NordFX करेंसी परिवर्तक

क्रिप्टोकरेंसियों के अलावा, दुनिया में लगभग 180 करेंसियाँ हैं। और पाँच हजार से अधिक क्रिप्टोकरेंसियाँ हैं। यह रोचक बात है कि यह संख्या लगातार बढ़ रही है। हमारे करेंसी परिवर्तक उपकरण में न केवल USD, EUR, JPY और GBP जैसी लोकप्रिय करेंसियाँ, बल्कि ऐसी विदेशी करेंसियाँ भी शामिल होती हैं, जैसे कि ZAR, NOK, SGD और कई अन्य। सबसे लोकप्रिय क्रिप्टोकरेंसियों की ऑनलाइन दरें भी हैं।

  • 1 आवश्यक करेंसी इसमें से चुनना;
  • 2 संगत इस करेंसी में चुनें;
  • 3 राशि का प्रकार;
  • 4 परिवर्तित करें बटन दबाएँ;
  • 5 मूल्य खंड में परिणाम जाँचें।

क्या आप जानते हैं कि चीन ने पहला पेपर मनी बनाया? लेकिन यह केवल सत्रहवीं शताब्दी में था कि यूरोपीय देशों ने बैंकनोटों का उपयोग करना शुरू कर दिया। यूरोप में पेपर मनी का उपयोग करने वाला पहला देश स्वीडन था। सबसे लोकप्रिय करेंसी आज U.S. डॉलर सबसे पहले 1861 में छापी गई।

ट्रेड करने के लिए करेंसियों का विनिमय करना आवश्यक था, और इस प्रकार पहला करेंसी एक्सचेंज सत्रहवीं शताब्दी में एम्स्टर्डम में दिखाई दिया। इंटरनेट की शुरुआत के साथ, करेंसी परिवर्तन तेज और आसान हो गया। यह अब एक त्वरित ऑनलाइन प्रक्रिया है।

यद्यपि करेंसियों का प्राथमिक लक्ष्य अन्य चीजों को खरीदना है, लेकिन ट्रेडिंग करेंसियों जीवन जीने का एक तरीका है। फ्लोटिंग करेंसी परिवर्तन आपको करेंसी दरों से लाभान्वित होने की अनुमति देता है। विदेशी मुद्रा बाजार (फॉरेक्स) दुनिया में सबसे बड़े वित्तीय बाजारों में से एक है। न केवल एकल व्यक्ति इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में शामिल है, बल्कि बैंक, व्यवसाय आदि भी शामिल हैं। फॉरेक्स दुनिया में सबसे बड़ी करेंसी एक्सचेंज सेवा है।

हम आपको न केवल हमारे ऑनलाइन करेंसी कनवर्टर टूल का उपयोग करने के लिए, बल्कि इन करेंसियों को ट्रेड करने और इन लेन-देन पर लाभ कमाने के लिए भी आमंत्रित करते हैं। आप इस वेबसाइट से डाउनलोड किए गए ट्रेडिंग टर्मिनल मेटाट्रेडर4 में करेंसियों को ऑनलाइन खरीद और बेच सकते हैं। क्रिप्टोकरेंसियों सहित अलग-अलग करेंसी युग्मों को NordFX के साथ ट्रेड किया जा सकता है। बस आपको कुछ कदम उठाने की जरूरत है:

आधिकारिक डिजिटल करेंसी का अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर? क्या तैयार है इंडिया

कागज के नोट छापने पर आरबीआई का बड़ा पैसा खर्च होता है. (फोटो- मनीकंट्रोल)

2023 की शुरुआत तक संभावना है कि भारत के पास अपना खुद का "डिजी रुपी" (Digi Rupee) होगा. पूरे भारत में इसे प्रभावी ढंग से . अधिक पढ़ें

  • News18Hindi
  • Last Updated : October 27, 2022, 12:23 IST

हाइलाइट्स

बैंकनोट की परिभाषा और दायरे को बढ़ाने की आवश्यकता.
वीडीए (VDAs) से होने वाली कमाई पर 30 फीसदी का टैक्स लगेगा.
कोई भी VDA भारतीय या विदेशी मुद्रा के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं हैं.

