Bitcoin – Types of crypto currency (Crypto Currency Kya Hai)

क्रिप्टोकरेंसी की ये कहानी शायद आप नहीं जानते होंगे? जानें क्या होता है ब्लॉकचेन?

CryptoCurrency

नई दिल्ली: क्रिप्टोकरेंसी (CryptoCurrency) क्रिप्टो करेंसी क्या होता है? इन दिनों सुर्खियों में है. मोदी सरकार (Modi government) क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित विधेयक बिल लाने की चर्चा. इन सबके बीच आपके मन में कई सवाल उठ रहे होंगे. आखिर क्रिप्टोकरेंसी क्या है? (What is Cryptocurrency?) कैसे काम करता है? क्या होता है ब्लॉकचेन? तो चलिए जानते हैं क्रिप्टोकरेंसी की पूरी कहानी.

खबर में खास
  • क्रिप्टोकरेंसी क्या है? (What is Crypto Currency)
  • क्रिप्टोकरेंसी ब्लॉकचेन के जरिए होती है यूज
  • RBI रेगुलेट कर सकती है
क्रिप्टोकरेंसी क्या है? (What is Crypto Currency)

बिटकॉइन दुनिया की एक प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी (एक तरह की डिजिटल मुद्रा) है. बिटकॉइन (क्रिप्टो करेंसी क्या होता है? Bitcoin) कोई असली सिक्कों या नोट जैसी नहीं होती बस आपके कंप्यूटर पर कुछ codes के रूप में स्टोर होती है. जिसका ट्रांसफर कर लोग इसे इस्तेमाल करतें है. दरअसल, क्रिप्टोकरेंसी डिसेंट्रलाइज्ड व्यवस्था है और इस पर किसी का कोई कंट्रोल नहीं है. कोई भी सरकार या कंपनी इसे कंट्रोल नहीं कर सकती. इसी वजह से इसमें अस्थिरता भी है. यह ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी और डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम पर काम करती है, जिसे न तो कोई हैक कर सकता है और न ही छेड़छाड़.

क्रिप्टोकरेंसी ब्लॉकचेन के जरिए होती है यूज

क्रिप्टोकरेंसी का लेन-देन करने के लिए जिस प्रणाली का इस्तेमाल किया जाता है उसे ब्लॉकचेन कहते हैं.. ये डिजिटल करेंसी इनक्रिप्टेड (कोडेड) होती हैं. इसे एक कंप्यूटर नेटवर्क के जरिए नियंत्रित किया जाता है. इसमें प्रत्येक लेन-देन का डिजिटल हस्ताक्षर द्वारा सत्यापन किया जाता है. इसका रिकॉर्ड क्रिप्टोग्राफी की मदद से नियंत्रित होता है. ये सारा काम कंप्यूटर नेटवर्क के जरिए चलता है.

RBI रेगुलेट कर सकती है

रिजर्व बैंक द्वारा प्रस्तावित डिजिटल या वर्चुअल करेंसी को क्रिप्टो बिल के साथ नहीं जोड़ा गया है. फिर भी यह तय है कि केंद्रीय बैंक क्रिप्टो से जुड़े मामलों को कंट्रोल करेगा. इसके विनिमय से जुड़े मामलों का उल्लंघन करने वालों को डेढ़ साल तक कैद हो सकती है. वही, रेगुलेटर ₹5 करोड़ से लेकर ₹20 करोड़ तक का जुर्माना भी लगा सकता है.

Cryptocurrency और Digital Rupee में क्‍या है फर्क, अगर शुरु हो गया इसका इस्‍तेमाल तो आपको क्‍या होगा फायदा?

अगर सब कुछ ठीक रहा तो आने वाले समय में डिजिटल रुपी का इस्‍तेमाल आम लोग भी करेंगे. ऐसे में ये समझना बहुत जरूरी है कि आखिर डिजिटल रुपी और क्रिप्‍टोकरेंसी में क्‍या फर्क है और इससे क्रिप्टो करेंसी क्या होता है? आम लोगों को क्‍या फायदा होगा?

