं की संख्या: 262