नई दिल्ली. अक्टूबर 2021 की बात है. तब भारतीय रिजर्व बैंक ने सरकार को एक खास प्रपोजल दिया था. इसके अनुसार, भारत सीबीडीसी (सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी) के इस्तेमाल से दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यस्थाओं में से एक बनने के पथ पर आगे बढ़ेगा. सेंट्रल बैंक ने आरबीआई एक्ट, 1934, के “बैंकनोट” की परिभाषा के दायरे को बढ़ाने और पैसे को इलेक्ट्रॉनिक फॉर्मेट में उतारने की सिफारिश की थी.

अब राज्य वित्त मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में कहा है कि आरबीआई यूज केसेस को परख रहा है और चरणबद्ध तरीके से सीबीडीसी को लाने की योजना पर काम कर रहा है ताकि कोई दिक्कत न हो. देखा जाए तो CBDC (Central Bank Digital Currency) एक अच्छा ऑप्शन है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को सहारा मिलेगा. परंतु यहां सवाल यह है कि क्या भारत को सच में कैश की जगह किसी अन्य विकल्प की जरूरत है?

क्यों है कैश की जगह डिजिटल करेंसी की जरूरत

2023 की शुरुआत तक संभावना है कि भारत के पास अपना खुद का “डिजी रुपी” (Digi Rupee) होगा. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2022 के लिए बजट पेश करते हुए इसका हिंट दिया था. इसके साथ ही एक नया सेक्शन 115BBH भी लागू किया था. इसके अनुसार, वीडीए (VDAs) से होने वाली कमाई पर 30 फीसदी का टैक्स लगेगा. वीडीए की फुल फॉर्म है वर्चुअल डिजिटल एसेट्स.

VDAs जैसे कि क्रिप्टोकरेंसी, नॉन-फंजीबल या गवर्नेंस टोकन, गेमिंग कॉइन आदि- अभी भी भारतीय या विदेशी मुद्रा के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं हैं. और, मार्च 2021-2022 (Comscore.com, 2022) में क्रिप्टो बाजार में 17 से 90 मिलियन यूजर्स को देखते हुए, भारत सरकार को इसके संबंध में एक अहम कदम उठाना पड़ा. बेशक, 115बीबीएच, क्रिप्टो लेनदेन को वैध नहीं बनाता है, परंतु यह भविष्य में सरकार के वीडीए एक्सचेंज के संभावित वैधीकरण की तरफ इशारा जरूर करता बिटकॉइन ट्रेडिंग बनाम विदेशी मुद्रा है. और यह निश्चित रूप से क्रिप्टो ट्रेडर्स को कुछ राहत देता है.

MSMEs द्वारा डिजिटल पेमेंट स्वीकारना

उपरोक्त केस के अलावा, एमएसएमई द्वारा डिजिटल भुगतान की बढ़ती स्वीकृति एक और ऐसी चीज है, जो बाजार में एक कानूनी डिजिटल विकल्प पेश करने के लिए प्रेरित करती है. महामारी फैलने से पहले से ही डिजिटल पेमेंट मोड का उपयोग हो रहा था. महामारी के बाद तो इसके उपयोग में बेहद तेजी आई, क्योंकि लाखों भारतीयों के पास खरीदारी करते समय सोशल डिस्टेंसिंग का एक ही विकल्प बचा था.

तीसरी बात- प्राइवेट वर्चुअल एसेट्स की बढ़ती स्वीकृति को ध्यान में रखते हुए सेंट्रल बैंक को डिजिटल पेमेंट सिस्टम लाना होगा. तेजी से बढ़ती तकनीक के युग में फिलहाल वीडीए का कोई विश्वसनीय जारीकर्ता नहीं है. इन्हें जनता द्वारा ही बनाया और उपयोग किया जा रहा है. इसमें क्रेडिट जोखिम शामिल है, जिसमें आर्थिक अस्थिरता पैदा करने की क्षमता भी है.

क्या अर्थव्यवस्था को गिरा सकता है CBDC?