क्रिप्‍टोकरेंसी को टक्‍कर देने के लिए भारत में पहली बार करेंसी को डिजिटल रूप में लाया गया है. एक नवंबर को डिजिटल रुपी (Digital Rupee) यानी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) को पायलट प्रोजेक्‍ट के तौर पर शुरू कर दिया गया है. फिलहाल रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India- RBI) कुछ समय तक इसमें आने वाली चुनौतियों को परखेगा और पूरी तरह से आश्‍वस्‍त होने के बाद इसके इस्‍तेमाल को शुरू किया जाएगा.

RBI ने अभी इसे होलसेल ट्रांजेक्शन के लिए जारी किया है और इसे होलसेल सेगमेंट पायलट प्रोजेक्ट नाम दिया है. लेकिन अगर सब कुछ ठीक रहा तो आने वाले समय में डिजिटल रुपी का इस्‍तेमाल आम लोग भी करेंगे. ऐसे में ये समझना बहुत जरूरी है कि आखिर डिजिटल रुपी और क्रिप्‍टोकरेंसी में क्‍या फर्क है और इससे आम लोगों को क्‍या फायदा होगा?

क्रिप्‍टोकरेंसी और डिजिटल रुपी में अंतर

क्रिप्‍टोकरेंसी: ये एक विकेंद्रित (Decentralized) डिजिटल संपत्ति है. इसके जरिए डिजिटल तरीके से लेनदेन किया जा सकता है. ब्‍लॉकचेन तकनीक के जरिए क्रिप्‍टोकरेंसी अलग-अलग जगहों पर स्‍टोर रहती है. ब्लॉकचेन ऐसी तकनीक है जिससे Digital Currency बनाने के साथ ही किसी भी चीज को डिजिटल बनाकर उसका रिकॉर्ड रखा जा सकता है. ये एक तरह का डिजिटल लेजर है. लेकिन चिंता वाली बात ये है कि क्रिप्‍टोकरेंसी को रेगुलेट करने के लिए कोई बैंक या अन्‍य संस्‍था नहीं है और न ही इसे कोई सरकार मॉनिटर नहीं करती है. ये पूरी तरह से निजी करेंसी है. इसके अलावा क्रिप्‍टोकरेंसी के रेट में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी रहती है.


डिजिटल रुपी: डिजिटल रुपी से भी लेनदेन को क्रिप्‍टोकरेंसी की तरह ही डिजिटल माध्‍यम से ही किया जाएगा, लेकिन सबसे बड़ा फर्क है कि ये पूरी तरह से रेगुलेटेड है. इसे सरकार की मंजूरी प्राप्‍त है और यह पूरी तरह से सरकार समर्थित वैध मुद्रा है. इसमें नियामक के रूप में आरबीआई और लेन-देन की मदद के लिए दूसरे बैंक मौजूद रहेंगे. किसी भी तरह की दिक्‍कत आने पर वित्‍तीय संस्‍थान दखल दे सकते हैं. लेकिन क्रिप्‍टोकरेंसी में ये संभव नहीं है. यूपीआई और पेमेंट वॉलेट के जरिए किए जाने वाले डिजिटल भुगतान से ये पूरी तरह से अलग है. वहीं डिजिटल रुपी में उतार-चढ़ाव जैसा कुछ नहीं होगा. इसका वही प्रभाव होगा जो नकद मुद्रा का होता है. इसके अलावा डिजिटल रुपी को नकदी में बदला जा सकेगा.

Crypto Currency Kya Hai (क्रिप्टो करेंसी क्या है सभी जानकारी हिंदी में)?