जीएलजी इनसाइट्स, जनवरी 2022, के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था का लगभग 53% अनौपचारिक या अवैध क्षेत्र को मिलाकर बनता है. पेपर-बेस्ड करेंसी कल्चर को संहिताबद्ध करने से अधिक पारदर्शिता और दक्षता लाकर भारत में शैडो अर्थव्यवस्था को कम करने में मदद मिलेगी.

दूसरे, कागजी पैसे से जुड़े खर्च आरबीआई की खाता-बही के एक महत्वपूर्ण हिस्से का इस्तेमाल कर लेते हैं. क्षतिग्रस्त धन आरबीआई के लिए नई मुद्राओं के मैनेजमेंट और प्रोसेसिंग के खर्च को और बढ़ा देता है. नियंत्रित डिजिटल मुद्रा के उपयोग से इन्हें कम किया जा सकता है.

क्या CBDC के लिए पूरा भारत तैयार है?

डिजिटल करेंसीज़ के साथ डील करते समय ग्रामीण क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को समझना होगा. यह अब भी पुराने तरीकों का उपयोग कर रही है, लेकिन आवश्यक बैंकिंग सेवाओं के बिना समस्याओं से घिर सकती है. इसके अलावा, सीबीडीसी का व्यापक उपयोग निश्चित रूप से साइबर खतरों को बढ़ा देगा. सीबीडीसी की स्वीकृति के लिए तकनीकी जानकारी, ऑपरेशनल खर्च, बेहतर साइबर सुरक्षा, सीबीडीसी ऑपरेटरों की ट्रेनिंग और आम जनता को सीबीडीसी से परिचित कराना आवश्यक चीजें हैं. इस प्रकार, पूरे भारत में इसे प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए RBI को बड़ी लागत वहन करनी पड़ सकती है.

ऐसे में, आरबीआई को भारतीय जनसंख्या के अलग-अलग हिस्सों, जिसमें डिजिटली ज्ञान न रखने वाले लोग भी शामिल हैं, पर गहन रिसर्च करनी चाहिए. इसे वर्तमान मौद्रिक नीतियों और मुद्रा संरचना के साथ-साथ वित्त वर्ष 2013 तक डिजिटल मुद्रा के लॉन्च के लिए समझदारी से आगे बढ़ना चाहिए. भारत में साइबर सुरक्षा से जुड़े अपराध काफी होते हैं, तो विभिन्न स्तरों पर सख्त नियम और निर्विवाद साइबर सुरक्षा अति आवश्यक होगी. भारत की सीबीडीसी रणनीति में शून्य व्यवधान और न्यूनतम आर्थिक झटके की गारंटी होनी चाहिए.

लेखक: एस रवि, बीएसई के पूर्व चेयरमैन, और रवि राजन एंड कंपनी के फाउंडर और मैनेजिंग पार्टनर.

ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें News18 हिंदी| आज की ताजा खबर, लाइव न्यूज अपडेट, पढ़ें सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट News18 हिंदी|

Cryptocurrency: जय कोटक ने आनंद महिंद्रा का किया समर्थन, कहा- 'भारत में क्रिप्टो के रेगुलेशन की तत्काल आवश्यकता'

महिंद्रा ग्रुप (Mahindra Group) के अध्यक्ष आनंद महिंद्रा (Anand Mahindra) ने क्रिप्टोकरेंसी (cryptocurrency) में अपने निवेश के फर्जी दावों का भंडाफोड़ किया है।

Image: PTI/Twitter/Unsplash

महिंद्रा ग्रुप (Mahindra Group) के अध्यक्ष आनंद महिंद्रा (Anand Mahindra) ने क्रिप्टोकरेंसी (cryptocurrency) में अपने निवेश के फर्जी दावों का भंडाफोड़ किया है। इस बीच क्रिप्टो को लेकर जागरूकता अभियान में कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank) के एसोसिएट वीपी जय कोटक (Jay Kotak) भी शामिल होने वाले हैं। अरबपति बैंकर उदय कोटक (Uday Kotak) के बेटे जय कोटक ने रविवार को ट्विटर के जरिये भारत में क्रिप्टो को विनियमित करने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया।

जय कोटक ने कहा कि "भारत में क्रिप्टो के रेगुलेशन की तत्काल आवश्यकता है। हम विज्ञापनों, व्हाट्सएप और तेजी से पैसा कमाने या कैशबैक के बारे में फर्जी खबरों से घिरे हुए हैं। कई बिना समझे निवेश कर रहे हैं। मनी लॉन्ड्रिंग, विदेशी मुद्रा या अवैध भुगतान पर कोई कठोर नियंत्रण नहीं है।"

दरअसल, जय कोटक की यह प्रतिक्रिया इस हफ्ते की शुरुआत में आनंद महिंद्रा द्वारा किए गए एक ट्वीट के संबंध में आई है। बता दें, बीते 19 नवंबर को आनंद महिंद्रा ने क्रिप्टोकरंसी इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म (cryptocurrency investment platform) का उपयोग करके बहुत सारे पैसे कमाने का दावा करने वाली रिपोर्टों को साझा किया। इन दावों के खुलासे में महिंद्रा ने बताया कि क्रिप्टो में उन्होंने एक भी रुपये का निवेश नहीं किया है।

आनंद महिंद्र ने फर्जी रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट शेयर किया था जिसमें दावा किया गया था कि उन्होंने एक क्रिप्टो कॉइन ऑटो-ट्रेडिंग प्रोग्राम (crypto coins auto-trading programme) 'बिटकॉइन एरा (Bitcoin Era)' के इस्तेमाल से पैसा कमाया था। रिपोर्ट में यह भी हाइलाइट किया गया कि वह ऑटो-पायलट मोड पर दस हजार डॉलर कमा रहे हैं। फेक न्यूज का भंडाफोड़ करते हुए महिंद्रा ने कहा कि लोगों को जागरूक करना जरूरी है कि रिपोर्ट पूरी तरह से मनगढ़ंत और फर्जी है।

एक दूसरे ट्वीट में जय ने कहा, "यह इस बारे में नहीं है कि क्रिप्टो अच्छा है या बुरा, बल्कि 10 साल से कम उम्र के एसेट क्लास को नियामक ग्रे जोन के तहत संचालित करने की अनुमति देने के बारे में है। क्रिप्टोकरेंसी के आसपास नियंत्रण की कमी और दुर्भावनापूर्ण रूप से प्रोत्साहन देने वाले विज्ञापन एक 'आपदा' बन सकते हैं।"

हो सकता है, केंद्र संसद के आगामी मानसून सत्र में क्रिप्टोकरेंसी पर एक विधेयक पेश करेगा। 13 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्रिप्टोकरेंसी के लिए आगे बढ़ने के रास्ते पर एक बैठक की अध्यक्षता भी की थी। सूत्रों के अनुसार यह बैठक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), वित्त मंत्रालय और गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा की गई एक परामर्श प्रक्रिया के बाद आयोजित की गई थी।

रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क को सूत्रों से यह पता चला है कि केंद्र सरकार जल्द ही क्रिप्टोकरेंसी को एक 'एसेट क्लास' के रूप में स्थान दे सकती है। बता दें, एसेट क्लास समान विशेषताओं वाले उपकरणों का एक समूह है और समान नियमों द्वारा शासित होते हैं। इसका मतलब यह है कि क्रिप्टोकरेंसी को स्टॉक और बॉन्ड जैसी अन्य ट्रेडेबल एसेट के रूप में माना जा सकता है। हालांकि केंद्र इसे कानूनी टेंडर के रूप में मान्यता नहीं दे सकता है, लेकिन केंद्र ने इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से इनकार किया है।

आधिकारिक डिजिटल करेंसी का अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर? क्या तैयार है इंडिया

कागज के नोट छापने पर आरबीआई का बड़ा पैसा खर्च होता है. (फोटो- मनीकंट्रोल)

2023 की शुरुआत तक संभावना है कि भारत के पास अपना खुद का "डिजी रुपी" (Digi Rupee) होगा. पूरे भारत में इसे प्रभावी ढंग से . अधिक पढ़ें

  • News18Hindi
  • Last Updated : October 27, 2022, 12:23 IST

हाइलाइट्स

बैंकनोट की परिभाषा और दायरे को बढ़ाने की आवश्यकता.
वीडीए (VDAs) से होने वाली कमाई पर 30 फीसदी का टैक्स लगेगा.
कोई भी VDA भारतीय या विदेशी मुद्रा के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं हैं.