Crypto Currency kya hai क्रिप्टो करेंसी क्या है

Crypto Currency kya hai (क्रिप्टो करेंसी क्या है) – आज हर कोई Crypto Currency के बारे में जानना चाहता है क्योंकि कुछ सालो में Crypto Currency का नाम बहुत तेजी से फैला है। एक सवाल हर किसी के मन में घूमता है Cryptocurrency आखिर है क्या और बहुत से लोगो को इसके बारे में नहीं पता होता। क्रिप्टो करेंसी क्या होता है? तो आज इस पोस्ट में हम आपको Crypto Currency से जुडी सारी जानकारी देंगे।

Crypto Currency kya hai क्रिप्टो करेंसी क्या है?

Crypto Currency एक डिजिटल मुद्रा है। जैसे की हर देश की कोई न कोई मुद्रा होती है जैसे भारत की रुपया अमेरिका का डॉलर ऐसे ही सभी देशो की अपनी-अपनी मुद्रा होती है जिसे हम छू और देख सकते है। लेकिन Crypto Currency किसी देश की मुद्रा नहीं है यह केवल डिजिटल फॉर्म में काम करती है। इसका कोई रूपए या डॉलर की तरह कोई हार्ड कॉपी नहीं है। Crypto Currency का केवल ऑनलाइन लेनदेन हो सकता है।

हम इसे ऐसे भी समझ सकते है Crypto Currency एक ऐसी मुद्रा है, जिसे किसी देश की सरकार द्वारा लागू नहीं किया जाता है। और न ही Crypto Currency पर किसी देश, बैंक या किसी 3rd पार्टी या अन्य का नियंत्रण होता है अर्थात यह पूर्णतः एक स्वतंत्र मुद्रा है जिसे हम छू नहीं सकते।

Crypto Currency का इतिहास

Crypto Currency की शुरुआत डेविड चाउम द्वारा की गयी थी जिसे उन्होंने शुरुआत में एक्श नाम दिया और फिर 1995 में, उन्होंने इसे डिजिकैश के माध्यम से लागू किया था। किन्तु तब इसे कुछ सफलता नहीं मिली। उसके कुछ सालो बाद कुछ और लोगो ने भी इस पर ध्यान दिया लेकिन वह भी इतना सफल नहीं हो पाए। फिर 2009 में सतोषी नाम के एक व्यक्ति ने बिटकॉइन के नाम से एक Crypto Currency की शुरुआत की जो की पहली डिजिटल मुद्रा है।

हालाँकि शुरुआत में इसे भी कुछ खास सफलता नहीं मिली लेकिन कुछ ही सालो में इसमें इतनी तेजी देखने को मिली की सबकी आँखे चौंका गई क्योंकि इसकी कीमत इंडियन रुपया में 51 लाख से भी अधिक गए थी।

Crypto Currency के प्रकार

इन कुछ सालो में Crypto Currency में बहुत तेजी देखने को मिल और देखते ही देखते 2021 में ही लगभग 100 से भी अधिक क्रिप्टो करेंसी लॉन्च हुई। जिसमे सबसे ज्यादा लोकप्रिय बिटकॉइन है इसके अलावा Ethereum, Solana (SOL), Binance Coin (BNB), Avalanche (AVAX), Cosmos (ATOM), Filecoin (FIL) प्रसिद्ध है।

Bitcoin

Bitcoin - Types of crypto currency

Bitcoin – Types of crypto currency (Crypto Currency Kya Hai)

Bitcoin एक सबसे लोकप्रिय Crypto Currency है जिसकी शुरुआत सातोशी नामक एक जापानी व्यक्ति ने 2008 में की थी। और फिर इसे 2009 में ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर (A to Z कंप्यूटर की शॉर्टकट Keys) के रूप में जारी किया था। यह दुनिया की पहली Crypto Currency भी कहलाती है। बिटकॉइन की कीमत इंडियन रुपया में 51 लाख तक पहुंच चुकी थी क्रिप्टो करेंसी क्या होता है? जबकि इसकी 2015 में 21k (21 हजार) थी जो की अभी 2022 में 15 लाख के लगभग है।