नई दिल्ली. अक्टूबर 2021 की बात है. तब भारतीय रिजर्व बैंक ने सरकार को एक खास प्रपोजल दिया था. इसके अनुसार, भारत सीबीडीसी (सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी) के इस्तेमाल बिटकॉइन ट्रेडिंग बनाम विदेशी मुद्रा से दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यस्थाओं में से एक बनने के पथ पर आगे बढ़ेगा. सेंट्रल बैंक ने आरबीआई एक्ट, 1934, के “बैंकनोट” की परिभाषा के दायरे को बढ़ाने और पैसे को इलेक्ट्रॉनिक फॉर्मेट में उतारने की सिफारिश की थी.

अब राज्य वित्त मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में कहा है कि आरबीआई यूज केसेस को परख रहा है और चरणबद्ध तरीके से सीबीडीसी को लाने की योजना पर काम कर रहा है ताकि कोई दिक्कत न हो. देखा जाए तो CBDC (Central Bank Digital Currency) एक अच्छा ऑप्शन है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को सहारा मिलेगा. परंतु यहां सवाल यह है कि क्या भारत को सच में कैश की जगह किसी अन्य विकल्प की जरूरत है?

क्यों है कैश की जगह डिजिटल करेंसी की जरूरत

2023 की शुरुआत तक संभावना है कि भारत के पास अपना खुद का “डिजी रुपी” (Digi Rupee) होगा. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2022 के लिए बजट पेश करते हुए इसका हिंट दिया था. इसके साथ ही एक नया सेक्शन 115BBH भी लागू किया था. इसके अनुसार, वीडीए (VDAs) से होने वाली कमाई पर 30 फीसदी का टैक्स लगेगा. वीडीए की फुल फॉर्म है वर्चुअल डिजिटल एसेट्स.

VDAs जैसे कि क्रिप्टोकरेंसी, नॉन-फंजीबल या गवर्नेंस टोकन, गेमिंग कॉइन आदि- अभी भी भारतीय या विदेशी मुद्रा के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं हैं. और, मार्च 2021-2022 (Comscore.com, 2022) में क्रिप्टो बाजार में 17 से 90 मिलियन यूजर्स को देखते हुए, भारत सरकार को इसके संबंध में एक अहम कदम उठाना पड़ा. बेशक, 115बीबीएच, क्रिप्टो लेनदेन को वैध नहीं बनाता है, परंतु यह भविष्य में सरकार के वीडीए एक्सचेंज के संभावित वैधीकरण की तरफ इशारा जरूर करता है. और यह निश्चित रूप से क्रिप्टो ट्रेडर्स को कुछ राहत देता है.

MSMEs द्वारा डिजिटल पेमेंट स्वीकारना

उपरोक्त केस के अलावा, एमएसएमई द्वारा डिजिटल भुगतान की बढ़ती स्वीकृति एक और ऐसी चीज है, जो बाजार में एक कानूनी डिजिटल विकल्प पेश करने के लिए प्रेरित करती है. महामारी फैलने से पहले से ही डिजिटल पेमेंट मोड का उपयोग हो रहा था. महामारी के बाद तो इसके उपयोग में बेहद तेजी आई, क्योंकि लाखों भारतीयों के पास खरीदारी करते समय सोशल डिस्टेंसिंग का एक ही विकल्प बचा था.

तीसरी बात- प्राइवेट वर्चुअल एसेट्स की बढ़ती स्वीकृति को ध्यान में रखते हुए सेंट्रल बैंक को डिजिटल पेमेंट सिस्टम लाना होगा. तेजी से बढ़ती तकनीक के युग में फिलहाल वीडीए का कोई विश्वसनीय जारीकर्ता नहीं है. इन्हें जनता द्वारा ही बनाया और उपयोग किया जा रहा है. इसमें क्रेडिट जोखिम शामिल है, जिसमें आर्थिक अस्थिरता पैदा करने की क्षमता भी है.

क्या अर्थव्यवस्था को गिरा सकता है CBDC?

जीएलजी इनसाइट्स, जनवरी 2022, के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था का लगभग 53% अनौपचारिक या बिटकॉइन ट्रेडिंग बनाम विदेशी मुद्रा अवैध क्षेत्र को मिलाकर बनता है. पेपर-बेस्ड करेंसी कल्चर को संहिताबद्ध करने से अधिक पारदर्शिता और दक्षता लाकर भारत में शैडो अर्थव्यवस्था को कम करने में मदद मिलेगी.

दूसरे, कागजी पैसे से जुड़े खर्च आरबीआई की खाता-बही के एक महत्वपूर्ण हिस्से का इस्तेमाल कर लेते हैं. क्षतिग्रस्त धन आरबीआई के लिए नई मुद्राओं के मैनेजमेंट और प्रोसेसिंग के खर्च को और बढ़ा देता है. नियंत्रित डिजिटल मुद्रा के उपयोग से इन्हें कम किया जा सकता है.

क्या CBDC के लिए पूरा भारत तैयार है?

डिजिटल करेंसीज़ के साथ डील करते समय ग्रामीण क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को समझना होगा. यह अब भी पुराने तरीकों का उपयोग कर रही है, लेकिन आवश्यक बैंकिंग सेवाओं के बिना समस्याओं से घिर सकती है. इसके अलावा, सीबीडीसी का व्यापक उपयोग निश्चित रूप से साइबर खतरों को बढ़ा देगा. सीबीडीसी की स्वीकृति के लिए तकनीकी जानकारी, ऑपरेशनल खर्च, बेहतर साइबर सुरक्षा, सीबीडीसी ऑपरेटरों की ट्रेनिंग और आम जनता को सीबीडीसी से परिचित कराना आवश्यक चीजें हैं. इस प्रकार, पूरे भारत में इसे प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए RBI को बड़ी लागत वहन करनी पड़ सकती है.

ऐसे में, आरबीआई को भारतीय जनसंख्या के अलग-अलग हिस्सों, जिसमें डिजिटली ज्ञान न रखने वाले लोग भी शामिल हैं, पर गहन रिसर्च करनी चाहिए. इसे वर्तमान मौद्रिक नीतियों और मुद्रा संरचना के साथ-साथ वित्त वर्ष 2013 तक डिजिटल मुद्रा के लॉन्च के लिए समझदारी से आगे बढ़ना चाहिए. भारत में साइबर सुरक्षा से जुड़े अपराध काफी होते हैं, तो विभिन्न स्तरों पर सख्त नियम और निर्विवाद साइबर सुरक्षा अति आवश्यक होगी. भारत की सीबीडीसी रणनीति में शून्य व्यवधान और न्यूनतम आर्थिक झटके की गारंटी होनी चाहिए.

लेखक: एस रवि, बीएसई के पूर्व चेयरमैन, और रवि राजन एंड कंपनी के फाउंडर और मैनेजिंग पार्टनर.

ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें News18 हिंदी| आज की ताजा खबर, लाइव न्यूज अपडेट, पढ़ें सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट News18 हिंदी|

Cryptocurrency: जय कोटक ने आनंद महिंद्रा का किया समर्थन, कहा- 'भारत में क्रिप्टो के रेगुलेशन की तत्काल आवश्यकता'

महिंद्रा ग्रुप (Mahindra Group) के अध्यक्ष आनंद महिंद्रा (Anand Mahindra) ने क्रिप्टोकरेंसी (cryptocurrency) में अपने निवेश के फर्जी दावों का भंडाफोड़ किया है।