Ethereum

Ethereum भी bitcoin की तरह ही एक लोकप्रिय Crypto Currency है। जिसे Ether के नाम से भी जाना जाता है। इसे 30 July 2015 को live किया गया था। जिसकी शुरुआती कीमत इंडियन रूपए में 600-700 तक थी जोकि 2022 में 1 लाख से भी अधिक है। यह bitcoin के बाद दूसरे नंबर पर आती है।

Solana (SOL)

Solana एक प्रकार की Crypto Currency यानि की एक डिजिटल मुद्रा है जिसका लेन देन डिजिटल रूप से ही किया जाता है। 16 मार्च 2020 को सोलाना का पहला ब्लॉक बनाया गया था। जिसकी market value 200 डॉलर से भी ज्यादा रह चुकी है लेकिन अभी हाली में इसमें गिरावट देखने को मिली है।

Binance Coin (BNB)

Binance भी एक Crypto Currency exchange है। जिसकी स्थापना एक डेवलपर चांगपेंग झाओ ने की थी जिसे 2017 में लॉन्च किया किया गया था इसकी शुरआत में कीमत भारतीय रूपए में 6-7 रूपए थी जो की 3 से 4 साल में उछाल मार कर 2021 में 51000 रूपए तक पहुंच गयी थी लेकिन उसके बाद इसमें तेजी देखने को नहीं मिली और यह गिर कर 22000 रुपए तक आ पहुंची है।

क्या भारत में Crypto currency legal है?

Crypto Currency के बारे में लोग जानते तो हैं लेकिन बहुत से लोगो के मन में यह सवाल जरूर आता होगा कि क्या Crypto करेंसी इंडिया में legal है भी या नहीं। तो आपको बता देते है कि 2022 के बजट में नए सेक्शन 115BBH को पेश करने का प्रस्ताव किया गया था। जिसके बाद वित्त मंत्रालय ने इस पर ३०% टैक्स कि घोषणा कि लेकिन यह नहीं कहा कि यह लीगल है। केंद्र सरकार ने अभी Crypto Currency को मंजूरी नहीं दी है। भारतीय सरकार इस पर अभी विचार कर रही है।

इस आर्टिकल में हमने Crypto Currency kya hai टॉपिक पर लेख लिखा है अगर आपको इस लेख से जुडी कोई भी जानकारी गलत या कुछ अपना प्रतिक्रिया देना चाहते है तो कृपया करके कमेंट सेंक्शन पर कमेंट पोस्ट करे और अगर आपको Crypto Currency kya hai हमारा यह आर्टिकल अच्छा लगा तो कृपया करके अपने दोस्तों और परिवार तक इस लेख को पहुंचाने की कोशिस करे |

Investment in Crypto Currencies: BitCoin में निवेश का स्टेपवाइज प्रॉसेस, इन तीन चार्जेज के बारे में भी जानकारी है जरूरी

Investing in Crypto Currencies: भारत में बिटक्वाइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी में निवेश को लेकर निवेशक आकर्षित हुए हैं लेकिन अधिकतर के मन में यह सवाल रहता है कि इसकी शुरुआत कैसे की जाए.

Investment in Crypto Currencies: BitCoin में निवेश का स्टेपवाइज प्रॉसेस, इन तीन चार्जेज के बारे में भी जानकारी है जरूरी

दुनिया भर में निवेशकों के बीच बिटक्वाइन (BitCoin) जैसी क्रिप्टो करेंसी में निवेश को लेकर आकर्षण बढ़ रहा है.