Image: PTI/Twitter/Unsplash

महिंद्रा ग्रुप (Mahindra Group) के अध्यक्ष आनंद महिंद्रा (Anand Mahindra) ने क्रिप्टोकरेंसी (cryptocurrency) में अपने निवेश के फर्जी दावों का भंडाफोड़ किया है। इस बीच क्रिप्टो को लेकर जागरूकता अभियान में कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank) के एसोसिएट वीपी जय कोटक (Jay Kotak) भी शामिल होने वाले हैं। अरबपति बैंकर उदय कोटक (Uday Kotak) के बेटे जय कोटक ने रविवार को ट्विटर के जरिये भारत में क्रिप्टो को विनियमित करने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया।

जय कोटक ने कहा कि "भारत में क्रिप्टो के रेगुलेशन की तत्काल आवश्यकता है। हम विज्ञापनों, व्हाट्सएप और तेजी से पैसा कमाने या कैशबैक के बारे में फर्जी खबरों से घिरे हुए हैं। कई बिना समझे निवेश कर रहे हैं। मनी लॉन्ड्रिंग, विदेशी मुद्रा या अवैध भुगतान पर कोई कठोर नियंत्रण नहीं है।"

दरअसल, जय कोटक की यह प्रतिक्रिया इस हफ्ते की शुरुआत में आनंद महिंद्रा द्वारा किए गए एक ट्वीट के संबंध में आई है। बता दें, बीते 19 नवंबर को आनंद महिंद्रा ने क्रिप्टोकरंसी इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म (cryptocurrency investment platform) का उपयोग करके बहुत सारे पैसे कमाने का दावा करने वाली रिपोर्टों को साझा किया। इन दावों के खुलासे में महिंद्रा ने बताया कि क्रिप्टो में उन्होंने एक भी रुपये का निवेश नहीं किया है।

आनंद महिंद्र ने फर्जी रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट शेयर किया था जिसमें दावा किया गया था कि उन्होंने एक क्रिप्टो कॉइन ऑटो-ट्रेडिंग प्रोग्राम (crypto coins auto-trading programme) 'बिटकॉइन एरा (Bitcoin Era)' के इस्तेमाल से पैसा कमाया था। रिपोर्ट में यह भी हाइलाइट किया गया कि वह ऑटो-पायलट मोड पर दस हजार डॉलर कमा रहे हैं। फेक न्यूज का भंडाफोड़ करते हुए महिंद्रा ने कहा कि लोगों को जागरूक करना जरूरी है कि रिपोर्ट पूरी तरह से मनगढ़ंत और फर्जी है।

एक दूसरे ट्वीट में जय ने कहा, "यह इस बारे में नहीं है कि क्रिप्टो अच्छा है या बुरा, बल्कि 10 साल से कम उम्र के एसेट क्लास को नियामक ग्रे जोन के तहत संचालित करने की अनुमति देने के बारे में है। क्रिप्टोकरेंसी के आसपास नियंत्रण की कमी और दुर्भावनापूर्ण रूप से प्रोत्साहन देने वाले विज्ञापन एक 'आपदा' बन सकते हैं।"

हो सकता है, केंद्र संसद के आगामी मानसून सत्र में क्रिप्टोकरेंसी पर एक विधेयक पेश करेगा। 13 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्रिप्टोकरेंसी के लिए आगे बढ़ने के रास्ते पर एक बैठक की अध्यक्षता भी की थी। सूत्रों के अनुसार यह बैठक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), वित्त मंत्रालय और गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा की गई एक परामर्श प्रक्रिया के बाद आयोजित की गई थी।

रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क को सूत्रों से यह पता चला है कि केंद्र सरकार जल्द ही क्रिप्टोकरेंसी को एक 'एसेट क्लास' के रूप में स्थान दे सकती है। बता दें, एसेट क्लास समान विशेषताओं वाले उपकरणों का एक समूह है और समान नियमों द्वारा शासित होते हैं। इसका मतलब यह है कि क्रिप्टोकरेंसी को स्टॉक और बॉन्ड जैसी अन्य ट्रेडेबल एसेट के रूप में माना जा सकता है। हालांकि केंद्र इसे कानूनी टेंडर के रूप में मान्यता नहीं दे सकता है, लेकिन केंद्र ने इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से इनकार किया है।

रेटिंग: 4.44
अधिकतम अंक: 5
न्यूनतम अंक: 1
मतदाताओं की संख्या: 200