Investing in Crypto Currencies: भारत समेत दुनिया भर में निवेशकों के बीच बिटक्वाइन (BitCoin) जैसी क्रिप्टो करेंसी में निवेश को लेकर आकर्षण बढ़ रहा है. पिछले कुछ वर्षों में इसने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है. क्रिप्टोकरेंसी एक प्रकार की वर्चुअल करेंसी है जिसे कंप्यूटर पर जटिल समीकरणों को हल कर माइन किया जाता है. इसे माइन करने वाले यानी माइनर्स को रिवार्ड के तौर पर क्रिप्टो करेंसी मिलती है लेकिन जिन्हें तकनीकी समझ नहीं है, वे भी क्रिप्टो हासिल कर सकते हैं. जिस प्रकार कंपनी के शेयरों की बीएसई और एनएसई जैसे एक्सचेंजों पर खरीद-बिक्री होती है, वैसे ही क्रिप्टो एक्सचेंजों पर बिटक्वाइन जैसे क्रिप्टो की खरीद-बिक्री होती है यानी कि आपको अगर बिटक्वाइन में निवेश करना है तो किसी एक्सचेंज पर जाकर आसानी से इसमें पैसे लगा सकते हैं.

इस प्रकार कर सकते हैं क्रिप्टो में निवेश

क्रिप्टों में निवेश के लिए वजीरएक्स (WazirX), क्वाइनडेक्स (Coindex), जेबपे Zebpay, क्वाइनस्विच कुबेर (Coin Switch Kuber) और यूनोकॉइन UnoCoin जैसे एक्सचेंज हैं. क्रिप्टो में निवेश के लिए पहले आपको एक्सचेंज की साइट पर जाकर पर्सनल डिटेल्स के जरिए रजिस्ट्रेशन करना होगा.

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  • क्रिप्टो करेंसी की वेबसाइट पर जाकर साइन अप करिए.
  • फिर ई-मेल वेरिफिकेशन के बाद सिक्योरिटी पेज आएगा जिसमें ऐप, मोबाइल एसएमएस या कोई सिक्योरिटी विकल्प न चुनने का विकल्प आएगा.
  • सिक्योरिटी विकल्स को ओके करने के बाद देश चुनने और केवाईसी चुनने का विकल्प मिलेगा. केवाईसी के तहत पर्सनल और कंपनी में से किसी एक को चुनना होता है जो बाय डिफॉल्ट क्रिप्टो करेंसी क्या होता है? पर्सनल पर होता है.
  • केवाईसी के लिए अपनी व्यक्तिगत जानकारियां जैसे कि नाम, जन्म तिथि, पता, पैन कार्ड, आधार (ड्राइविंग लाइसेंस या पासपोर्ट) की डिटेल्स के साथ पैन कार्ड की फोटो, आधार कार्ड के फ्रंट व बैक साइड के साथ सेल्फी अपलोड करनी होती है.
  • अकाउंट वेरिफाई होने के बाद आप क्रिप्टो में खरीदारी कर सकते हैं और इसका भुगतान अपने बैंक खाते से करना होगा.

क्रिप्टो ट्रेडिंग पर ये हैं चार्जेज

  • एक्सचेंज फीस: क्रिप्टो खरीद या बिक्री ऑर्डर को पूरा करने के लिए एक्सचेंज फीस चुकानी होती है. भारत में अधिकतर क्रिप्टो करेंसी एक्सचेंज का फिक्स्ड फीस मॉडल है, लेकिन ट्रांजैक्शन की फाइनल कॉस्ट उस प्लेटफॉर्म पर निर्भर होती है जिस पर ट्रांजैक्शन पूरा हुआ है. ऐसे में इसे लेकर बेहतर रिसर्च करनी चाहिए कि कौन सा क्रिप्टो करेंसी एक्सचेंज सबसे कम ट्रांजैक्शन फीस ले रहा है. फिक्स्ड फीस मॉडल के अलावा क्रिप्टो एक्सचेंज में मेकर-टेकर फी मॉडल भी है. क्रिप्टो करेंसी बेचने वाले को मेकर कहते हैं और इसे खरीदने वाले को टेकर कहते हैं. इस मॉडल के तहत ट्रेडिंग एक्टिविटी के हिसाब से फीस चुकानी होती है.
    क्रिप्टो करेंसी क्या होता है?
  • नेटवर्क फीस: क्रिप्टोकरेंसी माइन करने वालों को नेटवर्क फीस चुकाई जाती है. ये माइनर्स शक्तिशाली कंप्यूटर्स के जरिए किसी ट्रांजैक्शन को वेरिफाई और वैलिडेट करते हैं और ब्लॉकचेन में जोड़ते हैं. एक्सचेंज का नेटवर्क फीस पर सीधा नियंत्रण नहीं होता है. अगर नेटवर्क पर भीड़ बढ़ती है यानी अधिक ट्रांजैक्शन को वेरिफाई और वैलिडेट करना होता है तो फीस बढ़ जाती है. आमतौर पर यूजर्स को थर्ड पार्टी वॉलेट का प्रयोग करते समय ट्रांजैक्शन फीस को पहले से ही सेट करने की छूट होती है. लेकिन एक्सचेंज पर इसे ऑटोमैटिक एक्सचेंज द्वारा ही सेट किया जाता है ताकि ट्रांसफर में कोई देरी न हो. जो यूजर्स अधिक फीस चुकाने के लिए तैयार हैं, उनका ट्रांजैक्शन जल्द पूरा हो जाता है और जिन्होंने फीस की लिमिट कम रखी है, उनके ट्रांजैक्शन पूरा होने में कुछ समय लग सकता है. माइनर्स को इलेक्ट्रिसिटी कॉस्ट और प्रोसेसिंग पॉवर के लिए यह फीस दी जाती है.क्रिप्टो करेंसी क्या होता है?
  • वॉलेट फीस: क्रिप्टो करेंसी को ऑनलाइन बैंक खाते के समान एक डिजिटल वॉलेट में रखा जाता है. अधिकतर वॉलेट में क्रिप्टो करेंसी के डिपॉजिट और स्टोरेज पर कोई फीस नहीं ली जाती है, लेकिन इसे निकालने या कहीं भेजने पर फीस चुकानी होती है. यह मूल रूप से नेटवर्क फीस है. अधिकतर एक्सचेंज इन-बिल्ट वॉलेट की सुविधा देते हैं. क्रिप्टो वॉलेट्स सिस्टमैटिक क्रिप्टो करेंसी खरीदने का विकल्प देते हैं और इसके इंटीग्रेटेड मर्चेंट गेटवे के जरिए स्मार्टफोन व डीटीएस सर्विसेज को रिचार्ज कराया जा सकता है.

(यहां दी गई जानकारी एक्सचेंजों की वेबसाइट से ली गई है. निवेश शुरू करने की जो प्रक्रिया है, वह अलग-अलग एक्सचेंज पर थोड़ी भिन्न हो सकती है. लेख के जरिए आपको निवेश की कोई सलाह नहीं दी जा रही है और यह महज जानकारी के लिए है. क्रिप्टोकरेंसी में निवेश से पहले अपने सलाहकार से जरूर संपर्क कर लें.)

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Cryptocurrency: युवा निवेशक क्रिप्टो में जमकर लगा रहे है पैसा

आरबीआई ( Reserve bank of india ) बार-बार क्रिप्टो करेंसी ( crypto currency ) और इसके निवेशकों को आगाह कर रही हैं, लेकिन क्रिप्टों में पैसा लगाने वालों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही, निवेशक ( bitcoin currency) हैं कि लगातार क्रिप्टों में अपना निवेश बढ़ाते ही जा रहे हैं।

Cryptocurrency: युवा निवेशक क्रिप्टो में जमकर लगा रहे है पैसा

आरबीआई ( Reserve bank of india ) बार-बार क्रिप्टो करेंसी ( crypto currency ) और इसके निवेशकों को आगाह कर रही हैं, लेकिन क्रिप्टों में पैसा लगाने वालों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही, निवेशक ( bitcoin currency) हैं कि लगातार क्रिप्टों में अपना निवेश बढ़ाते ही जा रहे हैं। जयपुर में बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी में इन्वेस्टमेंट को लेकर होड़ सी मची है। यहीं कारण है वर्तमान में अब तक जयपुर में करीब एक लाख लोगों क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कर चुके है और यह आंकड़ा प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। बात अगर पूरे भारत की करें तो करीब 2 करोड़ लोग भारत में क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कर चुके है। जयपुर के एक लाख लोगों ने क्रिप्टोकरेंसी में करीब 150 करोड़ का निवेश कर रखा है।

युवाओं की पहली पसंद अब क्रिप्टो
करोड़पति युवाओं की पहली पसंद अब क्रिप्टो बन चुका है, अमेरिका में अधिकांश युवा करोड़पति अपना पैसा, क्रिप्टो करेंसी में ही लगा रहे हैं, दुनिया के कई और क्रिप्टो करेंसी क्या होता है? देशों में भी इसी तरह का चलन देखने को मिल रहा है, लेकिन कुछ देश इसे कानूनी मान्यता भी दे चुके हैं, जबकि भारत में अभी तक क्रिप्टो का भविष्य साफ नहीं है, बावजूद इसके, लोग इसमें बिना डर पैसा लगा रहे हैं।

क्रिप्टो के विरोध में आरबीआई हमेशा से
वैकल्पिक मुद्राओं को मान्यता देने के विरोध में आरबीआई हमेशा से अडिग रहा है। हालांकि केंद्रीय बैंक को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 2018 में क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध को वापस लेने के लिए मजबूर किया गया, लेकिन इसने क्रिप्टोकरेंसी पर अपनी राय नहीं बदली है।

क्यों बना हुआ डर.
इसको कोई सरकार या कोई विनियामक अथॉरिटी इसे जारी नहीं करती है। इसके अलावा टैक्स, मनी लॉन्ड्रिंग, इनसोल्वेंसिंग कोड, पेमेंट सिस्टम, निजता और डाटा प्रोटेक्शन भी बड़ी चुनौतियां होंगी।

घोटालों की संख्या बढ़कर 3300 हुई
साल 2021 में क्रिप्टोकरेंसी के बाजार में सक्रिय वित्तीय घोटालों की संख्या 2020 के 2052 के आंकड़े से बढ़कर 3300 हो गई है। दुनिया की लोकप्रिय क्रिप्टोकरेंसी इथेरियम और बिटकॉइन के मूल्य में वृद्धि के साथ इनमें निवेश करने वाले निवेशकों के साथ घोटाले होने की वारदातों में भी इजाफा हुआ है।

क्रिप्टो करेंसी क्या है?
क्रिप्टो करेंसी किसी मुद्रा का एक डिजिटल रूप है। यह किसी सिक्के या नोट की तरह ठोस रूप में आपकी जेब में नहीं होता है। यह पूरी क्रिप्टो करेंसी क्या होता है? तरह से ऑनलाइन होती है और व्यापार के रूप में बिना किसी नियमों के इसके जरिए व्यापार होता है।

क्रिप्टो करेंसी को नियंत्रित करने के लिए कुछ नियम बनाने होंगे। इनकी प्रतियोगिता की कोई जरूरत नहीं है। क्रिप्टो करेंसी के सार्वजनिक और केंद्रीय बैंक साथ-साथ चल सकते हैं। पूरी दूनिया में इसका चलन बढ़ रहा है। अगर भारत में इसपर बैन लगता है, तो हम एक बार फिर डिजिटल रूप में दूनिया से पीछड़ जाएंगे।
आयुष अग्रवाल, एडवाइजर, क्रिप्टो

क्रिप्टो एक्सचेंज पॉइंट नो यॉर कस्टमर (केवाईसी) इक_ा करके इसकी लेन-देन सिर्फ बैंक अकाउंट के जरिए कर सकते हैं। इस तरीके से कुछ बुरे तत्व इसका लाभ नहीं उठा पाएंगे, क्योंकि ब्लॉकचेन तकनीक में यह सार्वजनिक पारदर्शिता की व्यवस्था कर पाएगा।
अशोक जालान, विशेषज्ञ, इक्विटी बाजार

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